सीएजी रिपोर्ट्स ने खोली पिछली सरकार के वित्तीय कुप्रबंधन की परतें: रेखा गुप्ता
प्रकाशित: 12-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सदन में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट्स पर चर्चा के दौरान पिछली सरकार के कार्यकाल में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं, योजनाओं के ािढयान्वयन में लापरवाही और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट्स किसी राजनीतिक दल या सरकार द्वारा तैयार नहीं की गई हैं, बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था सीएजी द्वारा तैयार की गई हैं, जिनमें विभिन्न विभागों और योजनाओं की कार्यप्रणाली का विस्तृत ऑडिट सामने रखा गया है। वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद लंबित सीएजी रिपोर्ट्स को सदन में प्रस्तुत किया गया है और अपने लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में 19 सीएजी रिपोर्ट्स विधानसभा में रखी जा चुकी हैं। इन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और पब्लिक अकाऊंट्स कमेटी (पीएसी) भी इनका संज्ञान ले रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सदन में प्रस्तुत ये दो बड़ी रिपोर्ट्स वास्तव में एक रिपोर्ट कार्ड हैं। यह रिपोर्ट कार्ड न तो विपक्ष ने तैयार किया है, न ही वर्तमान सरकार ने और न ही किसी राजनीतिक दल ने इसे तैयार किया है। यह रिपोर्ट कार्ड देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था सीएजी द्वारा तैयार किया गया है। इस ऑडिट संस्था ने पिछली सरकार के कामकाज की पूरी तस्वीर सामने रख दी है और एक-एक विषय को विस्तार से बताया है कि किस प्रकार पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में जनता के पैसे के साथ गड़बड़ियां हुईं और दिल्ली के धन का दुरुपयोग हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने किसी भी सेक्टर या विभाग को नहीं छोड़ा। हेल्थ के क्षेत्र में उनके कार्यकाल से जुड़े मामले सामने आए, एजुकेशन के क्षेत्र में गड़बड़ियों की बात सामने आई, विज्ञापन और सब्सिडी से जुड़े विषय सामने आए। इसी प्रकार दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी सहित विभिन्न विभागों में भी अनियमितताओं के मामले सामने आए। स्थिति यह थी कि टेंडर से लेकर सब्सिडी देने तक सभी में गड़बड़ी पाई गई। यह घोटालों की सरकार थी और इस दौरान जनता परेशान होती रही, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सीएजी रिपोर्ट्स से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू का उल्लेख करते हुए कहा कि विधायकों ने रिपोर्ट्स के कई विषयों पर चर्चा की, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि पिछली सरकार के पास फंड उपलब्ध था, लेकिन उस फंड का भी पूरा उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 के फाइनेंशियल बजट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वर्ष 80,798 करोड़ रुपये का बजट था, लेकिन वास्तविक खर्च कितना हुआ, यह विचार करने का विषय है। कुल बजट में से मात्र लगभग 61,000 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, यानी सरकार के पास उपलब्ध पूरा फंड भी जनता के हित में खर्च नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि जनता के हित में कैपिटल एक्सपेंडिचर किया जाता तो सड़कें बन सकती थीं, फ्लाईओवर बन सकते थे, स्कूल खुल सकते थे और अन्य आवश्यक विकास कार्य किए जा सकते थे। लेकिन पिछली सरकार का ध्यान इस पर नहीं था।
उनका उद्देश्य यह था कि घोटाला कहां से हो सकता है, पैसे का गबन कैसे किया जा सकता है और बिना काम किए भी बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाकर जनता को कैसे भ्रमित किया जा सकता है। लगभग 81,000 करोड़ रुपये के बजट में से करीब 20,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं की गई, यानी जनता के लिए उपलब्ध धन का बड़ा हिस्सा उपयोग में ही नहीं लाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार से दिल्ली को सब्सिडीज और ग्रांट-इन-एड भी मिलती थीं, लेकिन उनका भी अपेक्षित उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार को न तो यमुना की सफाई से कोई मतलब था, न कूड़े के पहाड़ हटाने से, न ही दिल्ली की सड़कों को बेहतर बनाने से। प्रदूषण की समस्या भी बनी