अंतर्राष्ट्रीय सूरजकुंड मेले में एक स्टॉल ऐसी जहां लकड़ी पर होती है गजब की नक्काशी, मूर्तियां देख रह जाएंगे निहारते
प्रकाशित: 05-02-2026 | लेखक: पवन आश्री
चंडीगढ़, (पवन आश्री)। हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी के मार्गदर्शन व हरियाणा पर्यटन मंत्री डा. अरविंद शर्मा की देख-रेख में हरियाणा के जिला फरीदाबाद के सूरजकुंड में लोकल फॉर ग्लोबल-आत्मनिर्भर भारत की पहचान थीम के साथ आयोजित किया जा रहा 39वां सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला हरियाणा प्रदेश ही नहीं अपितु देश के अन्य राज्यों के हस्तशिल्पियों को भी अपनी हस्तकला का प्रदर्शन करने के लिए बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है। सूरजकुंड अंतर्राष्ट्रीय शिल्प मेला में आए ऐसे ही एक हस्तशिल्पी हैं तिरुपति बालाजी से आए फूला चंदू मेला में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोक व आत्मनिर्भर भारत विजन को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रहे हैं। फूला चंदू को लकड़ी पर नक्काशी करने में महारथ हासिल है, जिसके माध्यम से वे लकड़ी पर गजब की नक्काशी करते हैं और लकड़ी को भगवान की मूर्तियों का रूप देते हैं। फूला चंदू द्वारा लगाई गई स्टॉल दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित करने के साथ-साथ लोगों की आस्था का केंद्र बनी हुई है।
मेले में हस्तनिर्मित जूट उत्पादों की स्टाल बनी आकर्षण का केंद्र मेले में लगी एक विशेष स्टाल पर्यटकों के बीच खासा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहां जूट बैग, बास्केट, स्टूल सहित 200 से अधिक हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं और पर्यटकों के लिए पी हेतु उपलब्ध हैं। विशाल सिंह और सम्राट सिंह ने बताया कि यह स्टाल पूरी तरह से हाथ से बने स्वदेशी उत्पादों को समर्पित है, जो न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत और कला को भी दर्शा रही है। स्टाल पर उपलब्ध जूट बैग्स, सजावटी बास्केट, बैठने के लिए स्टूल, होम डेकोर आइटम्स और दैनिक उपयोग की वस्तुएं लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। खास बात यह है कि सभी उत्पादों में पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ आधुनिक जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है।
सूरजकुंड मेले में स्वच्छता और साफ-सफाई पर दिया जा रहा है विशेष जोर सूरजकुंड मेले के हर प्रवेश द्वार, मुख्य मार्गों और स्टालों के आसपास नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जा रही है। मेला परिसर को साफ, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल बनाए रखने के लिए उपायुक्त आयुष सिन्हा के निर्देशानुसार जिला प्रशासन और हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए सफाई कर्मचारियों की विशेष टीम तैनात की गई है, जो पूरे दिन परिसर की निगरानी कर रही है। जगह-जगह डस्टबिन और कचरा संग्रहण केंद्र लगाए गए हैं, ताकि आगंतुक कचरा इधर-उधर न फैलाएं और मेले में स्वच्छता बनी रहे। मेले अथॉरिटी द्वारा कारीगरों और दुकानदारों को पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया है। साथ ही, लोगों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत जागरूक करने के लिए पोस्टर और संदेश भी लगाए गए हैं।
मेले में गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन पा बने पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र सूरजकुंड मेले में श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन पा प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके साथ पर्यटक जमकर सेल्फी ले रहे हैं। पंचजन्य शंख भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ पवित्र प्रतीक माना जाता है, जबकि सुदर्शन पा भगवान श्री हरि विष्णु से जुड़ा हुआ है। सूरजकुंड मेला में इन दोनों प्रतीकों को कलाकृतियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शंख और पा की पारंपरिक कलाकृति कारीगरों की अद्भुत कला को दर्शाती है। सूरजकुंड मेला में इन आकृतियों में गीता के उपदेशों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने का प्रयास किया गया है, जिससे यह न केवल सजावटी वस्तु बनती है, बल्कि आध्यात्मिक संदेश भी देती है। सूरजकुंड मेला हमेशा से कला, संस्कृति और परंपरा का संगम रहा है। गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन पा की कलाकृतियां सूरजकुंड मेले को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान कर रही है और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त रूप से सामने ला रही है।
एलिफेंटा की प्रसिद्ध त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को चार चांद लगा रही
