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योग स्वस्थ जीवनशैली का महत्वपूर्ण माध्यम

प्रकाशित: 20-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
योग आज केवल भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का हिस्सा भर नहीं रह गया है, बल्कि यह पूरी दुनिया में स्वस्थ जीवनशैली का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। योग ने भारत को वैश्विक स्तर पर एक विशिष्ट पहचान प्रदान की है और इसके प्रसार में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका को विश्व समुदाय ने स्वीकार किया है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों के कारण योग को अंतरराष्ट्रीय मंच पर नई पहचान मिली और आज करोड़ों लोग इसे अपने दैनिक जीवन का हिस्सा बना चुके हैं। वर्ष 2014 में संयुक्त राष्ट्र महासभा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग को मानव कल्याण का प्रभावी माध्यम बताते हुए अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का प्रस्ताव रखा था। इस प्रस्ताव को अभूतपूर्व समर्थन प्राप्त हुआ और 177 देशों ने इसका सह-प्रायोजन किया। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र ने 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रूप में घोषित कर दिया। यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को मिली एक बड़ी वैश्विक मान्यता थी। ऐसे समय में जब दुनिया बेहतर स्वास्थ्य और मानसिक शांति की तलाश में है, योग एक ऐसा मार्ग प्रस्तुत करता है जो व्यक्ति, समाज और राष्ट्र सभी के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। 21 जून वर्ष का सबसे लंबा दिन माना जाता है और योग परंपरा में इसका विशेष महत्व बताया गया है। तभी से प्रत्येक वर्ष विश्वभर में इस दिन बड़े पैमाने पर योग कार्पाम आयोजित किए जाते हैं। भारत में योग की परंपरा हजारों वर्षों पुरानी है। हमारे ऋषि-मुनियों ने योग को केवल शारीरिक व्यायाम नहीं बल्कि शरीर, मन और आत्मा के संतुलन का माध्यम माना था। प्राचीन काल में योग के माध्यम से मानसिक एकाग्रता, आत्मानुशासन और स्वस्थ जीवन को बढ़ावा दिया जाता था। यही कारण था कि अनेक ऋषि-मुनि दीर्घायु होकर समाज में ज्ञान, चेतना और जनजागरण का कार्य करते रहे। आज आधुनिक विज्ञान भी यह स्वीकार कर चुका है कि योग अनेक शारीरिक और मानसिक समस्याओं के समाधान में सहायक है। वर्तमान समय में जब पूरी दुनिया प्रदूषण, तनाव, अवसाद, अनियमित जीवनशैली और विभिन्न प्रकार की बीमारियों की चुनौती का सामना कर रही है, तब योग का महत्व और अधिक बढ़ जाता है। योग नियमित रूप से करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है, मानसिक तनाव कम होता है, एकाग्रता बढ़ती है और व्यक्ति का आत्मविश्वास विकसित होता है। विशेष रूप से युवाओं के लिए योग शारीरिक क्षमता के साथ-साथ बौद्धिक विकास का भी प्रभावी साधन है। स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं और योग दोनों को सुदृढ़ बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि लोग नियमित रूप से योग और प्राणायाम को अपने जीवन का हिस्सा बना लें तो अनेक बीमारियों से बचाव संभव है। यह स्थिति शहरी जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करती है तथा सामाजिक तनाव को बढ़ाती है।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।