रही, लेकिन इन विषयों पर कोई प्रभावी जवाबदेही नहीं दिखाई गई। पिछली सरकार के कार्यकाल में पांच साल का चुनावी कार्यकाल समाप्त होने के बाद जनता से फिर कहा जाता था कि एक और पांच साल का मौका दे दीजिए। वादे लगातार किए गए, लेकिन काम अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकार की नीयत में ही खोट था। इसका प्रमाण इस बात से मिलता है कि कुल 32 ऐसी योजनाएं थीं, जिनके लिए 1,517 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय प्रस्तावित किया गया था। इन योजनाओं को बजट में शामिल किया गया, उनका ऐलान किया गया और उनके नाम पर वाहवाही भी लूटी गई। अखबारों में विज्ञापन और खबरें प्रकाशित हुईं, जनता के सामने यह बताया गया कि सरकार ने कितना कुछ कर दिया है, लेकिन जब वास्तविक परिणाम सामने आने का समय आया तो इन योजनाओं पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो के लोन का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में मेट्रो आज जीवन का अभिन्न हिस्सा है। आज यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि दिल्ली बिना मेट्रो के कैसी दिखेगी और कैसे चलेगी। केंद्र सरकार लगातार मेट्रो के निर्माण का काम करती रही, लेकिन दिल्ली सरकार ने अपना हिस्सा समय पर नहीं दिया। बजट में फंड उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया। पीएम आयुष्मान भारत योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 150 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे ताकि दिल्ली में आयुष्मान केंद्र खोले जा सकें और दिल्ली की जनता के आयुष्मान कार्ड बनाए जा सकें। लेकिन इस राशि का भी उपयोग नहीं किया गया और पैसा वापस चला गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य के लिए पैसा उपलब्ध कराया गया था, तो उसे खर्च क्यों नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस के लिए 40 करोड़ रुपये की ग्रांट इन ऐड उपलब्ध थी, लेकिन उस पर जीरो एक्सपेंडिचर हुआ। बच्चों के लिए स्कूलों में किताबें उपलब्ध कराना, क्लासरूम तैयार करना और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देना पिछली सरकार की प्राथमिकता नहीं थी। उन्होंने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (एनएफएसए) का उल्लेख करते हुए कहा कि राशन कार्ड के माध्यम से दिए जाने वाले राशन के लिए 40 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन उस राशि का भी उपयोग नहीं किया गया और पैसा वापस चला गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए भी 39 करोड़ रुपये की ग्रांट इन ऐड उपलब्ध थी, लेकिन उसका भी उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने सवाल किया कि कॉलेजों को अपडेट करने, कर्मचारियों को वेतन देने और संस्थानों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए पैसा खर्च करने की जरूरत क्यों महसूस नहीं की गई। इसके अलावा 34 अन्य योजनाएं ऐसी थीं, जिनके लिए 2,961 करोड़ रुपये की स्वीकृति ले ली गई थी लेकिन आखिरी दिन तक वह फंड खर्च नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह उस सरकार के कामकाज का उदाहरण है, जो बजट में राशि रखती थी, योजनाओं की घोषणा करती थी और जनता को यह दिखाती थी कि बहुत कुछ किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में योजनाओं पर पैसा खर्च नहीं किया जाता था। मुख्यमंत्री ने दिल्ली लक्ष्मी योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस योजना को वर्तमान सरकार ने पांच साल के भीतर लागू करने का संकल्प लिया और आज दिल्ली की महिलाओं को उसका लाभ मिलने की स्थिति आ गई है, उसके लिए पिछली सरकार भी हर साल बजट में फंड रखती थी। लेकिन उस फंड का उपयोग नहीं किया गया। हर साल महिलाओं से वादा किया जाता था कि योजना लागू की जाएगी और उन्हें पैसे दिए जाएंगे, लेकिन चुनाव का समय आते ही फिर नए वादे किए जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वादा लगातार किया गया, लेकिन उसे जमीन पर उतारने का काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जनता के पैसे से जुड़े जीएसटी रिफंड के मामले में भी पिछली सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं था। