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ईरान पर हमले की कीमत?

प्रकाशित: 10-03-2026 | लेखक: अनिल नरेंद्र
ईरान पर हमले की कीमत?
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ तो नेतन्याहू के उकसावे पर युद्ध तो शुरू कर दिया पर उन्हें यह अंदाजा नहीं था कि यह लड़ाई लम्बी और महंगी पड़ सकती है। जो संघर्ष चार दिन में खत्म होने की भविष्यवाणी की जा रही थी वह आज दसवें दिन भी खत्म होना तो दूर की बात वह बढ़ती जा रही है। अमेरिका को सैनिकों की मौत और आर्थिक मार मार झेलनी पड़ रही है जिसका उसने कभी अनुमान भी नहीं लगाया होगा। डोनाल्ड ट्रंप ने अब संकेत दिया है कि ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की यह लड़ाई 4-5 हफ्ते तक चल सकती है। वाशिंगटन स्थित थिंक टैंक सीएसआईएस और ािढस पार्क द्वारा किए गए विश्लेषण के अनुसार ईरान के खिलाफ ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत जंग के पहले 100 घंटों में अमेरिका को लगभग 3.7 अरब डॉलर (करीब 31,000 करोड़ रुपए) खर्च उठाना प़ड़ा है। रिपोर्ट के अनुसार युद्ध के शुरूआती 100 घंटों में अमेरिका का औसत खर्च लगभग 891 मिलियन डॉलर प्रतिदिन यानि करीब 90 करोड़ डॉलर रोज रहा है। शुरुआती चरण में सबसे अधिक खर्च महंगी मिसाइलों, हथियारों और बमों के इस्तेमाल पर हुआ है, इसलिए शुरुआती दिनों में लागत सबसे अधिक है। थिंक टैंक की रिपोर्ट में कहा गया है कि 1.7 अरब डॉलर पैट्रियट जैसे एयर डिफेंस इंटरसेप्टर सिस्टम पर खर्च किए गए हैं जबकि 1.5 अरब डॉलर मिसाइलों और अन्य आाढामक हथियारों पर किए गए हैं। इसके अलावा 125 मिलियन डॉलर लड़ाकू विमानों और हवाई अभियानों के परिचालन पर खर्च किए गए हैं। सीएसआईएस के मुताबिक खर्च में से केवल लगभग 200 बिलियन डॉलर ही पहले से अमेरिकी रक्षा बजट में शामिल था जबकि करीब 3.5 अरब डालर का खर्च अतिरिक्त है, जिसके लिए अलग से फंड की जरूरत पड़ सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिकी रक्षा मंत्रालय को जल्द ही युद्ध जारी रखने के लिए अतिरिक्त बजट की मांग करनी पड़ सकती है। इसके अलावा कतर, जार्डन, यूएई में जो एयर डिफेंस के रडार व अन्य यंत्र जो तबाह हुए हैं जिनकी कीमत अरबों डॉलर रही है का तो हिसाब ही नहीं है। रिपोर्ट का अनुमान है कि युद्ध के पहले 100 घंटों में अमेरिका के 2000 से अधिक प्रकार के हथियार और मिसाइलों का इस्तेमाल किया है। इन हथियारों के स्टाक को दो बार भरने में लगभग 3.1 अरब डॉलर खर्च हो सकते हैं। थिंक टैंक ने अपने आंकलन में कहा है कि युद्ध का मानवीय नुकसान भी तेजी से बढ़ रहा है। ईरान में ही लगभग 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें 180 छोटी बच्चियां भी शामिल हैं जिनके स्कूल पर अमेरिका ने बहरीन से बम मारा। अमेरिका के कितने सैनिक मरे हैं यह संख्या भी बहुत हो सकती है। अमेरिका ने फिलहाल 6-7 सैनिकों के मरने की पुष्टि की है। पर ईरानी दावा कर रहे हैं कि यह संख्या सैंकड़ों में है। खर्च के अलावा, कुवैत में फ्रेंडली फायर की घटना में तीन अमेरिकी एफ-15 लड़ाकू विमान गिर गए। बता दें कि एक एफ-15 अत्याधुनिक फाइटर जेट की कीमत लगभग 800 करोड़ रुपए है। ईरान पर हमला करते वक्त अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप ने शायद यह सोचा भी नहीं होगा कि यह जंग उसे कितनी महंगी पड़ेगी। लड़ाई लंबी खिंचने और ईरानी जवाबी कार्रवाई ने ट्रंप की नींद उड़ा रखी है। आए दिन वह धमकियों पर उतर आए हैं। ट्रंप फंस तो गए हैं पर बाहर कैसे निकलें ये उन्हें समझ नहीं आ रहा है। खर्च के अलावा अंदरूनी राजनीतिक दबाव, एपस्टीन फाइल, सहयोगी अरब मुल्कों का दबाव यह सब अमेरिका और ट्रंप पर भारी पड़ रहा है। हताश होकर ट्रंप कोई ऐसा कदम न उठा लें जिससे पूरी दुनिया सकते में आ जाए?
-अनिल नरेन्द्र