क्या खराब मौसम बना काल? ये पांच चीजें ना हुईं होती, तो बच जाती डिप्टी सीएम अजित पवार की जान
प्रकाशित: 28-01-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
महाराष्ट्र के बारामती इलाके में हुए प्लेन क्रैश में सूबे के डिप्टी चीफ मिनिस्टर अजित पवार की दुखद मौत हो गई है. डिप्टी सीएम अजित पवार जिस प्लेन से बारामती जा रहे थे, उस प्लेन का रजिस्ट्रेशन नंबर VT-SSK है. इस प्लेन को फिलहाल वीएसआर एविएशन ऑपरेट कर रही थी. क्रैश हुआ प्लेन लियरजेट 45 एक्सआर (Learjet 45XR) मॉडल का एयरक्राफ्ट था.
इस प्लेन क्रैश के बाद सभी के मन में यही सवाल है कि गलती कहां हुई. हालांकि, इस हादसे को लेकर एविएशन एक्सपर्ट्स का फिलहाल यही कहना है कि टेकऑफ और लैंडिंग ये दो ऐसे पल होते हैं जब पायलट पर सबसे ज्यादा दबाव होता है. हवा की रफ्तार, रनवे की स्थिति, प्लेन की स्पीड, ऊंचाई और कंट्रोल यह सबकुछ सेकेंड-टू-सेकेंड बदलता है. ऐसे में कोई भी छोटी सी चूक भी क्रैश की वजह बन सकती है.
…तो शायद बच जाती अजित पवार की जान
खराब मौसम: बारिश, धुंध, तेज हवाएं ये सभी लैंडिंग के दौरान बड़ी मुश्किलें खड़ी करती हैं. इसके अलावा, तेज क्रॉस विंड प्लेन का संतुलन बिगाड़ सकती है. बारिश से रनवे फिसलन भरा हो जाता है, जिससे ब्रेकिंग दूरी बढ़ जाती है. अगर मौसम अचानक बिगड़ा हो और प्लेन को जबरन उतारने की कोशिश की गई हो, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.
रनवे विजिबिलिटी: लैंडिंग के समय पायलट को रनवे की लाइट्स और मार्किंग साफ दिखनी जरूरी होती हैं. अगर धुंध हो, बारिश के कारण शीशे पर पानी जमा हो या एयरपोर्ट की लाइटिंग सिस्टम में दिक्कत हो, तो पायलट सही एलाइनमेंट खो सकता है, जिससे प्लेन रनवे से भटक सकता है और यह क्रैश की वजह भी हो सकती है.
हार्ड लैंडिंग: नॉर्मल लैंडिंग में प्लेन धीरे-धीरे जमीन छूता है. लेकिन अगर स्पीड ज्यादा हो, एंगल गलत हो या पायलट ने देर से फ्लेयर किया हो, तो प्लेन जोर से जमीन पर गिरता है. इससे लैंडिंग गियर टूट सकता है या प्लेन उछल भी सकता है. ऐसे में प्लेन क्रैश की संभावना बढ़ जाती हैं.
पायलट का गलत निर्णय: एक्सपर्ट्स के अनुसार, एविएशन में एक नियम है ‘If in doubt, go around’ (अगर कोई शंका है तो गो अराउंड में चले जाइए). इसका मतलब है कि अगर लैंडिंग की स्थिति ठीक नहीं लगे, तो प्लेन को फिर से ऊपर ले जाकर दोबारा लैंडिंग की कोशिश करनी चाहिए.
तकनीकी खराबी: एक्सपर्ट्स के अनुसार, लैंडिंग के समय कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं. लैंडिंग गियर, फ्लैप्स, ब्रेक, रिवर्स थ्रस्ट… अगर इनमें से कोई सिस्टम फेल हो जाए, तो प्लेन को सुरक्षित उतारना बेहद मुश्किल हो जाता है. साथ ही प्लेन क्रैश हो सकता है.
इस प्लेन क्रैश के बाद सभी के मन में यही सवाल है कि गलती कहां हुई. हालांकि, इस हादसे को लेकर एविएशन एक्सपर्ट्स का फिलहाल यही कहना है कि टेकऑफ और लैंडिंग ये दो ऐसे पल होते हैं जब पायलट पर सबसे ज्यादा दबाव होता है. हवा की रफ्तार, रनवे की स्थिति, प्लेन की स्पीड, ऊंचाई और कंट्रोल यह सबकुछ सेकेंड-टू-सेकेंड बदलता है. ऐसे में कोई भी छोटी सी चूक भी क्रैश की वजह बन सकती है.
…तो शायद बच जाती अजित पवार की जान
खराब मौसम: बारिश, धुंध, तेज हवाएं ये सभी लैंडिंग के दौरान बड़ी मुश्किलें खड़ी करती हैं. इसके अलावा, तेज क्रॉस विंड प्लेन का संतुलन बिगाड़ सकती है. बारिश से रनवे फिसलन भरा हो जाता है, जिससे ब्रेकिंग दूरी बढ़ जाती है. अगर मौसम अचानक बिगड़ा हो और प्लेन को जबरन उतारने की कोशिश की गई हो, तो जोखिम कई गुना बढ़ जाता है.
रनवे विजिबिलिटी: लैंडिंग के समय पायलट को रनवे की लाइट्स और मार्किंग साफ दिखनी जरूरी होती हैं. अगर धुंध हो, बारिश के कारण शीशे पर पानी जमा हो या एयरपोर्ट की लाइटिंग सिस्टम में दिक्कत हो, तो पायलट सही एलाइनमेंट खो सकता है, जिससे प्लेन रनवे से भटक सकता है और यह क्रैश की वजह भी हो सकती है.
हार्ड लैंडिंग: नॉर्मल लैंडिंग में प्लेन धीरे-धीरे जमीन छूता है. लेकिन अगर स्पीड ज्यादा हो, एंगल गलत हो या पायलट ने देर से फ्लेयर किया हो, तो प्लेन जोर से जमीन पर गिरता है. इससे लैंडिंग गियर टूट सकता है या प्लेन उछल भी सकता है. ऐसे में प्लेन क्रैश की संभावना बढ़ जाती हैं.
पायलट का गलत निर्णय: एक्सपर्ट्स के अनुसार, एविएशन में एक नियम है ‘If in doubt, go around’ (अगर कोई शंका है तो गो अराउंड में चले जाइए). इसका मतलब है कि अगर लैंडिंग की स्थिति ठीक नहीं लगे, तो प्लेन को फिर से ऊपर ले जाकर दोबारा लैंडिंग की कोशिश करनी चाहिए.
तकनीकी खराबी: एक्सपर्ट्स के अनुसार, लैंडिंग के समय कई सिस्टम एक साथ काम करते हैं. लैंडिंग गियर, फ्लैप्स, ब्रेक, रिवर्स थ्रस्ट… अगर इनमें से कोई सिस्टम फेल हो जाए, तो प्लेन को सुरक्षित उतारना बेहद मुश्किल हो जाता है. साथ ही प्लेन क्रैश हो सकता है.