बच्चों को सोशल मीडिया से दूर रखना समय की जरूरत
प्रकाशित: 08-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
आज का युग डिजिटल तकनीक का युग है। मोबाइल इंटरनेट और सोशल मीडिया ने जीवन को बहुत तेज और आसान बना दिया है। बच्चे भी इस दुनिया से अछूते नहीं रहे। कम उम्र में ही वे मोबाइल और सोशल मीडिया से जुड़ जाते हैं। लेकिन इसके साथ कई गंभीर समस्याएं भी सामने आ रही हैं। इसी कारण कुछ राज्यों ने बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। हाल ही में कर्नाटक और आंध्र प्रदेश सरकारों ने 16 वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की है। यह निर्णय बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षित भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बजट भाषण में कहा कि 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चे मोबाइल फोन तो रख सकते हैं लेकिन सोशल मीडिया का उपयोग नहीं कर सकेंगे। वहीं आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि 13 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध 90 दिनों के भीतर लागू किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि आज बच्चों में सोशल मीडिया का उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। कई सर्वे बताते हैं कि 10 से 15 वर्ष के अधिकांश बच्चे किसी न किसी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करते हैं। यह स्थिति चिंता का विषय बन गई है क्योंकि इस उम्र में बच्चों का मानसिक विकास हो रहा होता है और वे आसानी से किसी भी चीज से प्रभावित हो सकते हैं। सोशल मीडिया की दुनिया में बहुत प्रकार की सामग्री उपलब्ध होती है। इनमें अच्छी और उपयोगी जानकारी भी होती है लेकिन इसके साथ अश्लील हिंसक और भ्रामक सामग्री भी बड़ी मात्रा में मौजूद रहती है। बच्चे कई बार अनजाने में ऐसी सामग्री देख लेते हैं जो उनके मन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। इंटरनेट के एल्गोरिदम भी कई बार एक ही प्रकार की सामग्री बार बार दिखाते हैं जिससे बच्चे उसी प्रभाव में रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बच्चे प्रतिदिन कई घंटे सोशल मीडिया का उपयोग करते हैं तो उनके मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। कई शोधों में यह पाया गया है कि जो बच्चे दिन में तीन घंटे या उससे अधिक समय सोशल मीडिया पर बिताते हैं उनमें अवसाद और तनाव की समस्या अधिक पाई जाती है। देर रात तक मोबाइल चलाने की आदत से नींद पूरी नहीं हो पाती और इसका असर पढ़ाई पर भी पड़ता है। नींद की कमी बच्चों के मस्तिष्क पर भी असर डालती है। इससे उनकी एकाग्रता कमजोर हो जाती है और पढ़ाई में रुचि कम हो जाती है। कई बच्चे देर रात तक मोबाइल चलाने के कारण सुबह थकान महसूस करते हैं। इसका परिणाम यह होता है कि वे विद्यालय में ठीक से ध्यान नहीं दे पाते। धीरे धीरे यह आदत उनके व्यक्तित्व और भविष्य दोनों को प्रभावित कर सकती है। सोशल मीडिया का एक और खतरा साइबर बुलिंग है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।