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राजस्थान बजट ः विकास, विश्वास और समृद्धि की नई इबारत

प्रकाशित: 12-02-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
राजस्थान विधानसभा में प्रस्तुत वर्ष 2026-27 का बजट राज्य के समग्र विकास का स्पष्ट रोडमैप लेकर आया है। उप मुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दिया कुमारी ने जिस संतुलन, दूरदृष्टि और संवेदनशीलता के साथ इस बजट को रखा है, वह इसे केवल आंकड़ों का दस्तावेज नहीं बल्कि जनआकांक्षाओं का संकल्प पत्र बना देता है। यह बजट विकास, सामाजिक सुरक्षा, आधारभूत ढांचे के विस्तार और आर्थिक सशक्तिकरण का ऐसा समन्वित मॉडल प्रस्तुत करता है, जिसमें गांव से शहर तक, किसान से युवा तक और महिला से आम नागरिक तक सभी के लिए ठोस प्रावधान किए गए हैं। पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष का बजट अधिक व्यापक, अधिक व्यावहारिक और अधिक जनोन्मुखी नजर आता है। वित्त मंत्री ने बताया कि राज्य की अर्थव्यवस्था का आकार 41 प्रतिशत से अधिक बढ़कर 21 लाख करोड़ रुपए से ऊपर पहुंच गया है।
प्रति व्यक्ति आय भी 1.68 लाख से बढ़कर 2 लाख 2 हजार रुपए के पार पहुंचने का अनुमान है। यह केवल आर्थिक वृद्धि का संकेत नहीं बल्कि वित्तीय प्रबंधन की मजबूती और निवेश प्रोत्साहन की सफलता का प्रमाण है। पिछला बजट जहां हरित सोच और आधार निर्माण की दिशा में केंद्रित था, वहीं इस वर्ष का बजट उस नींव पर तेज गति से विकास का विस्तार करता दिखाई देता है। किसानों के लिए यह बजट अत्यंत राहतकारी और उत्साहवर्धक है। 35 लाख किसानों को 25 हजार करोड़ रुपए का ब्याज मुक्त फसली ऋण देने की घोषणा ऐतिहासिक है। इसके लिए 800 करोड़ रुपए ब्याज अनुदान के रूप में खर्च किए जाएंगे। सहकारी बैंकों से दीर्घकालीन कृषि ऋण पर 5 प्रतिशत ब्याज अनुदान भी किसानों को स्थायी सहारा देगा। 50 हजार सोलर पंप लगाने के लिए 1500 करोड़ रुपए का प्रावधान, 36 हजार नए फार्म पॉन्ड के निर्माण पर अनुदान, 8000 डिग्गियों का निर्माण और 50 हजार किसानों को तारबंदी पर 288 करोड़ का अनुदान,ये सभी कदम कृषि को अधिक उत्पादक और सुरक्षित बनाने की दिशा में मजबूत पहल हैं। बीसलपुर की दायीं मुख्य नहर के 5000 हेक्टेयर क्षेत्र में फव्वारा सिंचाई प्रणाली पर 100 करोड़ का खर्च जल संरक्षण और आधुनिक सिंचाई के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दर्शाता है। शेखावाटी तक हथनी कुंड से यमुना जल लाने की 32 हजार करोड़ की परियोजना तो प्रदेश के जल भविष्य को सुरक्षित करने वाली दूरगामी योजना है। महिलाओं और बालिकाओं के लिए भी यह बजट विशेष रूप से सशक्तकारी है।
मुख्यमंत्री लखपति दीदी योजना में ऋण सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर 1.50 लाख रुपए करना महिला स्वावलंबन की दिशा में बड़ा कदम है। 25 हजार महिलाओं और युवाओं को मिनी ई-मित्र के रूप में अधिकृत करना उन्हें डिजिटल अर्थव्यवस्था से जोड़ने का प्रयास है। 5 लाख पशुपालकों को दूध पर बोनस के लिए 700 करोड़ का प्रावधान ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाने में सहायक होगा।
आंगनबाड़ियों की मरम्मत के लिए 275 करोड़ और 700 से अधिक आंगनबाड़ियों को नंद घर में अपग्रेड करने के लिए 225 करोड़ का प्रावधान बच्चों के पोषण और प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करेगा। 17 हजार से अधिक आंगनबाड़ी केंद्रों पर बिजली कनेक्शन और किशोरी बालिकाओं को पूरक पोषाहार का लाभ देने की घोषणा सामाजिक सुरक्षा की मजबूत कड़ी है। शिक्षा के क्षेत्र में यह बजट नई ऊर्जा का संचार करता है। कक्षा 10वीं और 12वीं के मेधावी छात्रों को 20 हजार रुपए तक का ई-वाउचर देकर लैपटॉप सहायता देना डिजिटल सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।