चाइनीज मांझे पर कड़े कठोर कदम उठाने होंगे
प्रकाशित: 17-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
बरेली में जहरीले मांझे की चपेट में आकर बरेली की एक मंत्री के परिवार से एक युवा के गंभीर रूप से घायल होने की घटना ने एक बार फिर पूरे देश का ध्यान इस गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया है। यह घटना केवल एक व्यक्ति के घायल होने का मामला नहीं है, बल्कि उस व्यापक खतरे का प्रतीक है जो वर्षों से देश के लाखों नागरिकों, विशेषकर युवाओं, बच्चों और पक्षियों के जीवन पर मंडरा रहा है। पतंगबाजी भारतीय संस्कृति का एक लोकप्रिय हिस्सा रही है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में पारंपरिक सूती धागे की जगह नायलॉन, प्लास्टिक तथा कांच और धातु के चूर्ण से लेपित तथाकथित चाइनीज या जहरीले मांझे ने ले ली है। यह मांझा अत्यंत धारदार और मजबूत होता है, जिसके कारण यह केवल पतंग काटने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इंसानों और पक्षियों के लिए जानलेवा साबित होता है। सभी राज्य सरकार को इस संदर्भ में कड़े कठोर कदम उठाने होंगे और जागरूकता अभियान चलाना होगा। देश के विभिन्न राज्यों से हर वर्ष हजारों ऐसी घटनाएं सामने आती हैं जिनमें दोपहिया वाहन चालकों का गला कट जाता है, हाथ-पैर गंभीर रूप से घायल हो जाते हैं या दुर्घटनाग्रस्त होकर उनकी मृत्यु तक हो जाती है। सड़क पर चल रहे मोटरसाइकिल और स्कूटर सवार इस खतरे के सबसे बड़े शिकार बनते हैं क्योंकि तेज गति से चलते समय अचानक सामने आने वाला मांझा उनके गले या चेहरे से टकरा जाता है। कई मामलों में कुछ ही सेकंड में गहरी चोट लग जाती है और पीड़ित को तत्काल अस्पताल ले जाना पड़ता है।इस समस्या का दूसरा और अत्यंत संवेदनशील पक्ष पक्षियों से जुड़ा हुआ है। वन्यजीव संगठनों और पशु चिकित्सकों के अनुसार हर वर्ष बड़ी संख्या में कबूतर, चील, तोते, गौरैया तथा अन्य पक्षी मांझे में उलझकर घायल हो जाते हैं या उनकी मृत्यु हो जाती है। उड़ान के दौरान मांझा उनके पंखों, गर्दन और पैरों को काट देता है, जिससे वे गंभीर रूप से घायल होकर गिर जाते हैं। अनेक पक्षी उपचार के अभाव में दम तोड़ देते हैं। पर्यावरणविदों का मानना है कि यह समस्या जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण के लिए भी गंभीर चुनौती बन चुकी है। ऐसा नहीं है कि सरकारों ने इस समस्या को रोकने के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है तथा विभिन्न राज्यों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और कई उच्च न्यायालयों ने भी जहरीले मांझे के प्रयोग और पी पर सख्त रुख अपनाया है। अधिकांश राज्यों में चाइनीज मांझे और धातु युक्त सिंथेटिक मांझे के निर्माण, भंडारण, पी और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। अब समय आ गया है कि जहरीले मांझे के खिलाफ केवल औपचारिक प्रतिबंधों से आगे बढ़कर एक व्यापक और प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि सड़कों पर चलने वाले नागरिकों और आसमान में उड़ने वाले पक्षियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एक सभ्य और संवेदनशील समाज की पहचान यही है कि वह मनोरंजन और परंपरा के नाम पर किसी भी जीव के जीवन को खतरे में नहीं पड़ने देता।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।
सर्वोच्च न्यायालय ने भी समय-समय पर इस विषय पर गंभीर चिंता व्यक्त की है तथा विभिन्न राज्यों को प्रभावी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) और कई उच्च न्यायालयों ने भी जहरीले मांझे के प्रयोग और पी पर सख्त रुख अपनाया है। अधिकांश राज्यों में चाइनीज मांझे और धातु युक्त सिंथेटिक मांझे के निर्माण, भंडारण, पी और उपयोग पर प्रतिबंध लगाया जा चुका है। अब समय आ गया है कि जहरीले मांझे के खिलाफ केवल औपचारिक प्रतिबंधों से आगे बढ़कर एक व्यापक और प्रभावी अभियान चलाया जाए, ताकि सड़कों पर चलने वाले नागरिकों और आसमान में उड़ने वाले पक्षियों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। एक सभ्य और संवेदनशील समाज की पहचान यही है कि वह मनोरंजन और परंपरा के नाम पर किसी भी जीव के जीवन को खतरे में नहीं पड़ने देता।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।