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वाणिज्यिक एलपीजी 42 रुपए महंगा

प्रकाशित: 02-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
वाणिज्यिक एलपीजी 42 रुपए महंगा
विशेष प्रतिनिधि
नई दिल्ली। होटल, रेस्तरां एवं ढाबों में इस्तेमाल होने वाले वाणिज्यिक एलपीजी के अलावा पांच किलो वाले छोटे सिलेंडर के दाम सोमवार को बढ़ा दिए गए, जबकि घरेलू रसोई गैस के दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।
उद्योग सूत्रों के मुताबिक, 19 किलोग्राम वाले वाणिज्यिक एलपीजी सिलेंडर की कीमत 42 रुपये बढ़कर दिल्ली में 3,113.50 रुपये हो गई, जबकि पहले इसकी कीमत 3,071.50 रुपये थी। इससे पहले एक मई को वाणिज्यिक गैस सिलेंडर के दाम में 993 रुपये की भारी बढ़ोतरी की गई थी। वहीं, पांच किलोग्राम वाले छोटे गैस सिलेंडर की कीमत भी 11 रुपये बढ़कर 821.50 रुपये हो गई है। हालांकि, घरेलू उपभोक्ताओं को राहत देते हुए 14.2 किलोग्राम वाले रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 913 रुपये पर स्थिर रखी गई है। इसमें आखिरी बार मार्च की शुरुआत में 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई थी। पेट्रोलियम विपणन कंपनियां हर महीने कीमतों की समीक्षा करती हैं और विभिन्न राज्यों में मूल्य-वर्धित कर ावैटा जैसे स्थानीय करों के कारण दरें अलग-अलग हो सकती हैं। सरकारी सूत्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस कीमतें बढ़ने के बावजूद घरेलू एलपीजी के दाम स्थिर रखे गए हैं ताकि उपभोक्ताओं पर बोझ न पड़े। हाल के महीनों में 14.2 किलोग्राम सिलेंडर की आपूर्ति लागत में करीब 40 प्रतिशत तक वृद्धि हुई है।
उधर अंतरराष्ट्रीय उड़ान संचालित करने वाली विमानन कंपनियों के लिए विमान ईंधन (एटीएफ) की कीमतों में सोमवार को 27 प्रतिशत की भारी कटौती की गई जिससे इन्हें बड़ी राहत मिलेगी। हालांकि, घरेलू कंपनियों के लिए एटीएफ दरों में लगातार दूसरे महीने कोई बदलाव नहीं किया गया। उद्योग सूत्रों के अनुसार, इस कटौती से अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के लिए विमान ईंधन की कीमत 400 डॉलर प्रति किलोलीटर से अधिक घटकर करीब 1,100 डॉलर प्रति किलोलीटर रह गई। इन विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ दरें एक मई को 76.55 डॉलर (5.33 प्रतिशत) बढ़ाकर 1,511.86 डॉलर प्रति किलोलीटर की गई थीं। अप्रैल में अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण यह दोगुनी से अधिक बढ़कर 1,435.31 डॉलर प्रति किलोलीटर हो गई थीं। घरेलू विमानन कंपनियों के लिए एटीएफ की कीमत एक अप्रैल से 1,04,927.18 रुपये प्रति किलोलीटर पर ही बनी हुई है। इसके बाद से इसमें कोई बदलाव नहीं हुआ है। अंतरराष्ट्रीय कीमतें मई में बढ़ने के बावजूद, सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने घरेलू कीमतों को स्थिर रखा था और अतिरिक्त लागत खुद वहन की ताकि यात्रियों पर बोझ न पड़े। अब अंतरराष्ट्रीय कीमतों में कमी आने पर विदेशी विमानन कंपनियों को राहत दी गई है, जबकि घरेलू आपूर्ति पर कंपनियां अब भी नुकसान झेल रही हैं।