CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग फिर हुई तेज, राज्यसभा में विपक्ष के 73 सांसदों ने दिया नया नोटिस
प्रकाशित: 24-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्ष ने एक बार फिर मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को राज्यसभा के करीब 73 विपक्षी सांसदों ने उनके खिलाफ नया प्रस्ताव पेश किया है। सूत्रों के मुताबिक यह कदम तमिलनाडु विधानसभा के 234 सीटों के चुनाव और पश्चिम बंगाल में पहले चरण की वोटिंग के बाद उठाया गया है। उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन को भेजे गए पत्र में कहा गया है, 'यह नया नोटिस एक अलग और हाल ही में सामने आए आधार पर दिया गया है।'
पत्र में आगे लिखा गया है, 'यह 15 मार्च 2026 के बाद ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए कार्यों और चूक तक सीमित है, जिनमें से हर एक और सभी मिलकर गंभीर स्तर के सिद्ध दुराचार को दर्शाते हैं।' विपक्षी सांसदों ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायिक सदस्य शामिल हों। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सौंपे। सांसदों ने यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक ज्ञानेश कुमार चुनाव से जुड़े सभी कार्यों से खुद को अलग रखें।
पहले भी लाया जा चुका है प्रस्ताव
बता दें कि इससे पहले 12 मार्च को 63 राज्यसभा सांसदों और 130 लोकसभा सांसदों ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि 6 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सबूतों की कमी बताते हुए इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।
'चुनाव आयोग ने अपनाया पक्षपातपूर्ण रवैया'
नए प्रस्ताव में सांसदों ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'आचार संहिता लागू करने में लगातार पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।' सांसदों ने 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 29 मिनट के भाषण का हवाला दिया, जिसे दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी पर लाइव प्रसारित किया गया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह भाषण उसी दिन तमिलनाडु के कोयंबटूर में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषण से 'लगभग समान' था।
पत्र के मुताबिक, 'प्रधानमंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नाम लेकर आलोचना की और उन्हें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के मामले में ‘भ्रूण हत्या’ जैसा अपराध करने वाला बताया तथा देश के संविधान के खिलाफ अपराधी कहा। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल के मतदाताओं से इन दलों के खिलाफ वोट करने की अपील की।' इन 4 राज्यों में से केरल में उस समय मतदान पूरा हो चुका था, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान शुरू होना बाकी था।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पत्र में बताया गया कि राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा, पी. संतोश कुमार और एम.ए. बेबी ने 19 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त से शिकायत की थी। इसके अलावा 20 अप्रैल को 700 नागरिकों ने भी ज्ञापन सौंपा था। सांसदों ने आरोप लगाया, 'इस नोटिस की तारीख तक ज्ञानेश कुमार ने न कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया, न कोई सलाह दी और न ही कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।' उन्होंने कहा कि यह रवैया पहले के चुनावों के दौरान चुनाव आयोग के रुख से अलग है।
'कांग्रेस के खिलाफ शिकायतों पर तेजी से एक्शन'
पत्र में यह भी कहा गया है, 'इसके उलट, ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने भाजपा द्वारा विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस के खिलाफ दी गई शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की। यह दोहरे मानदंड का उदाहरण है और पहले दिए गए नोटिस में उठाए गए मुद्दों की ही निरंतरता है।'
पत्र में आगे लिखा गया है, 'यह 15 मार्च 2026 के बाद ज्ञानेश कुमार द्वारा किए गए कार्यों और चूक तक सीमित है, जिनमें से हर एक और सभी मिलकर गंभीर स्तर के सिद्ध दुराचार को दर्शाते हैं।' विपक्षी सांसदों ने मांग की है कि मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई जाए, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक मौजूदा जज, किसी हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और अन्य न्यायिक सदस्य शामिल हों। यह कमेटी अपनी रिपोर्ट राज्यसभा के सभापति को सौंपे। सांसदों ने यह भी मांग की है कि जब तक जांच पूरी न हो, तब तक ज्ञानेश कुमार चुनाव से जुड़े सभी कार्यों से खुद को अलग रखें।
पहले भी लाया जा चुका है प्रस्ताव
बता दें कि इससे पहले 12 मार्च को 63 राज्यसभा सांसदों और 130 लोकसभा सांसदों ने भी ज्ञानेश कुमार को हटाने का प्रस्ताव दिया था। हालांकि 6 अप्रैल को राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सबूतों की कमी बताते हुए इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया था।
'चुनाव आयोग ने अपनाया पक्षपातपूर्ण रवैया'
नए प्रस्ताव में सांसदों ने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया है कि उन्होंने 'आचार संहिता लागू करने में लगातार पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाया है।' सांसदों ने 18 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 29 मिनट के भाषण का हवाला दिया, जिसे दूरदर्शन, संसद टीवी और आकाशवाणी पर लाइव प्रसारित किया गया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि यह भाषण उसी दिन तमिलनाडु के कोयंबटूर में चुनाव प्रचार के दौरान दिए गए भाषण से 'लगभग समान' था।
पत्र के मुताबिक, 'प्रधानमंत्री ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, द्रविड़ मुनेत्र कषगम, ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस और समाजवादी पार्टी का नाम लेकर आलोचना की और उन्हें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के मामले में ‘भ्रूण हत्या’ जैसा अपराध करने वाला बताया तथा देश के संविधान के खिलाफ अपराधी कहा। साथ ही उन्होंने तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश और केरल के मतदाताओं से इन दलों के खिलाफ वोट करने की अपील की।' इन 4 राज्यों में से केरल में उस समय मतदान पूरा हो चुका था, जबकि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान शुरू होना बाकी था।
शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप
पत्र में बताया गया कि राज्यसभा सांसद मनोज कुमार झा, पी. संतोश कुमार और एम.ए. बेबी ने 19 अप्रैल को मुख्य चुनाव आयुक्त से शिकायत की थी। इसके अलावा 20 अप्रैल को 700 नागरिकों ने भी ज्ञापन सौंपा था। सांसदों ने आरोप लगाया, 'इस नोटिस की तारीख तक ज्ञानेश कुमार ने न कोई कारण बताओ नोटिस जारी किया, न कोई सलाह दी और न ही कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया दी।' उन्होंने कहा कि यह रवैया पहले के चुनावों के दौरान चुनाव आयोग के रुख से अलग है।
'कांग्रेस के खिलाफ शिकायतों पर तेजी से एक्शन'
पत्र में यह भी कहा गया है, 'इसके उलट, ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में आयोग ने भाजपा द्वारा विपक्षी नेताओं, खासकर कांग्रेस के खिलाफ दी गई शिकायतों पर तेजी से कार्रवाई की। यह दोहरे मानदंड का उदाहरण है और पहले दिए गए नोटिस में उठाए गए मुद्दों की ही निरंतरता है।'