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ईरान का भविष्य

प्रकाशित: 02-03-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
ईरान का भविष्य
नोबेल पीस प्राइज के दावेदार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उसके परंपरागत एवं चिरपरिचित शत्रु इजरायल के साथ मिलकर ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई सहित प्रथम एवं द्वितीय पंक्ति के नेतृत्व का सफाया कर दिया और लगभग 40 सैन्य कमांडरों को मार डाला। राजनीतिक नेतृत्व विहीन और सैन्य मार्गदर्शक नेतृत्व के अभाव में अब ईरान अपने पड़ोसी मध्यपूर्व के देशों पर हमले कर रहा है। वह इजरायल के तेल अवीव पर भी लगातार हमले कर रहा है। ईरान में घुसे सीआईए और मोसाद ने पहले ही जमीनी तैयारी इस तरह कर ली थी कि शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व और सैन्य कमांडरों के हर मूवमेंट की जानकारी उन्हें हासिल हो जाती थी और उसी के अनुसार वे अपनी रणनीति के मुताबिक ईरानी राजनीतिक एवं सेना अधिकारियों को निशाना बनाते रहे।
यह सच है कि राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू जिन तीन लक्ष्यों यानि परमाणु हथियार एवं सामग्री और बैलिस्टिक मिसाइल सिस्टम को नष्ट करना तथा नेतृत्व परिवर्तन करने के लिए तेहरान पर हमले किए उन्हें प्राप्त करने में अब कोई संदेह नहीं लग रहा है। ईरान पर इस बार अमेरिका और इजरायल ने पूरी तैयारी से हमला किया है। शीर्ष राजनीतिक एवं सैन्य नेतृत्व का सफाया हो जाने के कारण सेना के स्थानीय अधिकारी खुद ही फैसले ले रहे हैं और यह मानकर चल रहे हैं कि अब उनके पास जब कुछ खोने को है ही नहीं तो क्यों न उन पड़ोसी मुल्कों को सबक सिखाए जो किसी न किसी रूप में अमेरिका के हितों के लिए साधन बने हुए हैं।
यह सच है कि ईरान में तमाम राजनेता भी हैं जो असंतुष्ट हैं और अपने बयानों के कारण वे जेल में बंद हैं। यदि अमेरिका उन राजनीतिक कैदियों को छुड़ा देता है तब तो यह माना जा सकता है कि अमेरिका और इजरायल जल्दी से जल्दी कोई वैकल्पिक सरकार बनाना चाहते हैं। ईरान के पूर्व शासक रजा पहलवी के अलावा भी अमेरिका और इजरायल के पास विकल्प होंगे, यही कारण है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने आम जनता को सलाह दी कि वे सामने आकर अपनी सरकार बना लें।
इतना तो निर्विवाद है कि अमेरिका ने हमले करके किसी भी देश पुनर्निमाण की जरूरत नहीं समझा है। इसलिए आज जिस तरह से ईरान में विध्वंस का बारूदी खेल चल रहा है, उसने इस देश को सैकड़ों साल पीछे धकेल दिया है। सीआईए और मोसाद ने न सिर्फ ईरानी इंटेलीजेंस ब्यूरो कार्य प्रािढया को प्रभावित कर दिया है, वहीं बहुत सारे ईरानी इंटेलीजेंस के प्रतिनिधियों को खरीद लिया है। ईरानी इंटेलीजेंस ब्यूरो के एजेंटों ने ही शीर्ष नेताओं और सैन्य कमांडरों की सूचना अमेरिका और इजरायल के खुफिया प्रतिष्ठानों को दी है। बहरहाल ईरान में यदि कोई राजनीतिक सत्ता होती तो उसमें इतनी बौखलाहट न होती कि वह अपने सारे पड़ोसियों को अपने हमलों की वजह से अपना दुश्मन बनाता।
लब्बोलुआब यह है कि अमेरिका और इजरायल अब ईरान में उसके परमाणु संयंत्रों एवं सामग्री को समेटने की तैयारी में हैं साथ ही ईरान के बैलेस्टिक मिसाइल सिस्टम को तबाह करने की तरफ भी बढ़ चुके हैं। अब यदि अमेरिका ने एक बार फिर इराक, लीबिया और सीरिया की तरह ही ईरान को भी बर्बाद करके छोड़ना है और उसके पुनर्निर्माण की कोई नीति या कार्य योजना नहीं है तो ईरान के बौखलाए सैनिक इजरायल और अपने पड़ोसियों पर छिटपुट हमले करते रहेंगे और मध्यपूर्व में तनाव की आग धधकती रहेगी साथ ही पश्चिम एशिया में भी अशांति रहेगी, जिससे सारे मुस्लिम देश प्रभावित होंगे और आए दिन अराजकता के शिकार ईरान में गृहयुद्ध की स्थिति देखने को मिल सकती है।
कुछ रक्षा विशेषज्ञ मान रहे हैं कि ईरान की मदद रूस और चीन करेंगे ताकि यह युद्ध काफी दिन चल सके। किन्तु लगता नहीं कि रूस और चीन इस युद्ध में कूदेंगे। रूस तो बिल्कुल सोच ही नहीं सकता क्योंकि ईरान की मदद करके न तो वह अपने देश के यहूदियों को नाराज करेगा और न ही सऊदी अरब, यूएई और ओमान जैसे मित्र देशों को। चीन भी इस युद्ध से अपनी दूरी बनाकर रखने में ही भलाई समझेगा। इसलिए तीसरे विश्व युद्ध की संभावना कम ही है। इसलिए जरूरी है कि अपने मिशन को पूरा करने के बाद अमेरिका ईरान में एक स्थाई सरकार बनाने की दिशा में काम करे ताकि देश में स्थाई शांति बहाल हो सके। फिलहाल ईरान का भविष्य अब इरानियों के ही हाथ में होना चाहिए न कि किसी सुप्रीम लीडर सिस्टम की वापसी होनी चाहिए।