ाढाफ्ट फेस्टिवल में मुंबई महानगर की प्रसिद्ध एलिफेंटा गुफा की त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को चार चांद लगा रही है और हर आने-जाने वाले को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इस त्रिमूर्ति पर दूर से ही पर्यटकां की नजर पड़ जाती है और इस मूर्ति की नायाब खूबसूरती पर आकर ठहर जाती है। एलिफेंटा की गुफाएं कलात्मक कलाकृतियों की श्रृंखला है जो कि एलिफेंटा आईलैंड में स्थित है।
मुंबई के गेटवे आफ इंडिया से लगभग 12 किमी की दूरी पर अरब सागर में स्थित टापू है। जहां भगवान शिव के कई रूपों को उकेरा गया है। यहां भगवान शंकर की बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं। यहां का शिल्प दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित है। इस त्रिमूर्ति की सुंदरता देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।
मेले में हस्तनिर्मित जूट उत्पादों की स्टाल बनी आकर्षण का केंद्र मेले में लगी एक विशेष स्टाल पर्यटकों के बीच खासा आकर्षण का केंद्र बनी हुई है, जहां जूट बैग, बास्केट, स्टूल सहित 200 से अधिक हस्तनिर्मित उत्पाद प्रदर्शित किए गए हैं और पर्यटकों के लिए पी हेतु उपलब्ध हैं। विशाल सिंह और सम्राट सिंह ने बताया कि यह स्टाल पूरी तरह से हाथ से बने स्वदेशी उत्पादों को समर्पित है, जो न सिर्फ पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि स्थानीय कारीगरों की मेहनत और कला को भी दर्शा रही है। स्टाल पर उपलब्ध जूट बैग्स, सजावटी बास्केट, बैठने के लिए स्टूल, होम डेकोर आइटम्स और दैनिक उपयोग की वस्तुएं लोगों को खूब पसंद आ रही हैं। खास बात यह है कि सभी उत्पादों में पारंपरिक डिजाइन के साथ-साथ आधुनिक जरूरतों का भी ध्यान रखा गया है।
सूरजकुंड मेले में स्वच्छता और साफ-सफाई पर दिया जा रहा है विशेष जोर सूरजकुंड मेले के हर प्रवेश द्वार, मुख्य मार्गों और स्टालों के आसपास नियमित रूप से साफ-सफाई कराई जा रही है। मेला परिसर को साफ, सुव्यवस्थित और पर्यावरण-अनुकूल बनाए रखने के लिए उपायुक्त आयुष सिन्हा के निर्देशानुसार जिला प्रशासन और हरियाणा पर्यटन विभाग द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। इसके लिए सफाई कर्मचारियों की विशेष टीम तैनात की गई है, जो पूरे दिन परिसर की निगरानी कर रही है। जगह-जगह डस्टबिन और कचरा संग्रहण केंद्र लगाए गए हैं, ताकि आगंतुक कचरा इधर-उधर न फैलाएं और मेले में स्वच्छता बनी रहे। मेले अथॉरिटी द्वारा कारीगरों और दुकानदारों को पर्यावरण-अनुकूल सामग्री के इस्तेमाल के लिए प्रेरित किया गया है। साथ ही, लोगों को स्वच्छ भारत मिशन के तहत जागरूक करने के लिए पोस्टर और संदेश भी लगाए गए हैं।
मेले में गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन पा बने पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र सूरजकुंड मेले में श्रीमद्भगवद्गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन पा प्रदर्शित किए गए हैं, जिनके साथ पर्यटक जमकर सेल्फी ले रहे हैं। पंचजन्य शंख भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ा हुआ पवित्र प्रतीक माना जाता है, जबकि सुदर्शन पा भगवान श्री हरि विष्णु से जुड़ा हुआ है। सूरजकुंड मेला में इन दोनों प्रतीकों को कलाकृतियों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। शंख और पा की पारंपरिक कलाकृति कारीगरों की अद्भुत कला को दर्शाती है। सूरजकुंड मेला में इन आकृतियों में गीता के उपदेशों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाने का प्रयास किया गया है, जिससे यह न केवल सजावटी वस्तु बनती है, बल्कि आध्यात्मिक संदेश भी देती है। सूरजकुंड मेला हमेशा से कला, संस्कृति और परंपरा का संगम रहा है। गीता पर आधारित पंचजन्य शंख और सुदर्शन पा की कलाकृतियां सूरजकुंड मेले को आध्यात्मिक गरिमा प्रदान कर रही है और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त रूप से सामने ला रही है।
एलिफेंटा की प्रसिद्ध त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को चार चांद लगा रही
ाढाफ्ट फेस्टिवल में मुंबई महानगर की प्रसिद्ध एलिफेंटा गुफा की त्रिमूर्ति सूरजकुंड मेला की खूबसूरती को चार चांद लगा रही है और हर आने-जाने वाले को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं। इस त्रिमूर्ति पर दूर से ही पर्यटकां की नजर पड़ जाती है और इस मूर्ति की नायाब खूबसूरती पर आकर ठहर जाती है। एलिफेंटा की गुफाएं कलात्मक कलाकृतियों की श्रृंखला है जो कि एलिफेंटा आईलैंड में स्थित है।
मुंबई के गेटवे आफ इंडिया से लगभग 12 किमी की दूरी पर अरब सागर में स्थित टापू है। जहां भगवान शिव के कई रूपों को उकेरा गया है। यहां भगवान शंकर की बड़ी-बड़ी मूर्तियां हैं। यहां का शिल्प दक्षिण भारतीय मूर्तिकला से प्रेरित है। इस त्रिमूर्ति की सुंदरता देखकर हर कोई मंत्रमुग्ध हो जाता है।