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संसद में गूंजेगी खाड़ी की जंग! जयशंकर आज बताएंगे मिडिल ईस्ट संकट पर भारत का प्लान

प्रकाशित: 09-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
संसद में गूंजेगी खाड़ी की जंग! जयशंकर आज बताएंगे मिडिल ईस्ट संकट पर भारत का प्लान
मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच बढ़ते युद्ध के तनाव की गूंज आज भारतीय संसद में सुनाई देगी. विदेश मंत्री एस जयशंकर आज राज्यसभा और लोकसभा में भारत का आधिकारिक रुख स्पष्ट करेंगे. वे सुबह 11 बजे राज्यसभा और दोपहर 12 बजे लोकसभा में बयान देंगे. भारत ने हमेशा से बातचीत के जरिए समाधान निकालने और देशों की अखंडता का सम्मान करने की बात कही है. इस संकट के बीच भारत ने मानवीय आधार पर ईरानी जंगी जहाज ‘आईरिस लवन’ को कोच्चि पोर्ट पर रुकने की अनुमति भी दी है. सरकार का यह सतर्क रुख खाड़ी क्षेत्र में फंसे लाखों भारतीयों की सुरक्षा और देश की तेल जरूरतों से जुड़ा हुआ है.
विपक्ष का हमला और कांग्रेस की रणनीति
वेस्ट एशिया संकट को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाए हैं और संसद में इसे जोर-शोर से उठाने की तैयारी की है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, सोनिया गांधी और राहुल गांधी ने इसके लिए विशेष बैठक की है. कांग्रेस सांसद नसीर हुसैन के मुताबिक पार्टी इस युद्ध का भारत की ऊर्जा जरूरतों और अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले असर पर जवाब मांगेगी. विपक्ष का मानना है कि इस तनाव से देश में महंगाई और तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं. सरकार ने अपने मंत्रियों को इस संवेदनशील मुद्दे पर बेहद संभलकर और संयम के साथ बोलने की सलाह दी है ताकि अंतरराष्ट्रीय रिश्तों पर बुरा असर न पड़े.
डोनाल्ड ट्रंप और पीएम मोदी पर विवादित बोल
मिडिल ईस्ट संकट और रूस से तेल सप्लाई पर अमेरिकी दबाव को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है. कर्नाटक में एक सभा के दौरान खड़गे ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ‘तानाशाह’ करार दिया. उन्होंने विवादित बयान देते हुए कहा कि पीएम मोदी उनके गुलाम की तरह काम कर रहे हैं. खड़गे ने आरोप लगाया कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति खो रहा है और अमेरिकी दबाव में फैसले ले रहा है. इस बयान के बाद संसद में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच भारी हंगामे के आसार बढ़ गए हैं क्योंकि भाजपा इसे देश के अपमान से जोड़कर देख रही है.
संसद में उठेंगे कई अन्य राष्ट्रीय मुद्दे
कांग्रेस ने संकेत दिए हैं कि वे केवल अंतरराष्ट्रीय मुद्दे ही नही बल्कि देश के आंतरिक मामलों पर भी सरकार को घेरेंगे. संसद में जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने, बेरोजगारी और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपए की कीमत पर चर्चा की मांग की जाएगी. इसके अलावा इंडो-यूएस ट्रेड डील का किसानों पर असर और ग्रेट निकोबार द्वीप से जुड़े पर्यावरण के मुद्दों पर भी जवाब मांगा जाएगा. विपक्ष ने यह भी साफ कर दिया है कि वे संसद की कार्यवाही के दौरान स्पीकर के खिलाफ भी कड़ा रुख अपना सकते हैं. कुल मिलाकर आज संसद का सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है जिसमें अंतरराष्ट्रीय जंग और घरेलू राजनीति का टकराव दिखेगा.