वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

देश में बढ़ती अग्नि त्रासदियों का डरावना सच, फिर उठे गंभीर सवाल

प्रकाशित: 20-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
देश में तेजी से आधुनिक सुविधाएं बढ़ रही हैं लेकिन इनके साथ सुरक्षा के खतरे भी उतनी ही तेजी से बढ़ रहे हैं। हाल ही में दिल्ली और इंदौर में हुए दो भीषण अग्निकांडों ने पूरे देश को झकझोर दिया। इन हादसों में 5 मासूम बच्चों सहित कुल 17 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया कि यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाए तो घर ही लाक्षागृह बन जाते हैं जहां से निकलना लगभग असंभव हो जाता है। इंदौर के ग्रेटर बृजेश्वरी इलाके में तड़के करीब चार बजे एक इलेक्ट्रिक कार चार्जिंग के दौरान अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ। यह आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते तीन मंजिला मकान उसकी चपेट में आ गया। घर के भीतर सो रहे लोगों को संभलने तक का मौका नहीं मिला। आग पहले पार्किंग से होते हुए बिजली के तारों और एयर कंडीशनर तक पहुंची और फिर धमाकों का सिलसिला शुरू हो गया। बाद में सिलेंडर विस्फोट ने स्थिति को और भयावह बना दिया। इस घर में मनोज पुगलिया का परिवार रहता था और उस दिन उनके रिश्तेदार भी बिहार से आए हुए थे। परिवार में खुशियों का माहौल था क्योंकि एक महीने पहले ही उनके बेटे सोमिल की शादी हुई थी। गणगौर के अवसर पर बहू अपने मायके गई हुई थी, वरना वह भी इस हादसे की शिकार हो सकती थी। आग की लपटों में मनोज की गर्भवती बहू सिमरन सहित आठ लोगों की जान चली गई। यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि कई स्तरों पर लापरवाही का परिणाम था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार सुबह मॉर्निंग वॉक पर निकले एक व्यक्ति ने सबसे पहले आग देखी और लोगों को जगाया। आसपास के लोगों ने बिजली सप्लाई बंद करने की कोशिश की लेकिन तब तक आग फैल चुकी थी। कार और एसी कंप्रेसर में विस्फोट होने लगे जिससे दहशत और बढ़ गई। फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई लेकिन लोगों का आरोप है कि वह देर से पहुंची और आग पर काबू पाने में ढाई घंटे लग गए। इस हादसे में एक और गंभीर पहलू सामने आया। घर में लगे इलेक्ट्रिक स्मार्ट लॉक के कारण लोग बाहर नहीं निकल पाए। बिजली बंद होने के बाद लॉक सिस्टम फेल हो गया और दरवाजे नहीं खुल सके। यह आधुनिक सुविधा उस समय जानलेवा साबित हुई जब इसकी सबसे ज्यादा जरूरत थी। यह घटना यह सोचने पर मजबूर करती है कि क्या हम तकनीक पर जरूरत से ज्यादा निर्भर हो रहे हैं बिना उसके जोखिम समझे। दूसरी ओर दिल्ली के पालम इलाके में एक बहुमंजिला इमारत में लगी आग ने नौ लोगों की जान ले ली। यहां भी स्थिति बेहद भयावह थी। इमारत के ग्राउंड फ्लोर पर कपड़ों और कॉस्मेटिक्स का शोरूम था जहां से आग शुरू हुई और तेजी से ऊपर की मंजिलों तक फैल गई। संकरी गलियों और अपर्याप्त निकासी मार्ग के कारण लोग फंस गए। धुएं और आग ने बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। हादसे के दौरान लोगों ने अपने बच्चों को बचाने के लिए उन्हें नीचे खड़े लोगों की ओर फेंका। यह दृश्य जितना दर्दनाक था उतना ही भयावह भी। कुछ बच्चों को बचा लिया गया लेकिन कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। यह घटना शहरी इलाकों में बढ़ती अव्यवस्थित निर्माण व्यवस्था और सुरक्षा मानकों की अनदेखी की ओर इशारा करती है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।