बिरला ने टीएमसी मामले में अभिषेक बनर्जी को पक्ष रखने के लिए बुलाया
प्रकाशित: 18-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (विप्र)। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी को पार्टी में विभाजन के मुद्दे पर अपना पक्ष रखने के लिए 19 जून को बै"क के लिए आमंत्रित किया है। संसद से जुड़े सूत्रों ने बुधवार को यह जानकारी दी। दूसरी तरफ, तृणमूल कांग्रेस के सूत्रों ने बताया कि पार्टी को बुधवार अपराह्न तीन बजे तक लोकसभा अध्यक्ष कार्यालय से इस संबंध में कोई सूचना प्राप्त नहीं हुई थी। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है, जब तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) में विलय करने के बाद स्वयं को अलग समूह के रूप में मान्यता देने की मांग की है। बिरला ने इस मामले में कोई निर्णय लेने से पहले दोनों पक्षों को सुनने का फैसला किया है। अभिषेक बनर्जी ने 10 जून को लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर अलग गुट होने का दावा करने वाले किसी भी समूह को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत प्रदान नहीं की जाए।
बनर्जी ने पत्र में कहा था कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह के ग"न की अनुमति नहीं देते।
पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को बिरला के आवास पर जाकर यह पत्र उन्हें सौंपा था।
बनर्जी ने अपने पत्र में कहा था, तृणमूल कांग्रेस को सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र राजनीतिक दल के रूप में माना जाए तथा किसी भी कथित अलग समूह या गुट को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत देने से इनकार किया जाए।
उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़े उच्चतम न्यायालय की संविधान पी" के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव करने का रास्ता नहीं बचा है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था एक समूचे राजनीतिक दल को मान्यता देती है, न कि उसके भीतर प्रतिद्वंद्वी गुटों को।
उन्होंने यह भी कहा था, यदि इस प्रकार का कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो उस पर कोई भी निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
संसदीय सूत्रों ने कहा कि बिरला इस मामले में कानून, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्णय लेंगे।
बनर्जी ने पत्र में कहा था कि संविधान और दल-बदल विरोधी कानून किसी मौजूदा राजनीतिक दल के भीतर अलग समूह के ग"न की अनुमति नहीं देते।
पार्टी के सांसद कीर्ति आजाद और सागरिका घोष ने भी रविवार को बिरला के आवास पर जाकर यह पत्र उन्हें सौंपा था।
बनर्जी ने अपने पत्र में कहा था, तृणमूल कांग्रेस को सदन में उसके विधिवत अधिकृत नेता और मुख्य सचेतक के माध्यम से प्रतिनिधित्व करने वाले एकमात्र राजनीतिक दल के रूप में माना जाए तथा किसी भी कथित अलग समूह या गुट को किसी प्रकार की मान्यता, दर्जा या सहूलियत देने से इनकार किया जाए।
उन्होंने महाराष्ट्र के राजनीतिक संकट से जुड़े उच्चतम न्यायालय की संविधान पी" के फैसले का हवाला देते हुए तर्क दिया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची के तहत अब विभाजन का बचाव करने का रास्ता नहीं बचा है और मौजूदा कानूनी व्यवस्था एक समूचे राजनीतिक दल को मान्यता देती है, न कि उसके भीतर प्रतिद्वंद्वी गुटों को।
उन्होंने यह भी कहा था, यदि इस प्रकार का कोई अनुरोध प्राप्त होता है तो उस पर कोई भी निर्णय लेने से पहले तृणमूल कांग्रेस को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।
संसदीय सूत्रों ने कहा कि बिरला इस मामले में कानून, नियमों और प्रक्रियाओं के अनुरूप निर्णय लेंगे।