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में जीएसटी रिफंड मात्र 695 करोड़ रुपये था। वर्तमान सरकार के आने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में 1,313 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड दिया गया। वित्त वर्ष 2026-27 का अभी आधा वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन वर्तमान सरकार अब तक 550 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड कर चुकी है। वर्तमान सरकार का प्रयास है कि जनता का पैसा समयबद्ध तरीके से जनता तक वापस पहुंचे और लोगों को अपने ही पैसे के लिए इंतजार न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 19,973 करोड़ रुपये की योजनाओं से संबंधित 1,734 यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स लंबित थे, जबकि इनमें से मात्र 482 यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स ही सबमिट किए गए। यह स्थिति सरकारी खर्च में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट में यह स्पष्ट करना होता है कि राशि कब, कहां और किस प्रकार खर्च की गई तथा निर्धारित प्रािढया का पालन हुआ या नहीं। इसलिए इनके लंबित रहने से योजनाओं के वास्तविक उपयोग और खर्च की निगरानी प्रभावित होती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष के नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वे अलग-अलग मुद्दों पर सदन में जोर-जोर से सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी देखना चाहिए कि जिन विभागों और क्षेत्रों में उनके कार्यकाल के दौरान जिम्मेदारी रही, वहां क्या हुआ और सीएजी रिपोर्ट्स ने क्या तथ्य सामने रखे हैं। पिछली सरकार के कार्यकाल में व्यवस्था में जो ‘दीमक' लगी थी, वर्तमान सरकार उसे खत्म करने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसे उदाहरण के तौर पर समझाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने सिस्टम में सुधार के लिए ‘पेस्टिसाइड' का छिड़काव किया है और अब उसी प्रािढया में पिछली सरकार के समय की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने दस वर्षों में पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाया और दिल्ली की जनता के साथ अन्याय किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में योजनाओं को लेकर एक ‘ऑरा फ्रेमिंग' की जाती थी। योजना की घोषणा होती थी, बड़े-बड़े दावे किए जाते थे और यह माहौल बनाया जाता था कि बहुत बड़ा काम होने जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में योजनाओं का ािढयान्वयन नहीं होता था। उन्होंने कहा कि सीएजी रिपोर्ट्स ने बताया है कि किस प्रकार योजनाओं के नाम पर प्रचार किया जाता था, योजनाओं पर नेताओं की तस्वीरें लगाई जाती थीं और बड़े पैमाने पर विज्ञापन किए जाते थे। यह प्रचार केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बिजली कंपनियों की रेगुलेटरी एसेट से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद बिजली के टैरिफ में वृद्धि नहीं हुई, जिसके कारण बिजली की खरीद और वितरण से होने वाली वास्तविक आय के बीच अंतर बढ़ता गया। यही अंतर धीरे-धीरे रेगुलेटरी एसेट के रूप में जमा होता गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 में यह रेगुलेटरी एसेट करीब 9,000 करोड़ रुपये थी। इसके बाद यह बढ़कर 27,200 करोड़ रुपये हो गई और वर्तमान में यह अंतर लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वह बड़ा वित्तीय अंतर है जो बिजली कंपनियों द्वारा बिजली खरीदने की लागत और उपभोक्ताओं को बिजली देने के बाद प्राप्त राजस्व के बीच बना है। आने वाले समय में बिजली कंपनियां इस 38,000 करोड़ रुपये के बोझ को दिल्ली की जनता पर डालने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन वर्तमान दिल्ली सरकार ऐसा नहीं होने देगी। वर्तमान सरकार इस मामले में मजबूती से खड़ी है और कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने टेंडर प्रािढया में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 530 करोड़ रुपये की कुल राशि के 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड से किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि से जुड़े 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड के माध्यम से कैसे हो सकते हैं और इस पूरी प्रािढया की निगरानी किस स्तर पर