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आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक : नवभारत के निर्माण की बारह वर्षीय यात्रा

प्रकाशित: 15-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
डॉ. विपिन कुमार
भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में पिछले बारह वर्ष एक ऐसे परिवर्तनकाल के रूप में दर्ज किए जाएंगे, जिसने राष्ट्र के विकास को नई दिशा, नई गति और नई पहचान प्रदान की है। वर्ष 2014 में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नई सरकार का गठन हुआ, तब देश आर्थिक मंदी, प्रशासनिक जटिलताओं, भ्रष्टाचार, आधारभूत संरचना की कमी और वैश्विक मंच पर सीमित प्रभाव जैसी अनेक चुनौतियों से जूझ रहा था। आज, बारह वर्षों के उपरांत भारत न केवल विश्व की सबसे तीव्र गति से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है, बल्कि एक आत्मविश्वासी, आत्मनिर्भर और वैश्विक नेतृत्व की भूमिका निभाने वाला राष्ट्र बनकर उभरा है।
इन बारह वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि भारतीय समाज में आत्मविश्वास का पुनर्जागरण है। लंबे समय तक भारत को केवल संभावनाओं वाले देश के रूप में देखा जाता था, परंतु आज वह अवसरों का सृजन करने वाला, वैश्विक विमर्श को दिशा देने वाला और विश्व के भविष्य को प्रभावित करने वाला राष्ट्र बन चुका है। सरकार ने “सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास'' के मंत्र के साथ विकास को जन-आंदोलन का स्वरूप प्रदान किया।
आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा इस परिवर्तन की आधारशिला रही है। वैश्विक महामारी के कठिन दौर में जब विश्व की आपूर्ति श्रृंखलाएं बाधित हुईं, तब भारत ने केवल अपने लिए ही नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए भी नई संभावनाओं के द्वार खोले। आत्मनिर्भर भारत अभियान ने देश को विनिर्माण, रक्षा, कृषि, स्वास्थ्य और प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ाया। आज भारत रक्षा उपकरणों के आयातक से निर्यातक बनने की ओर अग्रसर है। स्वदेशी युद्धपोत, मिसाइलें, लड़ाकू विमान और रक्षा प्रणालियाँ भारत की बढ़ती सामरिक क्षमता का प्रमाण हैं।
अंकीय क्रांति इस यात्रा की दूसरी बड़ी उपलब्धि है। अंकीय भारत अभियान ने देश के प्रशासन, अर्थव्यवस्था और सामाजिक जीवन को अभूतपूर्व रूप से बदल दिया है। आज भारत विश्व की सबसे बड़ी अंकीय भुगतान व्यवस्था का संचालन कर रहा है। जन-धन, आधार और दूरभाष की त्रिशक्ति ने सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता और दक्षता को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण के माध्यम से करोड़ों लाभार्थियों तक बिना किसी बिचौलिये के सरकारी सहायता पहुँची है। अंकीय शासन ने भारत को तकनीकी लोकतंत्र का वैश्विक उदाहरण बना दिया है।
आर्थिक क्षेत्र में भी भारत ने उल्लेखनीय प्रगति की है। देश ने आधारभूत संरचना के निर्माण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। राष्ट्रीय राजमार्गों, द्रुतगामी मार्गों, बंदरगाहों, हवाई अड्डों और रेल नेटवर्क का अभूतपूर्व विस्तार हुआ है। वंदे भारत रेलगाड़ियों से लेकर आधुनिक हवाई अड्डों तक, भारत की विकास गाथा अब धरातल पर स्पष्ट दिखाई देती है। भारत विश्व की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति लगातार मजबूत कर रहा है और आने वाले वर्षों में विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में अग्रसर है।
नवाचार और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत ने एक नई ाढांति का सूत्रपात किया है। भारत में निर्माण अभियान और नवप्रारंभ भारत अभियान जैसी पहलों ने युवाओं को नौकरी खोजने वाला नहीं, बल्कि रोजगार सृजित करने वाला बनने की प्रेरणा दी। आज भारत विश्व के अग्रणी नवप्रारंभ पारितंत्रों में से एक है। यह परिवर्तन केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और मानसिक परिवर्तन का भी प्रतीक है। नई पीढ़ी अब जोखिम उठाने, नवाचार करने और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने के लिए तैयार दिखाई देती है।
भारत की विदेश नीति में भी पिछले बारह वर्षों में एक नया आत्मविश्वास दिखाई देता है। भारत ने “वसुधैव कुटुम्बकम्'' की भावना के साथ विश्व समुदाय के समक्ष अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है। चाहे अंतरराष्ट्रीय संकट के समय मानवीय सहायता पहुँचाने की बात हो, जलवायु परिवर्तन पर नेतृत्वकारी भूमिका निभाने की बात हो अथवा वैश्विक दक्षिण की आवाज़ बनने की, भारत ने हर मंच पर अपनी सक्रिय और निर्णायक उपस्थिति दर्ज कराई है।
भारत की अध्यक्षता में आयोजित जी-20 शिखर सम्मेलन ने विश्व मंच पर देश की प्रतिष्ठा को नई ऊँचाई प्रदान की। यह केवल एक कूटनीतिक आयोजन नहीं था, बल्कि भारत की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता और नेतृत्व क्षमता का प्रतीक था। भारत ने विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक विमर्श के केंद्र में लाकर अपनी जिम्मेदार वैश्विक भूमिका का परिचय दिया।
अंतरिक्ष विज्ञान में भी भारत की उपलब्धियाँ उल्लेखनीय रही हैं। चंद्रयान-3 की सफलता ने भारत को चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव तक पहुँचने वाला पहला देश बना दिया। यह उपलब्धि केवल वैज्ञानिक सफलता नहीं, बल्कि नए भारत की महत्वाकांक्षा, क्षमता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। आज विश्व भारत को केवल एक उभरती अर्थव्यवस्था के रूप में नहीं, बल्कि विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में एक अग्रणी शक्ति के रूप में भी देख रहा है।
निस्संदेह, किसी भी विकास यात्रा की भाँति चुनौतियाँ अभी भी मौजूद हैं। रोजगार सृजन, आय असमानता, कृषि क्षेत्र का आधुनिकीकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तथा स्वास्थ्य सेवाओं का सार्वभौमिक विस्तार ऐसे क्षेत्र हैं, जिन पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। विकसित भारत का लक्ष्य तभी साकार होगा, जब विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक समान रूप से पहुँचे।
फिर भी यह स्वीकार करना होगा कि पिछले बारह वर्षों में भारत ने जिस परिवर्तनकारी यात्रा को तय किया है, उसने विकसित राष्ट्र बनने की मजबूत नींव रख दी है। यह यात्रा केवल सरकारी उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि एक सौ चालीस करोड़ भारतीयों की आकांक्षाओं, परिश्रम और सामूहिक संकल्प की कहानी है।
आत्मनिर्भरता से वैश्विक नेतृत्व तक की यह यात्रा अभी पूर्ण नहीं हुई है; यह एक सतत प्रािढया है। किंतु इतना निश्चित है कि नए भारत की दिशा तय हो चुकी है। आज का भारत आत्मविश्वास से भरा हुआ, अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने वाला और विश्व को नई दिशा देने की क्षमता रखने वाला राष्ट्र बन चुका है। यही पिछले बारह वर्षों की सबसे बड़ी उपलब्धि है और यही विकसित भारत के स्वप्न की सबसे सुदृढ़ नींव भी।
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार एवं राष्ट्रवादी विचारक है।)