राउज एवेन्यू कोर्ट ने पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती सहित 17 लोगों को किया बरी, 12 साल पुराने इस मामले में दी राहत
प्रकाशित: 24-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
दिल्ली का एक अदालत ने पूर्व मंत्री सोमनाथ भारती को दक्षिण दिल्ली के खिड़की एक्सटेंशन में आधी रात को हई रेड के मामले में बरी कर दिया है. कहा जा रहा है कि इस रेड में अफ्रीकी महिलाओं के साथ यौन उत्पीड़न किया गया था. भारती के साथ-साथ अदालत ने 17 और लोगों को बरी किया है. घटना 2014 की है. राउज एवेन्यू कोर्ट की एडिशनल चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट नेहा मित्तल ने शुक्रवार ये फैसला सुनाया है.
विस्तृत आदेश आना बाकी
अदालत ने शुक्रवार को मौखिक रूप से कहा कि पीड़ितों के बयान मान्य नहीं माने जा सकते हैं क्योंकि वे अदालत में पेश नहीं हुईं. गैरकानूनी जमावड़े का कोई भी मामला साबित नहीं हो पाया है. अपना केस साबित करने में अभियोजन पक्ष नाकाम रहा. अभियोजन पक्ष केस दर्ज करने में हुई देरी को भी सिद्ध नहीं कर पाया. इस फैसले का विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है.
अब जानें क्या है पूरा मामला
15 और 16 जनवरी 2014 की दरमियानी रात को तत्कालीन कानून मंत्री और मालवीय नगर से आप विधायक सोमनाथ भारती ने लोगों के एक समूह का नेतृत्व किया. उन पर आरोप था कि अफ्रीकी देशों की महिलाओं को इस दौरान परेशान किया गया और उन पर हमला भी किया. आरोपियों ने दावा किया था कि महिलाएं गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थीं. अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि कई महिलाओं को इसमें चोटें आईं थीं. आरोप है कि उस जगह पर कथित तौर पर ड्रग्स और वैश्यावृत्ति का रैकेट चलाया जा रहा था. उन्हें इसी काफी शिकायतें मिली थीं, जिस वजह से उन्होंने रेड की थी.
इन मामलों में दर्ज हुआ था केस
अदालत ने 2018 में भारती और अन्य लोगों के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप तय किए थे. अदालत ने उस वक्त कहा था कि सभी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल आगे बढ़ाने के लिए पहली नजर में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. भारती और अन्य लोगों के खिलाफ अदालत ने IPC की धारा 147/149, 354, 354C, 342, 506, 143, 509, 153A, 323, 452, 427 और 186 के तहत आरोप तय किए थे. दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में अपने केस को साबित करने के लिए 41 गवाहों का ज़िक्र किया था, जिनमें नौ अफ्रीकी महिलाएं भी थीं.
अदालत के निर्देश पर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
अदालत के निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. पीड़ित महिला ने घटना में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की मांग की थी.
विस्तृत आदेश आना बाकी
अदालत ने शुक्रवार को मौखिक रूप से कहा कि पीड़ितों के बयान मान्य नहीं माने जा सकते हैं क्योंकि वे अदालत में पेश नहीं हुईं. गैरकानूनी जमावड़े का कोई भी मामला साबित नहीं हो पाया है. अपना केस साबित करने में अभियोजन पक्ष नाकाम रहा. अभियोजन पक्ष केस दर्ज करने में हुई देरी को भी सिद्ध नहीं कर पाया. इस फैसले का विस्तृत आदेश आना अभी बाकी है.
अब जानें क्या है पूरा मामला
15 और 16 जनवरी 2014 की दरमियानी रात को तत्कालीन कानून मंत्री और मालवीय नगर से आप विधायक सोमनाथ भारती ने लोगों के एक समूह का नेतृत्व किया. उन पर आरोप था कि अफ्रीकी देशों की महिलाओं को इस दौरान परेशान किया गया और उन पर हमला भी किया. आरोपियों ने दावा किया था कि महिलाएं गैर-कानूनी गतिविधियों में शामिल थीं. अभियोजन पक्ष ने दावा किया कि कई महिलाओं को इसमें चोटें आईं थीं. आरोप है कि उस जगह पर कथित तौर पर ड्रग्स और वैश्यावृत्ति का रैकेट चलाया जा रहा था. उन्हें इसी काफी शिकायतें मिली थीं, जिस वजह से उन्होंने रेड की थी.
इन मामलों में दर्ज हुआ था केस
अदालत ने 2018 में भारती और अन्य लोगों के खिलाफ छेड़छाड़ के आरोप तय किए थे. अदालत ने उस वक्त कहा था कि सभी आरोपियों के खिलाफ ट्रायल आगे बढ़ाने के लिए पहली नजर में पर्याप्त सबूत मौजूद हैं. भारती और अन्य लोगों के खिलाफ अदालत ने IPC की धारा 147/149, 354, 354C, 342, 506, 143, 509, 153A, 323, 452, 427 और 186 के तहत आरोप तय किए थे. दिल्ली पुलिस ने चार्जशीट में अपने केस को साबित करने के लिए 41 गवाहों का ज़िक्र किया था, जिनमें नौ अफ्रीकी महिलाएं भी थीं.
अदालत के निर्देश पर पुलिस ने दर्ज की एफआईआर
अदालत के निर्देश पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी. पीड़ित महिला ने घटना में शामिल लोगों के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज करने की मांग की थी.