वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य से जुड़ी याचिका पर आज सुनवाई करेगा हाई कोर्ट
प्रकाशित: 16-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (विसं)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि वह यहां जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल कर रहे कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताने वाली जनहित याचिका पर बृहस्पतिवार को सुनवाई करेगा।
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 25 दिन से अधिक समय से प्रदर्शन कर रही है। वांगचुक 28 जून को इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन द्वारा आहूत कार्य बहिष्कार के बीच संबंधित प्राधिकारियों की ओर से अदालत में कोई पेश नहीं हुआ जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पी" ने जनहित याचिका पर सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी। पी" ने कहा, मामले की तात्कालिकता को देखते हुए इसे कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने आदेश की एक प्रति संबंधित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के वकील को देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने कहा कि स्थिति दुखद एवं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शन कर रहा एक नागरिक पूरे देश के सामने एक तरह से अपनी जान दे रहा है। सैनी ने अपनी जनहित याचिका में अनुरोध किया है कि संबंधित प्राधिकारियों को वांगचुक की मदद करने और उनसे इस मुद्दे पर बातचीत करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कार्यकर्ता को जबरन भोजन कराए जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया कि सरकार इस मामले को लेकर चिंतित नहीं दिखती, लेकिन अदालत किसी नागरिक को स्वेच्छा से भूख से मरने की अनुमति सरकार को नहीं देगी। याचिका में कहा गया कि यदि वांगचुक की जान चली जाती है तो यह देश के लिए बेहद शर्म की बात होगी और सरकार से कम से कम इतनी अपेक्षा की जाती है कि वह उनकी जान बचाने के लिए उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराए। याचिका में कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिक का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार है तथा मौजूदा स्थिति में सरकार की निषक्रियता वस्तुत: आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध के समान होगी। याचिका में कहा गया, वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार के कानों पर जूं भी नहीं रेंग रही है और वह इस बेहद अवांछनीय तथा अस्वीकार्य स्थिति को लेकर बिल्कुल भी चिंतित या प्रभावित नहीं दिख रही है। यह स्थिति अत्यंत निंदनीय है। यहां तक कि एक नागरिक ने टिप्पणी की है कि ऐसा लगता है कि देश की अंतरात्मा मर चुकी है। याचिका में कहा गया, हालांकि, याचिकाकर्ता को विश्वस है कि अदालतों की अंतरात्मा अभी जीवित है और इसी कारण वह इस मामले में तत्काल राहत के लिए अदालत का रुख कर रहा है।
कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) में कथित अनियमितताओं के विरोध में और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 25 दिन से अधिक समय से प्रदर्शन कर रही है। वांगचुक 28 जून को इस प्रदर्शन में शामिल हुए थे और तभी से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर हैं। उच्च न्यायालय की बार एसोसिएशन द्वारा आहूत कार्य बहिष्कार के बीच संबंधित प्राधिकारियों की ओर से अदालत में कोई पेश नहीं हुआ जिसके बाद मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पी" ने जनहित याचिका पर सुनवाई बुधवार को स्थगित कर दी। पी" ने कहा, मामले की तात्कालिकता को देखते हुए इसे कल सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए। अदालत ने आदेश की एक प्रति संबंधित अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और दिल्ली सरकार के वकील को देने का निर्देश दिया। याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने कहा कि स्थिति दुखद एवं बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है क्योंकि प्रदर्शन कर रहा एक नागरिक पूरे देश के सामने एक तरह से अपनी जान दे रहा है। सैनी ने अपनी जनहित याचिका में अनुरोध किया है कि संबंधित प्राधिकारियों को वांगचुक की मदद करने और उनसे इस मुद्दे पर बातचीत करने का निर्देश दिया जाए। याचिका में कार्यकर्ता को जबरन भोजन कराए जाने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कहा गया कि सरकार इस मामले को लेकर चिंतित नहीं दिखती, लेकिन अदालत किसी नागरिक को स्वेच्छा से भूख से मरने की अनुमति सरकार को नहीं देगी। याचिका में कहा गया कि यदि वांगचुक की जान चली जाती है तो यह देश के लिए बेहद शर्म की बात होगी और सरकार से कम से कम इतनी अपेक्षा की जाती है कि वह उनकी जान बचाने के लिए उन्हें तत्काल चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराए। याचिका में कहा गया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना नागरिक का मौलिक और लोकतांत्रिक अधिकार है तथा मौजूदा स्थिति में सरकार की निषक्रियता वस्तुत: आत्महत्या के लिए उकसाने के अपराध के समान होगी। याचिका में कहा गया, वांगचुक 28 जून से भूख हड़ताल पर हैं लेकिन ऐसा लगता है कि सरकार के कानों पर जूं भी नहीं रेंग रही है और वह इस बेहद अवांछनीय तथा अस्वीकार्य स्थिति को लेकर बिल्कुल भी चिंतित या प्रभावित नहीं दिख रही है। यह स्थिति अत्यंत निंदनीय है। यहां तक कि एक नागरिक ने टिप्पणी की है कि ऐसा लगता है कि देश की अंतरात्मा मर चुकी है। याचिका में कहा गया, हालांकि, याचिकाकर्ता को विश्वस है कि अदालतों की अंतरात्मा अभी जीवित है और इसी कारण वह इस मामले में तत्काल राहत के लिए अदालत का रुख कर रहा है।