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डिजिटल फाइनेंस में सावधानी की जरूरत

प्रकाशित: 15-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
इस वर्ष हम उपभोक्ता दिवस ऐसे माहौल में मना रहे है जब उपभोक्ता साइबर ठगी के आगे बेबस नज़र आ रहे है। उपभोक्ता ठगी के नए नए तरीके इस्तेमाल में लिए जा रहे है। हालांकि डिजिटल दुनिया ने बेशक हमारी जिंदगी को आसान बना दिया है, लेकिन इसके साथ ही बढ़ते साइबर अपराधों ने लोगों के लिए नए खतरे पैदा कर दिए हैं। भारत में साइबर फ्रॉड तेजी से बढ़ रहा है। हर 24 घंटे में करीब 38 करोड़ रुपये की ठगी हो रही है। गृह मंत्रालय की एक रिपोर्ट के मुताबिक रिपोर्ट के मुताबिक अकेले 2025 में ही साइबर फ्रॉड के 24 लाख से ज्यादा मामले दर्ज किए गए। यह पिछले सभी वर्षों के मुकाबले सबसे ज्यादा है। आज के बाजारवादी दौर में उपभोक्ताओं का जागरुक होना बहुत जरूरी है। इसे दृष्टिगत रखते हुए विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस हर वर्ष 15 मार्च को मनाया जाता है। विश्व उपभोक्ता अधिकार दिवस 2026 की थीम सुरक्षित उत्पाद, आश्वस्त उपभोक्तारखी गई है। इस दिवस को मनाने का मुख्य उद्देश्य आमजन को उपभोक्ता के अधिकार और जरूरतों के प्रति जागरूक करना है ताकि ग्राहकों और उपभोक्ताओं के प्रति हो रही धोखाधड़ी और सामाजिक अन्याय के खिलाफ लड़ सके।
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में भारत की इंटरनेट इकोनॉमी में बहुत तेजी से उछाल आया है। देश में 90 करोड़ से अधिक लोगों के हाथों में स्मार्टफोन है। डिजिटल ाढांति के साथ डिजिटल ठगी या साइबर फ्रॉड भी बढ़ रहा है। इससे बचना जरुरी है। आज का जमाना डिजिटल लेन देन का है। इसमें ऑनलाइन ठगी ज़ोरों पर है। इसलिए ग्राहकों को सतर्क और जागरूक रखने के लिए यह दिवस मनाया जा रहा है। इसमें कालाबाजारी, जमाखोरी, मिलावट, नाप-तोल में गड़बड़ी, बिल ना देना, वस्तुओं का अधिक मूल्य लेना तथा इसी तरह के दूसरे गुनाह इन कानूनों के अंतर्गत आते हैं। डिजिटल वित्त नए अवसर के साथ ही नए जोखिम भी लाता है जो कंज्यूमर्स के लिए अनुचित परिणाम पैदा कर सकता हैं। भारत डिजिटल पथ पर तेज़ी से आगे बढ़ रहा है। ड्राइविंग लाइसेंस, बर्थ सर्टिफिकेट पानी बिजली के बिल, इनकम टैक्स रिटर्न आदि अनेक कामों के लिए अब प्रािढयाएं डिजिटल इंडिया की मदद से बहुत आसान, बहुत तेज हुई है। मोबाइल और वैकल्पिक भुगतान भारतीय युवाओं में लोकप्रिय बने हुए हैं। ऐसा अनुमान है की अगले कुछ सालों में डिजिटल पेमेंट व्यवसाय में आशातीत वृद्धि होगी। मौजूदा दौर में भारतीय खुदरा बाजार ाढान्तिकारी बदलाव से गुजर रहा है। उपभोक्ता भिन्न चैनल्स (स्रोतो) से डिजिटल खरीदारी कर रहे हैं। ई-कॉमर्स या इ-व्यवसाय इंटरनेट के माध्यम से व्यापार का संचालन है। न केवल खरीदना और बेचना, बल्कि ग्राहकों के लिये सेवाएं और व्यापार के भागीदारों के साथ सहयोग भी इसमें शामिल है।
- बाल मुकुंद ओझा,
जयपुर, राजस्थान