हाईकोर्ट जबलपुर के ऐतिहासिक आदेश के तहत सीएमओ आशा भडारी का गलत तबादला निरस्त
प्रकाशित: 03-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
शहडोल (वीअ)। मध्य प्रदेश शासन की पारदर्शी नीतियों, उच्च न्यायालय जबलपुर के न्यायसंगत फैसले और स्थानीय प्रशासनिक प्रतिबद्धता के चलते शहडोल में कानून और नियमों की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हुई है। मध्य प्रदेश शासन के नगरीय विकास एवं आवास विभाग द्वारा गत 02 जून 2026 को जारी स्थानांतरण आदेश (ाढमांक 2332/5038776/2026/18-1) को निरस्त करते हुए उच्च न्यायालय (याचिका ाढमांक 19777/2026) ने सेवा नियमों के संरक्षण का महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। इस ऐतिहासिक आदेश के बाद नगरपालिका परिषद शहडोल में पदस्थ मुख्य नगरपालिका अधिकारी (ण्श्ध् वर्ग-ए) श्रीमती आशा भंडारी (मेड़ा) ने पुन शहडोल में अपनी उपस्थिति दर्ज करा ली है। इस फैसले से न केवल प्रशासनिक निरंतरता को बल मिला है, बल्कि क्षेत्र के सांसद, स्थानीय विधायक,नगरपालिका अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मुख्य अधिकारी और शहर की जागरूक जनता में शासन एवं न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और गहरा हुआ है। मामले के अनुसार, 11 अगस्त 2026 को माननीय उच्च न्यायालय जबलपुर की एकल पीठ (माननीय न्यायमूर्ति विशाल धगट) द्वारा पारित आदेश में मध्य प्रदेश नगरपालिका सेवा नियमों की स्पष्ट व्याख्या की गई। अदालत ने पाया कि 2014 में वर्ग-ए मुख्य नगरपालिका अधिकारी के पद पर पदोन्नत अधिकारी को नियमों के विरुद्ध 'वर्ग-बी' की नगरपालिका में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता, क्योंकि इससे अधिकारी के सेवा वर्ग और प्रशासनिक गरिमा पर प्रभाव पड़ता है। शासन की प्रशासनिक व्यवस्था और मध्य प्रदेश नगरपालिका अधिनियम 1961 की धारा 86(4) व सेवा नियम 1973 के सही ािढयान्वयन को सुनिश्चित करते हुए न्यायालय ने स्थानांतरण आदेश को निरस्त कर दिया। न्यायालय के इस संतुलित निर्णय का सम्मान करते हुए श्रीमती आशा भंडारी ने 01 सितम्बर 2026 को पुन नगरपालिका परिषद शहडोल में अपना कार्यभार (उपस्थिति प्रतिवेदन) संभाल लिया है। यह पूरा घटपाम स्थानीय सुशासन, जनप्रतिनिधियों की सािढयता और नागरिकों के सहयोग का एक बेहतरीन उदाहरण बनकर उभरा है।