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बहुचर्चित खैर के पेड़ कटाई मामले में नया मोड़,, आदिवासी पर दबाब बना कर बनाया बलि का बकरा, थाना में हुई शिकायत

प्रकाशित: 03-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
शहडोल /उमरिया (वीअ)। घुनघुटी वन परिक्षेत्र में बहुचर्चित खैर की अवैध कटाई का मामला अब नया मोड़ ले चुका है। जंगल में बड़े पैमाने पर खैर के पेड़ों की कटाई के बाद जब ठूंठ गिनती हुई तो विभाग की नींद उड़ गई। अपनी इसी विफलता और लापरवाही पर पर्दा डालने और आंकड़ों की खानापूर्ति के लिए वन विभाग ने गांव के भोले-भाले आदिवासी वाहन चालक को निशाने पर ले लिया है।
सूत्रों के अनुसार घुनघुटी के जंगलों में खैर की अवैध कटाई लंबे समय से चल रही थी, जिसकी भनक तक स्थानीय बीट अमले को नहीं लगी। जब मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आया और ठूंठों की गिनती कराई गई तो जंगल में बड़ी संख्या में खैर के ठूंठ पाए गए। इस पर विभाग ने कार्रवाई करते हुए पहले स्थानीय बीट गार्ड और उप वनपाल को निलंबित कर दिया और आनन-फानन में जांच बैठा दी गई।
इसी जांच की आड़ में विभाग ने अपनी गर्दन बचाने के लिए तीन अलग-अलग अपराध पंजीबद्ध किए, जिनका अपराध ाढमांक 806/04, 7790/23 और 807/01 है। इन तीनों प्रकरणों को एक साथ जोड़कर 25 अगस्त को घुनघुटी निवासी एक गरीब आदिवासी के नाम धारा 72 के तहत समन जारी कर दिया गया। समन मिलते ही 31 अगस्त को पीड़ित प्रदीप बैगा उर्फ टिप्पू पिता कन्जी बैगा निवासी घुनघुटी, जो वाहन चलाकर अपना परिवार पालता है, बयान देने घुनघुटी स्थित रेंज ऑफिस पहुंचा। आरोप है कि उसे घुनघुटी से अन्यत्र स्थान पर ले जाया गया। पीड़ित का आरोप है कि बयान के नाम पर बीट गार्ड सुभाष पटेल ने उससे गाली-गलौज शुरू कर दी और खैर काटने वालों के नाम बताने का दबाव बनाया। जब उसने कहा कि साहब मैं तो दिन भर गाड़ी चलाता हूं, मुझे जंगल के बारे में कुछ नहीं पता, तो उसे हाथ-मुक्कों से पीटा गया, जिससे वह जमीन पर गिर पड़ा। इसके बाद उसके बायें पैर के जंघे पर 04-05 डंडे मारे गए, जिसके चोट के निशान अभी भी बने हुए हैं। उसे करीब पांच घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया और डरा-धमकाकर तीन-चार सादे कागजों पर जबरन हस्ताक्षर करा लिए गए। विभाग की इस कार्यप्रणाली से कई गंभीर सवाल खड़े होते हैं।
यदि खैर की कटाई हुई है तो विभाग ने मौके पर असली तस्करों को क्यों नहीं पकड़ा ? ठूंठ गिनती के बाद ही अचानक एक ही आदिवासी पर तीन अपराध कैसे दर्ज हो गए ? और बयान के लिए बुलाए गए व्यक्ति को पीट कर सादे कागज पर हस्ताक्षर कराने की क्या जरूरत पड़ गई ? पीड़ित ने 01 सितंबर को थाना पाली में आवेदन देकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी बीट गार्ड पर कार्रवाई की मांग की है। पाली पुलिस ने आवेदक का मेडिकल कराते हुए आवेदन पर जांच शुरू कर दी है। आरोप प्रत्यारोप में कितनी सच्चाई है, इसका पता तो जांच के बाद ही चल सकेगा।