की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ऐसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने के लिए लगातार प्रशासनिक सुधार कर रही है और सरकारी खरीद प्रािढया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मात्र डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाइयों की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों में सरकार ने रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई की। प्रोक्योरमेंट सेल से 40 अधिकारियों का एक ही दिन में ट्रांसफर किया गया तथा तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। उन्होंने कहा कि इन तीनों अधिकारियों के निलंबन के बाद करीब 60 दिन बीत चुके हैं और वे अभी भी जेल में हैं। वर्तमान सरकार की नीति स्पष्ट है कि जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां सरकार स्वयं कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 70 ऐसे डॉक्टर, जो वर्षों से जेलों में तैनात थे और अस्पतालों में अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे थे, उन्हें अस्पतालों में भेजकर उनकी निर्धारित जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया। इसी प्रकार, जहां पहले एक-एक मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) के पास चार-चार अस्पतालों की जिम्मेदारी थी, वहां सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक अस्पताल के लिए एक एमएस की दिशा में काम किया ताकि अस्पतालों का प्रशासन और संचालन अधिक प्रभावी हो सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीएसटी विभाग में भी वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात 150 अधिकारियों को बदला गया। अधिकारियों की नई पोस्टिंग मनमाने तरीके से नहीं की गई, बल्कि लकी ड्रॉ के माध्यम से रैंडम पोस्टिंग की व्यवस्था की गई, ताकि किसी अधिकारी को अपनी पसंद का वार्ड या स्थान चुनने की सुविधा न हो। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सरकारी खरीद में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) को अनिवार्य किया है। विभागों द्वारा जेम पर खरीदारी की लगातार समीक्षा की जा रही है और निर्धारित प्रािढया का पालन नहीं करने वाले विभागों को कारण बताओ नोटिस दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी खरीद में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, दिल्ली सरकार के पूरे प्रशासनिक सिस्टम को ई-ऑफिस में बदला गया है। अब सरकारी फाइलों का कामकाज डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है, जिससे निर्णय प्रािढया में पारदर्शिता और रिकॉर्ड की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि सरकार ई-कैबिनेट का प्रस्ताव भी ला चुकी है और जल्द ही दिल्ली कैबिनेट की कार्यप्रणाली भी ई-कैबिनेट के माध्यम से संचालित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राशन की दुकानों पर ई-पीओएस मशीनें भी लगाई हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली व्यवस्था में टेंडर्स के साथ आर्बिट्रेशन क्लॉज का इस्तेमाल कई मामलों में सरकारी धन की बड़ी लीकेज का माध्यम बन गया था। उन्होंने बताया कि कई बार कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू कर दिया जाता था, लेकिन जमीन का अधिग्रहण, पेड़ों की कटिंग की अनुमति या अन्य जरूरी परमिशंस पूरी नहीं हुई होती थीं। इसके चलते काम अटक जाता था और कॉन्ट्रैक्टर आर्बिट्रेशन में चला जाता था। वर्तमान सरकार ने आर्बिट्रेशन क्लॉज को बंद करने का निर्णय लिया है, ताकि ऐसी वित्तीय लीकेज और अनियमितताओं को रोका जा सके तथा दिल्ली के सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन के पटल पर रखी गई सीएजी रिपोर्ट्स और उन पर सदस्यों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई को गति दी जाए, ताकि दिल्ली की जनता के साथ अन्याय करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान दिल्ली सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के सिद्धांत पर काम कर रही है और सरकारी व्यवस्था में ऐसी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, जहां जनता के पैसे या अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता हो।
