अवैध तरीके से विदेश जाना वस्तुत धोखाधड़ी
प्रकाशित: 15-02-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
विदेश जाकर कम समय में अधिक धन कमाने का सपना आज लाखों युवाओं की आकांक्षा बन चुका है। बेहतर जीवन, उच्च वेतन, आधुनिक सुविधाएं और परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने की चाह उन्हें सीमाओं के पार जाने के लिए प्रेरित करती है। लेकिन जब यही सपना गलत रास्तों से पूरा करने की कोशिश की जाती है, तब वह सपना नहीं बल्कि संकट बन जाता है। केंद्र सरकार के अधीन इमीग्रेशन विभाग की हालिया रिपोर्ट ने इस चिंताजनक प्रवृत्ति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। रिपोर्ट के अनुसार पिछले पाँच वर्षों में विदेशों से डिपोर्ट होकर भारत लौटने वाले भारतीयों की संख्या लगभग नौ गुना तक बढ़ गई है। यह आंकड़ा केवल संख्या नहीं, बल्कि व्यवस्था, जागरूकता और नैतिकता तीनों पर एक गहरी चोट है। रिपोर्ट बताती है कि वर्ष 2019 में जहां लगभग 2,300 भारतीय विभिन्न देशों से डिपोर्ट होकर लौटे थे, वहीं 2024 के अंत तक यह संख्या बढ़कर लगभग 20,000 के आसपास पहुँच गई। यह वृद्धि दर्शाती है कि अवैध तरीके से विदेश जाने की प्रवृत्ति किस तेजी से बढ़ी है। इनमें सबसे अधिक मामले संयुक्त अरब अमीरात और दुबई से सामने आए हैं। यूएई और दुबई जैसे देशों में रोजगार के अवसरों का आकर्षण तो है, परंतु सख्त कानूनों के कारण वहां अवैध रूप से प्रवेश करने या वीज़ा शर्तों का उल्लंघन करने वालों को तुरंत हिरासत में लेकर वापस भेज दिया जाता है। डंकी रूट, फर्जी वीज़ा, नकली दस्तावेज और अवैध ट्रैवल एजेंटों के माध्यम से पहुंचे अनेक भारतीयों को वहीं से सबसे अधिक डिपोर्ट किया गया। यूएई के बाद दूसरे स्थान पर अमेरिका का नाम आता है। कुछ महीनों पहले जब अमेरिका से भारतीयों को बेड़ियों में जकड़कर वापस भेजे जाने की तस्वीरें सामने आईं, तो पूरे देश में शर्म और चिंता की लहर दौड़ गई।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।