झारखंड: राज्यसभा चुनाव में भाकपा माले के विधायक इंडिया ग"बंधन के पक्ष में मतदान करेंगे
प्रकाशित: 15-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
रांची, (भाषा)। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा)-मार्क्सवादी लेनिनवादी (माले) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने रविवार को कहा कि पार्टी के दोनों विधायक झारखंड में 18 जून को होने वाले राज्यसभा चुनाव में इंडिया ग"बंधन के पक्ष में मतदान करेंगे।भट्टाचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि निर्दलीय उम्मीदवार का समर्थन करने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की चाल नाकाम हो जाएगी।
झारखंड में राज्यसभा की दो सीट के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) उम्मीदवार बैद्यनाथ राम, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी चुनाव लड़ रहे हैं।भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा, राज्य में राज्यसभा चुनाव में भाकपा (माले) लिबरेशन के वोट इंडिया ग"बंधन के उम्मीदवार के पक्ष में जायेंगे। हमारे (दोनों) विधायक पार्टी के इसी के अनुसार मतदान करेंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव के लिए दो एजेंट भी नियुक्त किए गए हैं।भट्टाचार्य ने कहा, हमें उम्मीद है कि भाजपा द्वारा परिमल नथवानी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारने की रणनीति विफल हो जाएगी और विधायक उनके खिलाफ मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा नीत राजग के पास राज्य विधानसभा में नथवानी को चुनाव जिताने लायक संख्या बल नहीं है, जब तक कि मतदान के दौरान विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग ना हो।चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 28 प्रथम वरीयता वोट हासिल करने जरूरी हैं।झारखंड विधानसभा में इंडिया ग"बंधन के कुल 56 सदस्य हैं, जिनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के दो विधायक शामिल हैं।भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग"बंधन (राजग) के पास 24 विधायक हैं, जिसमें भाजपा के 21, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन और जनता दल यूनाइटेड का एक-एक विधायक हैं।इसके अलावा झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक है। राज्य की एक राज्यसभा सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को पूरा होने के कारण रिक्त हो रही है।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है।उन्होंने कहा, चुनाव लगातार एक मजाक बनते जा रहे हैं। यह बात मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतगणना और परिणाम घोषित करने तक की पूरी प्रक्रिया में दिखाई देती है।भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि कोलकाता की एक इमारत में रखी 4,000 से अधिक ईवीएम मशीनें रहस्यमय परिस्थितियों में आग लगने से नष्ट हो गईं। उन्होंने कहा, यह घटना चुनाव के तुरंत बाद हुई, इसलिए अब कोई सबूत नहीं बचा। इससे साफ है कि भारत में चुनावी लोकतंत्र लगातार मजाक बनता जा रहा है।
झारखंड में राज्यसभा की दो सीट के लिए झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) उम्मीदवार बैद्यनाथ राम, कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी चुनाव लड़ रहे हैं।भट्टाचार्य ने पत्रकारों से कहा, राज्य में राज्यसभा चुनाव में भाकपा (माले) लिबरेशन के वोट इंडिया ग"बंधन के उम्मीदवार के पक्ष में जायेंगे। हमारे (दोनों) विधायक पार्टी के इसी के अनुसार मतदान करेंगे। उन्होंने बताया कि चुनाव के लिए दो एजेंट भी नियुक्त किए गए हैं।भट्टाचार्य ने कहा, हमें उम्मीद है कि भाजपा द्वारा परिमल नथवानी को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उतारने की रणनीति विफल हो जाएगी और विधायक उनके खिलाफ मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि भाजपा नीत राजग के पास राज्य विधानसभा में नथवानी को चुनाव जिताने लायक संख्या बल नहीं है, जब तक कि मतदान के दौरान विपक्षी विधायकों द्वारा क्रॉस-वोटिंग ना हो।चुनाव जीतने के लिए किसी उम्मीदवार को कम से कम 28 प्रथम वरीयता वोट हासिल करने जरूरी हैं।झारखंड विधानसभा में इंडिया ग"बंधन के कुल 56 सदस्य हैं, जिनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राष्ट्रीय जनता दल के चार और भाकपा (माले) लिबरेशन के दो विधायक शामिल हैं।भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक ग"बंधन (राजग) के पास 24 विधायक हैं, जिसमें भाजपा के 21, लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन और जनता दल यूनाइटेड का एक-एक विधायक हैं।इसके अलावा झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा का भी एक विधायक है। राज्य की एक राज्यसभा सीट शिबू सोरेन के निधन के बाद खाली हुई थी जबकि दूसरी सीट दीपक प्रकाश का कार्यकाल 21 जून को पूरा होने के कारण रिक्त हो रही है।
भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि भारत में लोकतंत्र खतरे में है।उन्होंने कहा, चुनाव लगातार एक मजाक बनते जा रहे हैं। यह बात मतदाता सूची तैयार करने से लेकर मतगणना और परिणाम घोषित करने तक की पूरी प्रक्रिया में दिखाई देती है।भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि कोलकाता की एक इमारत में रखी 4,000 से अधिक ईवीएम मशीनें रहस्यमय परिस्थितियों में आग लगने से नष्ट हो गईं। उन्होंने कहा, यह घटना चुनाव के तुरंत बाद हुई, इसलिए अब कोई सबूत नहीं बचा। इससे साफ है कि भारत में चुनावी लोकतंत्र लगातार मजाक बनता जा रहा है।