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के मॉनसून सत्र के अंतिम दिन मंगलवार को मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने सदन में प्रस्तुत सीएजी रिपोर्ट्स पर चर्चा के दौरान पिछली सरकार के कार्यकाल में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं, योजनाओं के ािढयान्वयन में लापरवाही और सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी को लेकर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि ये रिपोर्ट्स किसी राजनीतिक दल या सरकार द्वारा तैयार नहीं की गई हैं, बल्कि देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था सीएजी द्वारा तैयार की गई हैं, जिनमें विभिन्न विभागों और योजनाओं की कार्यप्रणाली का विस्तृत ऑडिट सामने रखा गया है। वर्तमान सरकार के सत्ता में आने के बाद लंबित सीएजी रिपोर्ट्स को सदन में प्रस्तुत किया गया है और अपने लगभग डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में 19 सीएजी रिपोर्ट्स विधानसभा में रखी जा चुकी हैं। इन पर लगातार कार्रवाई की जा रही है और पब्लिक अकाऊंट्स कमेटी (पीएसी) भी इनका संज्ञान ले रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि सदन में प्रस्तुत ये दो बड़ी रिपोर्ट्स वास्तव में एक रिपोर्ट कार्ड हैं। यह रिपोर्ट कार्ड न तो विपक्ष ने तैयार किया है, न ही वर्तमान सरकार ने और न ही किसी राजनीतिक दल ने इसे तैयार किया है। यह रिपोर्ट कार्ड देश की सर्वोच्च संवैधानिक ऑडिट संस्था सीएजी द्वारा तैयार किया गया है। इस ऑडिट संस्था ने पिछली सरकार के कामकाज की पूरी तस्वीर सामने रख दी है और एक-एक विषय को विस्तार से बताया है कि किस प्रकार पिछली आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में जनता के पैसे के साथ गड़बड़ियां हुईं और दिल्ली के धन का दुरुपयोग हुआ। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने किसी भी सेक्टर या विभाग को नहीं छोड़ा। हेल्थ के क्षेत्र में उनके कार्यकाल से जुड़े मामले सामने आए, एजुकेशन के क्षेत्र में गड़बड़ियों की बात सामने आई, विज्ञापन और सब्सिडी से जुड़े विषय सामने आए। इसी प्रकार दिल्ली जल बोर्ड, पीडब्ल्यूडी सहित विभिन्न विभागों में भी अनियमितताओं के मामले सामने आए। स्थिति यह थी कि टेंडर से लेकर सब्सिडी देने तक सभी में गड़बड़ी पाई गई। यह घोटालों की सरकार थी और इस दौरान जनता परेशान होती रही, लेकिन उसे कोई राहत नहीं मिली। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सीएजी रिपोर्ट्स से जुड़े एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू का उल्लेख करते हुए कहा कि विधायकों ने रिपोर्ट्स के कई विषयों पर चर्चा की, लेकिन इससे भी बड़ी बात यह है कि पिछली सरकार के पास फंड उपलब्ध था, लेकिन उस फंड का भी पूरा उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने वित्त वर्ष 2024-25 के फाइनेंशियल बजट का उदाहरण देते हुए कहा कि उस वर्ष 80,798 करोड़ रुपये का बजट था, लेकिन वास्तविक खर्च कितना हुआ, यह विचार करने का विषय है। कुल बजट में से मात्र लगभग 61,000 करोड़ रुपये ही खर्च किए गए, यानी सरकार के पास उपलब्ध पूरा फंड भी जनता के हित में खर्च नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि यदि जनता के हित में कैपिटल एक्सपेंडिचर किया जाता तो सड़कें बन सकती थीं, फ्लाईओवर बन सकते थे, स्कूल खुल सकते थे और अन्य आवश्यक विकास कार्य किए जा सकते थे। लेकिन पिछली सरकार का ध्यान इस पर नहीं था।
उनका उद्देश्य यह था कि घोटाला कहां से हो सकता है, पैसे का गबन कैसे किया जा सकता है और बिना काम किए भी बड़ी-बड़ी तस्वीरें लगाकर जनता को कैसे भ्रमित किया जा सकता है। लगभग 81,000 करोड़ रुपये के बजट में से करीब 20,000 करोड़ रुपये की राशि खर्च नहीं की गई, यानी जनता के लिए उपलब्ध धन का बड़ा हिस्सा उपयोग में ही नहीं लाया गया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार से दिल्ली को सब्सिडीज और ग्रांट-इन-एड भी मिलती थीं, लेकिन उनका भी अपेक्षित उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि पिछली सरकार को न तो यमुना की सफाई से कोई मतलब था, न कूड़े के पहाड़ हटाने से, न ही दिल्ली की सड़कों को बेहतर बनाने से। प्रदूषण की समस्या भी बनी रही, लेकिन इन विषयों पर कोई प्रभावी जवाबदेही नहीं दिखाई गई। पिछली सरकार के कार्यकाल में पांच साल का चुनावी कार्यकाल समाप्त होने के बाद जनता से फिर कहा जाता था कि एक और पांच साल का मौका दे दीजिए। वादे लगातार किए गए, लेकिन काम अपेक्षा के अनुरूप नहीं हुआ। