भारतीय जीवन-दर्शन का जीवंत प्रतीक है सोमवती अमावस्या
प्रकाशित: 15-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
अमावस्या तिथि को असदैव विशेष आध्यात्मिक महत्व प्राप्त रहा है किंतु जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है। ऐसी अमावस्या को ‘सोमवती अमावस्या' कहा जाता है। ‘सोम' का अर्थ चंद्रमा तथा भगवान शिव से है और सोमवार भगवान शिव की आराधना का प्रमुख दिन माना जाता है। इसलिए सोमवार को आने वाली अमावस्या शिव-शक्ति की उपासना, पितृ तर्पण, दान-पुण्य तथा आत्मशुद्धि के लिए अत्यंत शुभ मानी गई है। इस वर्ष उदया तिथि के अनुसार सोमवती अमावस्या 15 जून को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं, दुर्लभ ग्रह-नक्षत्र संयोगों तथा विशेष योगों के कारण इस बार की सोमवती अमावस्या को अत्यंत फलदायी माना जा रहा है। अमावस्या को हिंदू धर्म ग्रंथों में आत्ममंथन, साधना और पूर्वजों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने की तिथि बताया गया है। अमावस्या के दिन सूर्य और चंद्रमा एक ही राशि में स्थित होते हैं, जिसके कारण चंद्रमा का प्रकाश पृथ्वी पर दिखाई नहीं देता। आध्यात्मिक दृष्टि से यह अंधकार से प्रकाश की ओर बढ़ने का प्रतीक माना जाता है। सोमवती अमावस्या इसी आध्यात्मिक भाव को और अधिक प्रबल बनाती है क्योंकि यह भगवान शिव की कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ अवसर मानी जाती है।
इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों के कारण विशेष चर्चा में है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग तथा चंद्र-आदित्य योग का निर्माण हो रहा है। ये योग शास्त्राsं में अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक माने गए हैं। माना जाता है कि इन योगों में किया गया जप, तप, दान, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। इसके साथ ही मृगशिरा नक्षत्र का संयोग भी इस दिन के महत्व को बढ़ा रहा है। मृगशिरा नक्षत्र को खोज, ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और शुभ कार्यों का नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत अनुकूल मानी जा रही है। चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जो उनकी उच्च राशि मानी जाती है। बुध अपनी स्वराशि मिथुन में रहेंगे, गुरु कर्क राशि में तथा मंगल मेष राशि में स्थित होंगे, वहीं शनिदेव मीन राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि शुभ ग्रहों की यह स्थिति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक संतुलन, आर्थिक उन्नति और आध्यात्मिक प्रगति का संकेत देती है। विशेष रूप से गुरु और पा की अनुकूल स्थिति को समृद्धि, वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली का कारक माना गया है। सोमवती अमावस्या का संबंध विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती का पूजन करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है तथा परिवार में समृद्धि का वास होता है। विशेषकर विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना से इस दिन व्रत रखती हैं। यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। सोमवती अमावस्या के साथ पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है। हिंदू धर्म में पीपल को ‘देववृक्ष' कहा गया है।
(लेखिका शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय शिक्षाविद् हैं।)
इस वर्ष की सोमवती अमावस्या अनेक शुभ संयोगों के कारण विशेष चर्चा में है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग तथा चंद्र-आदित्य योग का निर्माण हो रहा है। ये योग शास्त्राsं में अत्यंत शुभ और सिद्धिदायक माने गए हैं। माना जाता है कि इन योगों में किया गया जप, तप, दान, पूजन और धार्मिक अनुष्ठान कई गुना अधिक फल प्रदान करता है। इसके साथ ही मृगशिरा नक्षत्र का संयोग भी इस दिन के महत्व को बढ़ा रहा है। मृगशिरा नक्षत्र को खोज, ज्ञान, आध्यात्मिक उन्नति और शुभ कार्यों का नक्षत्र माना जाता है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार ग्रहों की स्थिति भी अत्यंत अनुकूल मानी जा रही है। चंद्रमा वृषभ राशि में स्थित रहेंगे, जो उनकी उच्च राशि मानी जाती है। बुध अपनी स्वराशि मिथुन में रहेंगे, गुरु कर्क राशि में तथा मंगल मेष राशि में स्थित होंगे, वहीं शनिदेव मीन राशि में विराजमान रहेंगे। ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि शुभ ग्रहों की यह स्थिति जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, मानसिक संतुलन, आर्थिक उन्नति और आध्यात्मिक प्रगति का संकेत देती है। विशेष रूप से गुरु और पा की अनुकूल स्थिति को समृद्धि, वैवाहिक सुख और पारिवारिक खुशहाली का कारक माना गया है। सोमवती अमावस्या का संबंध विशेष रूप से भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना से जुड़ा हुआ है। पौराणिक मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक शिव-पार्वती का पूजन करने से दांपत्य जीवन में सुख-शांति बनी रहती है तथा परिवार में समृद्धि का वास होता है। विशेषकर विवाहित महिलाएं अपने पति की दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य की कामना से इस दिन व्रत रखती हैं। यह व्रत केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं बल्कि वैवाहिक जीवन में प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक भी माना जाता है। सोमवती अमावस्या के साथ पीपल वृक्ष की पूजा का विशेष महत्व जुड़ा हुआ है। हिंदू धर्म में पीपल को ‘देववृक्ष' कहा गया है।
(लेखिका शिक्षण क्षेत्र में सक्रिय शिक्षाविद् हैं।)