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पाक सेना की हकीकत

प्रकाशित: 16-02-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
पाक सेना की हकीकत
पाकिस्तान की आर्मी इतनी बहादुर है कि जब बीएलए यानि बलोच लिबरेशन आर्मी चाहती है, उन्हें ठोंकती है और नाक रगड़वा कर छोड़ती है। तालिबान सरकार को जब गुस्सा आता है तो वह अपने लड़ाकों को भेजकर पीटती है और दर्जनों जब मारे जाते हैं तो पाकिस्तान का फील्ड मार्शल मुल्ला आसिम मुनीर अरब देशों से गुहार लगाता है कि हमें बख्श दो अब गलती नहीं होगी, लेकिन झूठे नैरिटिव गढ़ने के ये इतने चतुर शिल्पी हैं कि भारत के साथ जितनी लड़ाईयां हुईं, उन सभी में जीत का दावा करते हैं और बाजार से खरीद कर सैन्य अधिकारी तमगे लगा लेते हैं। पोल पट्टी खुलने के डर से इस झूठ को फर्जी रूप से सही बनाने के लिए स्थाई भाव की जो साजिश रची गई है, उसी के तहत 1965, 1971 और कारगिल-द्रास बटालिक युद्ध को जीतने का दावा अपने बच्चों की पुस्तकों में पढ़ाया जाता है और यदि कोई पत्रकार हिम्मत करके सवाल पूछ लेता है तो उसे सैन्य प्रतिष्ठान न सिर्फ धमकाता है बल्कि उसको तरह-तरह से प्रताड़ित किया जाता है।
अब इनकी सेना की वास्तविकता यह है कि इनके 17 सैनिकों को बीएलए ने हिरासत में ले लिया और 10 सैनिकों को मुक्त करके सैन्य प्रतिष्ठान को चेतावनी दी है कि यदि 7 और सैनिकों को छुड़ाना है तो उनके कैदियों को एक सप्ताह के अन्दर रिहा करो।
सच तो यह है पाकिस्तान का जैसा चरित्र है, वैसी ही उसकी फौज भी है। वह कुरान की कसम खाकर जान तो बीएलए से कई बार बचा चुकी है किन्तु अब बीएलए उनके झांसे में नहीं आती इसलिए अब सेना और बीएलए में जो भी सौदेबाजी होती है, वह ‘एक हाथ से दे और दूसरे हाथ से ले' के सिद्धांत पर होती है। गत वर्ष जब पाक ट्रेन को ही ब्लूचिस्तान में बीएलए ने अपहरण किया था तब भी सेना अपने बल पर अपने साथियों को छुड़ा नहीं पाई थी। आए दिन पाक सेना खासकर पंजाब प्रांत के जवानों को बीएलए के लोग पीटते हैं। हैरानी की बात तो यह है कि पाक सेना अपने पड़ोसियों से पिटती है तो बाप-बाप चिल्लाती है और ‘सीज फायर' के लिए गिड़गिड़ाने लगती है लेकिन शेखी ऐसी बघारते हैं कि वह युद्ध तो किसी देश से हारते ही नहीं, अपने देश की जनता को पाकिस्तान की सेना यह बताती है कि ब्लूचिस्तान में जो भी गड़बड़ चल रही है, उसके लिए भारत जिम्मेदार हैं। वह वास्तविकता को महसूस करने के लिए तैयार ही नहीं है। कल्पना करें, यदि भारत ब्लूचिस्तान में अलगाववादी गतिविधियां कराता तो क्या अभी तक पाकिस्तान का विखंडन न हो गया होता! वास्तविकता यह है कि बीएलए ईरान से अवैध तेल हासिल कर उनसे धन कमाते हैं और पाकिस्तान की सेना को तबाह करते हैं। यही नहीं बीएलए चीन से भी उगाही करके उन्हें ब्लूचिस्तान में काम करने की अनुमति देता है। उसको मोटी कमाई हो रही है। इसलिए जब जनरल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने अमेरिका को कच्चे तेल और अपना रेयर अर्थ मिनरल निकालने का आग्रह किया तब बलोच मुक्ति आंदोलन के नेताओं ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को पत्र लिखकर आग्रह किया कि वह जनरल मुनीर और प्रधानमंत्री शरीफ पर भरोसा न करें क्योंकि आप बीएलए से लड़कर कुछ भी हासिल नहीं कर पाएंगे। पाक सेना बीएलए से आप के लोगों को सुरक्षा भी नहीं दे पाएगी। इसलिए यदि खनिज उत्खनन में आप कुछ करना चाहते हैं तो बीएलए से समझौता कर ले। इस पत्र के बाद ही ट्रंप का माथा ठनका था। यही कारण है आजकल ट्रंप पाकिस्तान को उस तरह चने की झाड़ पर नहीं चढ़ाता जैसा कि उन्होंने 2025 में अपने पूरे परिवार को पाकिस्तान में खनिज हासिल करने की उम्मीद से काम पर सािढय कर दिया था।
बहरहाल पाकिस्तान की आर्मी इतनी जाहिल हो चुकी है कि वह कभी भारत से पिटती है तो पीठ झाड़ कर दावा करती है कि उसने तो मैदान मार लिया, बीएलए सैनिकों को ही मारती है इसलिए पंजाब सहित सारे क्षेत्रों के सैनिक बीएलए से पिटने के बाद भी खुलकर यह मानने को तैयार नहीं है कि ब्लूचिस्तान में अलगाववाद की आंधी यू ही नहीं आई है, इसका मुख्य कारण है बलूचों की समस्याओं को सुने बिना ही उन्हें आतंकी घोषित कर दिया गया। ब्लूचों की समस्या है कि उनके मासूम बच्चों और पुरुषों को पाक सेना मारती है और गायब कर देती है। इसलिए पाक सैनिकों पर बीएलए रहम नहीं करती और उन्हें हमेशा इस बात का एहसास कराती है कि जिस तरह बांग्लादेश को पाकिस्तान से अलग करने में धंधेबाज सेना ने ाtढर भूमिका निभाई थी, ठीक वैसे ही ब्लूचिस्तान के जन-जन में अलगाववाद की भावना प्रबल करने के लिए माहौल बना रही है पाक सेना।