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली सरकार की नीयत में ही खोट था। इसका प्रमाण इस बात से मिलता है कि कुल 32 ऐसी योजनाएं थीं, जिनके लिए 1,517 करोड़ रुपये से अधिक का व्यय प्रस्तावित किया गया था। इन योजनाओं को बजट में शामिल किया गया, उनका ऐलान किया गया और उनके नाम पर वाहवाही भी लूटी गई। अखबारों में विज्ञापन और खबरें प्रकाशित हुईं, जनता के सामने यह बताया गया कि सरकार ने कितना कुछ कर दिया है, लेकिन जब वास्तविक परिणाम सामने आने का समय आया तो इन योजनाओं पर एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया। मुख्यमंत्री ने दिल्ली मेट्रो के लोन का उदाहरण देते हुए कहा कि दिल्ली में मेट्रो आज जीवन का अभिन्न हिस्सा है। आज यह कल्पना करना भी मुश्किल है कि दिल्ली बिना मेट्रो के कैसी दिखेगी और कैसे चलेगी। केंद्र सरकार लगातार मेट्रो के निर्माण का काम करती रही, लेकिन दिल्ली सरकार ने अपना हिस्सा समय पर नहीं दिया। बजट में फंड उपलब्ध होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं किया गया। पीएम आयुष्मान भारत योजना के तहत केंद्र सरकार की ओर से 150 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए थे ताकि दिल्ली में आयुष्मान केंद्र खोले जा सकें और दिल्ली की जनता के आयुष्मान कार्ड बनाए जा सकें। लेकिन इस राशि का भी उपयोग नहीं किया गया और पैसा वापस चला गया। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि जब केंद्र सरकार की ओर से दिल्ली की जनता के स्वास्थ्य के लिए पैसा उपलब्ध कराया गया था, तो उसे खर्च क्यों नहीं किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूल ऑफ स्पेशलाइज्ड एक्सीलेंस के लिए 40 करोड़ रुपये की ग्रांट इन ऐड उपलब्ध थी, लेकिन उस पर जीरो एक्सपेंडिचर हुआ। बच्चों के लिए स्कूलों में किताबें उपलब्ध कराना, क्लासरूम तैयार करना और बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं देना पिछली सरकार की प्राथमिकता नहीं थी। उन्होंने नेशनल फूड सिक्योरिटी एक्ट (एनएफएसए) का उल्लेख करते हुए कहा कि राशन कार्ड के माध्यम से दिए जाने वाले राशन के लिए 40 करोड़ रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन उस राशि का भी उपयोग नहीं किया गया और पैसा वापस चला गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी के लिए भी 39 करोड़ रुपये की ग्रांट इन ऐड उपलब्ध थी, लेकिन उसका भी उपयोग नहीं किया गया। उन्होंने सवाल किया कि कॉलेजों को अपडेट करने, कर्मचारियों को वेतन देने और संस्थानों की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने के लिए पैसा खर्च करने की जरूरत क्यों महसूस नहीं की गई। इसके अलावा 34 अन्य योजनाएं ऐसी थीं, जिनके लिए 2,961 करोड़ रुपये की स्वीकृति ले ली गई थी लेकिन आखिरी दिन तक वह फंड खर्च नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यह उस सरकार के कामकाज का उदाहरण है, जो बजट में राशि रखती थी, योजनाओं की घोषणा करती थी और जनता को यह दिखाती थी कि बहुत कुछ किया जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में योजनाओं पर पैसा खर्च नहीं किया जाता था। मुख्यमंत्री ने दिल्ली लक्ष्मी योजना का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस योजना को वर्तमान सरकार ने पांच साल के भीतर लागू करने का संकल्प लिया और आज दिल्ली की महिलाओं को उसका लाभ मिलने की स्थिति आ गई है, उसके लिए पिछली सरकार भी हर साल बजट में फंड रखती थी। लेकिन उस फंड का उपयोग नहीं किया गया। हर साल महिलाओं से वादा किया जाता था कि योजना लागू की जाएगी और उन्हें पैसे दिए जाएंगे, लेकिन चुनाव का समय आते ही फिर नए वादे किए जाते थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि वादा लगातार किया गया, लेकिन उसे जमीन पर उतारने का काम नहीं हुआ। