परम्परागत चिकित्सा पद्वतियों का कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं: डाक्टर कृष्णमूर्ति
प्रकाशित: 11-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
अलमोडा ,(वीअ)। उत्तराखण्ड श्रमजीवी पत्रकार यूनियन अलमोडा इकाई तत्वाधान में आयोजित विचार गोष्ठी मे देश के प्रख्यात मानवशास्त्राr डा कृषणमूर्ति ने कहा कि हमारी परम्परागत चिकित्सा प्रद्वतियां हजारो साल से कारगर है आज भी परम्परागत चिकित्सा पद्वतियो का कोई प्रतिकूल असर नही है।उन्होंने कहा कि आधुनिक चिकित्सा पद्वतियों मे 27 हजार दवाईया है जिन्हे याद रखना किसी भी चिकित्सक के लिये सम्भव नही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह ऐलोपैथी का विकास हो रहा है त्यो -त्यो बिमारियों मे भी वृद्धि हो रही है। भारतीय परम्परा मे चिकित्सा मे लक्षण प्रमुख है जिन्हे हम कफ पित्त व वात के नाम से जानते है। उसका उपचार विविध प्रकार की बनस्पतियों से हो जाता है ।प्राचीन भारतीय परंपरा व्यक्ति की जीवन शैली के लिए महत्वपूर्ण है।परम्परागत चिकित्सा पद्वतियो का कोई साईड इफेक्ट नही ।अपने जीवन को इन परंपराओं में ढाल कर हम स्वस्थ जीवन एवं समाज का निर्माण कर सकते हैं। व्याख्यान में कहा कि व्यायाम एवं नित्य भ्रमण के महत्व को भी बताया। एलोपैथिक चिकित्सा पद्धति एवं पारंपरिक भारतीय चिकित्सा का विशुद्ध वैज्ञानिक विश्लेषण किया। शारीरिक संरचना की विविध पक्षों को वैज्ञानिक ढंग से परीक्षित किया। शरीर में प्रोटीन के महत्व एवं भारतीय खानपान एवं अनाज में प्रोटीन की व्याख्या की। कार्पाम की अध्यक्षता इकाई अध्यक्ष जगजीवन बिष्ट ने की । संचालन प्रदेश प्रतिनिधि दयाकृष्ण कांडपाल ने किया।