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पति को अलग रह रही पत्नी को उसकी क्षमता से अधिक गुजारा भत्ता का आदेश नहीं दिया जा सकता

प्रकाशित: 03-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली , (विसं)। दिल्ली की एक अदालत ने कहा है कि किसी व्यक्ति को उसकी आर्थिक क्षमता से अधिक गुजारा भत्ता देने का आदेश नहीं दिया जा सकता, भले ही अलग रह रही उसकी पत्नी को प्रदान की गई राशि उसकी बुनियादी जरूरतें पूरी करने के लिए अपर्याप्त हो। अदालत ने कहा कि गुजारा भत्ते का निर्धारण भुगतान करने वाले पति की वास्तविक या अनुमानित आय को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। अदालत ने यह टिप्पणी एक महिला की अपील खारिज करते हुए की, जिसमें उसने घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत एक मजिस्ट्रेट द्वारा निर्धारित 1,840 रुपये प्रतिमाह के अंतरिम गुजारा भत्ते को चुनौती दी थी। याचिका पर सुनवाई करते हुए अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रवीण सिंह ने कहा कि महिला की इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि यह राशि दिल्ली में उसके गुजारे के लिए बहुत कम है।
अदालत ने एक सितंबर के आदेश में कहा, ''अदालत को यह ध्यान रखना होगा कि अपीलकर्ता को केवल उतनी ही आय के आधार पर गुजारा भत्ता दिया जा सकता है, जितनी प्रतिवादी संख्या दो (पति) की वास्तविक आय थी या होने का अनुमान लगाया जा सकता था।'' अदालत ने कहा कि महिला के पति की मासिक आय स्थापित करने के लिए कोई साक्ष्य नहीं था। महिला ने दावा किया था कि उसके पति की एक मेडिकल दुकान है और कृषि एवं वाणिज्यिक संपत्तियों से किराये की आय होती है, लेकिन इन दावों के समर्थन में कोई दस्तावेज पेश नहीं किया गया। मजिस्ट्रेट अदालत ने उत्तर प्रदेश में लागू न्यूनतम मजदूरी के आधार पर पति की आय का आकलन किया, जहां वह रह रहा था। आदेश के अनुसार, संबंधित समय में एक अकुशल श्रमिक के लिए न्यूनतम मजदूरी करीब 11,021 रुपये प्रतिमाह थी। निचली अदालत ने गुजारा भत्ता निर्धारित करने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अन्नुरिता वोहरा बनाम संदीप वोहरा मामले में निर्धारित सिद्धांतों का पालन किया और परिवार के सदस्यों के बीच आय का बंटवारा किया।