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जनता के पैसे से जुड़े जीएसटी रिफंड के मामले में भी पिछली सरकार का रवैया संतोषजनक नहीं था। उन्होंने आंकड़े देते हुए कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में जीएसटी रिफंड मात्र 695 करोड़ रुपये था। वर्तमान सरकार के आने के बाद वित्त वर्ष 2025-26 में 1,313 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड दिया गया। वित्त वर्ष 2026-27 का अभी आधा वर्ष भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन वर्तमान सरकार अब तक 550 करोड़ रुपये का जीएसटी रिफंड कर चुकी है। वर्तमान सरकार का प्रयास है कि जनता का पैसा समयबद्ध तरीके से जनता तक वापस पहुंचे और लोगों को अपने ही पैसे के लिए इंतजार न करना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा कि लगभग 19,973 करोड़ रुपये की योजनाओं से संबंधित 1,734 यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स लंबित थे, जबकि इनमें से मात्र 482 यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट्स ही सबमिट किए गए। यह स्थिति सरकारी खर्च में पारदर्शिता और जनता के प्रति जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट में यह स्पष्ट करना होता है कि राशि कब, कहां और किस प्रकार खर्च की गई तथा निर्धारित प्रािढया का पालन हुआ या नहीं। इसलिए इनके लंबित रहने से योजनाओं के वास्तविक उपयोग और खर्च की निगरानी प्रभावित होती है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने विपक्ष के नेताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज वे अलग-अलग मुद्दों पर सदन में जोर-जोर से सवाल उठा रहे हैं, लेकिन उन्हें यह भी देखना चाहिए कि जिन विभागों और क्षेत्रों में उनके कार्यकाल के दौरान जिम्मेदारी रही, वहां क्या हुआ और सीएजी रिपोर्ट्स ने क्या तथ्य सामने रखे हैं। पिछली सरकार के कार्यकाल में व्यवस्था में जो ‘दीमक' लगी थी, वर्तमान सरकार उसे खत्म करने के लिए काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने इसे उदाहरण के तौर पर समझाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ने सिस्टम में सुधार के लिए ‘पेस्टिसाइड' का छिड़काव किया है और अब उसी प्रािढया में पिछली सरकार के समय की गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने दस वर्षों में पूरे सिस्टम को नुकसान पहुंचाया और दिल्ली की जनता के साथ अन्याय किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार के कार्यकाल में योजनाओं को लेकर एक ‘ऑरा फ्रेमिंग' की जाती थी। योजना की घोषणा होती थी, बड़े-बड़े दावे किए जाते थे और यह माहौल बनाया जाता था कि बहुत बड़ा काम होने जा रहा है, लेकिन वास्तविकता में योजनाओं का ािढयान्वयन नहीं होता था। उन्होंने कहा कि सीएजी रिपोर्ट्स ने बताया है कि किस प्रकार योजनाओं के नाम पर प्रचार किया जाता था, योजनाओं पर नेताओं की तस्वीरें लगाई जाती थीं और बड़े पैमाने पर विज्ञापन किए जाते थे। यह प्रचार केवल दिल्ली तक सीमित नहीं था, बल्कि देशभर में विज्ञापनों पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बिजली कंपनियों की रेगुलेटरी एसेट से जुड़े मामले का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2014 के बाद बिजली के टैरिफ में वृद्धि नहीं हुई, जिसके कारण बिजली की खरीद और वितरण से होने वाली वास्तविक आय के बीच अंतर बढ़ता गया। यही अंतर धीरे-धीरे रेगुलेटरी एसेट के रूप में जमा होता गया। मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2019-20 में यह रेगुलेटरी एसेट करीब 9,000 करोड़ रुपये थी। इसके बाद यह बढ़कर 27,200 करोड़ रुपये हो गई और वर्तमान में यह अंतर लगभग 38,000 करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह वह बड़ा वित्तीय अंतर है जो बिजली कंपनियों द्वारा बिजली खरीदने की लागत और उपभोक्ताओं को बिजली देने के बाद प्राप्त राजस्व के बीच बना है। आने वाले समय में बिजली कंपनियां इस 38,000 करोड़ रुपये के बोझ को दिल्ली की जनता पर डालने की कोशिश कर सकती हैं, लेकिन वर्तमान दिल्ली सरकार ऐसा नहीं होने देगी। वर्तमान सरकार इस मामले में मजबूती से खड़ी है और कोर्ट में लड़ाई लड़ रही है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने टेंडर प्रािढया में सामने आई अनियमितताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 530 करोड़ रुपये की कुल राशि के 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड से किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी राशि से जुड़े 45 टेंडर एक ही पैन कार्ड के माध्यम से कैसे हो सकते हैं और इस पूरी प्रािढया की निगरानी किस स्तर पर की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ऐसी