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अमेरिका ने हिंद महासागर में डुबो दिया ईरानी युद्धपोत, समंदर का पानी हुआ लाल!

प्रकाशित: 05-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
अमेरिका ने हिंद महासागर में डुबो दिया ईरानी युद्धपोत, समंदर का पानी हुआ लाल!
मध्य पूर्व में जारी तनाव अब सीधे युद्ध में बदल गया है। इजरायल और अमेरिका ने संयुक्त रूप से ‘ऑपरेशन रोरिंग लायन’ और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत ईरान पर चौतरफा हमला बोल दिया है, जिससे तेहरान समेत ईरान के कई शहर धमाकों से दहल उठे हैं। अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद भड़की इस आग ने दुनिया को तीसरे विश्व युद्ध के मुहाने पर खड़ा कर दिया है।
ईरान पर हमले के साथ ही इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने अपने देश के भीतर भी युद्धस्तर पर सुरक्षा बढ़ा दी है। पूरे इजरायल में सायरन बजाकर जनता को सतर्क कर दिया गया है। सेना ने लोगों के मोबाइल फोन पर सीधे अलर्ट भेजकर निर्देश दिया है कि वे सुरक्षित स्थानों और बंकरों के करीब रहें। आईडीएफ ने साफ किया है कि यह एक ‘प्रोएक्टिव अलर्ट’ है ताकि ईरान की ओर से संभावित मिसाइल हमलों से नागरिकों को बचाया जा सके। इजरायली सेना ने जनता से अपील की है कि वे किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहें और सुरक्षा प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करें। क्षेत्र में हालात पल-पल बदल रहे हैं और तनाव काफी बढ़ गया है।
मिडिल ईस्ट में 2026 का यह साल इतिहास के सबसे भयानक सैन्य संघर्ष का गवाह बन रहा है। अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों ने ईरान के सैन्य और राजनीतिक ढांचे को हिलाकर रख दिया है।
क्या अमेरिका इस युद्ध में शामिल है?
अमेरिका इस युद्ध में केवल सहयोगी नहीं बल्कि मुख्य खिलाड़ी की भूमिका में है। ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के तहत अमेरिकी वायुसेना के B-2 स्टील्थ बॉम्बर और नौसेना के मिसाइल डिस्ट्रॉयर सीधे तौर पर हमलों को अंजाम दे रहे हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिकी सेना ईरान की जवाबी क्षमता को खत्म करने तक पीछे नहीं हटेगी।
अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला क्यों किया?
इस हमले के पीछे कई बड़े कारण बताए जा रहे हैं। सबसे प्रमुख वजह ईरान का परमाणु कार्यक्रम है, जिसे अमेरिका और इजरायल अपने अस्तित्व के लिए खतरा मान रहे थे। इसके अलावा, IRGC द्वारा अमेरिकी हितों पर लगातार किए जा रहे हमले और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘सांप का सिर काटने’ की रणनीति के तहत यह हमला किया गया है।
खामेनेई की मौत के बाद क्या हुआ?
1 मार्च 2026 को अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत की खबर ने ईरान और मुस्लिम जगत में उबाल पैदा कर दिया है। इसके तुरंत बाद ईरान में नेतृत्व का संकट गहरा गया और एक अंतरिम परिषद ने सत्ता संभाली। खामेनेई की मौत को ‘इस्लाम पर हमला’ बताते हुए ईरान ने ‘इंतकाम’ का ऐलान किया और खाड़ी के 8 देशों में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों की झड़ी लगा दी।
क्या यह तीसरे विश्व युद्ध की शुरुआत है?
रक्षा विशेषज्ञ इस टकराव को तीसरे विश्व युद्ध की आहट मान रहे हैं। जिस तरह से रूस और चीन ने इस हमले की निंदा की है और हिजबुल्लाह व हुथी जैसे गुट सक्रिय हुए हैं, उससे यह युद्ध वैश्विक स्तर पर फैलने का खतरा पैदा हो गया है। यदि नाटो देश और ईरान के मित्र देश सीधे तौर पर आमने-सामने आते हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए विनाशकारी होगा।
इस युद्ध में कौन-कौन से देश शामिल हैं?
वर्तमान में इस युद्ध के दो मुख्य धड़े बन चुके हैं:
एक पक्ष: अमेरिका और इजरायल, जिन्हें ब्रिटेन और कुछ यूरोपीय देशों का नैतिक समर्थन प्राप्त है।
दूसरा पक्ष: ईरान, जिसके साथ उसके प्रॉक्सी संगठन (हिजबुल्लाह, हुथी) और लेबनान, यमन व इराक के कुछ हिस्से शामिल हैं।
प्रभावित देश: बहरीन, कुवैत, कतर, यूएई, सऊदी अरब, ओमान और जॉर्डन, जिनके क्षेत्र में स्थित अमेरिकी अड्डों को ईरान निशाना बना रहा है।
युद्ध की टाइमलाइन: फरवरी-मार्च 2026
28 फरवरी: अमेरिका और इजरायल ने ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ लॉन्च किया। ईरान के 27 सैन्य ठिकानों पर भीषण बमबारी की गई।
1 मार्च: सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई और पूर्व राष्ट्रपति अहमदीनेजाद की हमले में मौत की पुष्टि हुई।
2 मार्च: ईरान का भीषण पलटवार शुरू हुआ। अमेरिकी विमानवाहक पोत ‘अब्राहम लिंकन’ पर मिसाइलें दागी गईं और 8 देशों में अमेरिकी बेस पर हमला किया गया।
दुनिया पर इस युद्ध का असर
तेल की कीमतों में उछाल: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
उड़ानों में बाधा: मिडिल ईस्ट का एयरस्पेस बंद होने से उड़ानें रद्द या डाइवर्ट कर दी गई हैं।
आर्थिक अस्थिरता: शेयर बाजारों में गिरावट है और निवेशक सोने की ओर भाग रहे हैं।