व्यवस्थाओं को समाप्त करने के लिए लगातार प्रशासनिक सुधार कर रही है और सरकारी खरीद प्रािढया को अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने मात्र डेढ़ वर्ष के कार्यकाल में व्यवस्था में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में दवाइयों की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामलों में सरकार ने रिपोर्ट सामने आने के बाद तत्काल कार्रवाई की। प्रोक्योरमेंट सेल से 40 अधिकारियों का एक ही दिन में ट्रांसफर किया गया तथा तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया गया। उन्होंने कहा कि इन तीनों अधिकारियों के निलंबन के बाद करीब 60 दिन बीत चुके हैं और वे अभी भी जेल में हैं। वर्तमान सरकार की नीति स्पष्ट है कि जहां भी गड़बड़ी सामने आएगी, वहां सरकार स्वयं कार्रवाई करेगी।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 70 ऐसे डॉक्टर, जो वर्षों से जेलों में तैनात थे और अस्पतालों में अपनी ड्यूटी नहीं कर रहे थे, उन्हें अस्पतालों में भेजकर उनकी निर्धारित जिम्मेदारी निभाने के लिए कहा गया। इसी प्रकार, जहां पहले एक-एक मेडिकल सुपरिटेंडेंट (एमएस) के पास चार-चार अस्पतालों की जिम्मेदारी थी, वहां सरकार ने व्यवस्था में बदलाव करते हुए एक अस्पताल के लिए एक एमएस की दिशा में काम किया ताकि अस्पतालों का प्रशासन और संचालन अधिक प्रभावी हो सके। मुख्यमंत्री ने बताया कि जीएसटी विभाग में भी वर्षों से एक ही स्थान पर तैनात 150 अधिकारियों को बदला गया। अधिकारियों की नई पोस्टिंग मनमाने तरीके से नहीं की गई, बल्कि लकी ड्रॉ के माध्यम से रैंडम पोस्टिंग की व्यवस्था की गई, ताकि किसी अधिकारी को अपनी पसंद का वार्ड या स्थान चुनने की सुविधा न हो। उन्होंने कहा कि इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रशासनिक कार्यप्रणाली में निष्पक्षता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार ने सरकारी खरीद में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जेम) को अनिवार्य किया है। विभागों द्वारा जेम पर खरीदारी की लगातार समीक्षा की जा रही है और निर्धारित प्रािढया का पालन नहीं करने वाले विभागों को कारण बताओ नोटिस दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इससे सरकारी खरीद में पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और जवाबदेही को मजबूत किया जा रहा है। साथ ही, दिल्ली सरकार के पूरे प्रशासनिक सिस्टम को ई-ऑफिस में बदला गया है। अब सरकारी फाइलों का कामकाज डिजिटल माध्यम से किया जा रहा है, जिससे निर्णय प्रािढया में पारदर्शिता और रिकॉर्ड की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। उन्होंने बताया कि सरकार ई-कैबिनेट का प्रस्ताव भी ला चुकी है और जल्द ही दिल्ली कैबिनेट की कार्यप्रणाली भी ई-कैबिनेट के माध्यम से संचालित की जाएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने राशन की दुकानों पर ई-पीओएस मशीनें भी लगाई हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि पिछली व्यवस्था में टेंडर्स के साथ आर्बिट्रेशन क्लॉज का इस्तेमाल कई मामलों में सरकारी धन की बड़ी लीकेज का माध्यम बन गया था। उन्होंने बताया कि कई बार कॉन्ट्रैक्टर को काम शुरू कर दिया जाता था, लेकिन जमीन का अधिग्रहण, पेड़ों की कटिंग की अनुमति या अन्य जरूरी परमिशंस पूरी नहीं हुई होती थीं। इसके चलते काम अटक जाता था और कॉन्ट्रैक्टर आर्बिट्रेशन में चला जाता था। वर्तमान सरकार ने आर्बिट्रेशन क्लॉज को बंद करने का निर्णय लिया है, ताकि ऐसी वित्तीय लीकेज और अनियमितताओं को रोका जा सके तथा दिल्ली के सरकारी धन की सुरक्षा सुनिश्चित हो। मुख्यमंत्री ने विधानसभा अध्यक्ष से आग्रह किया कि सदन के पटल पर रखी गई सीएजी रिपोर्ट्स और उन पर सदस्यों द्वारा व्यक्त किए गए विचारों का संज्ञान लेकर आगे की कार्रवाई को गति दी जाए, ताकि दिल्ली की जनता के साथ अन्याय करने और सरकारी धन के दुरुपयोग के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई हो सके। उन्होंने कहा कि वर्तमान दिल्ली सरकार पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन के सिद्धांत पर काम कर रही है और सरकारी व्यवस्था में ऐसी कोई गुंजाइश नहीं छोड़ी जाएगी, जहां जनता के पैसे या अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता हो।