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छह दिवसीय फ्रांस स्लोवाकिया यात्रा से भारत की वैश्विक भूमिका मजबूत होगी

प्रकाशित: 15-06-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 13 से 18 जून 2026 तक की फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा केवल एक सामान्य विदेश दौरा नहीं है बल्कि भारत की कूटनीतिक आर्थिक सामरिक और तकनीकी शक्ति को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने वाला महत्वपूर्ण अभियान है। इस छह दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री फ्रांस के नीस एवियान और पेरिस शहरों के साथ साथ स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा का दौरा करेंगे। इन बैठकों और सम्मेलनों के माध्यम से भारत यूरोप के प्रमुख देशों के साथ अपने संबंधों को और अधिक मजबूत करेगा तथा व्यापार तकनीक रक्षा और नवाचार के क्षेत्रों में नए अवसर प्राप्त करेगा।
फ्रांस के नीस शहर में प्रधानमंत्री मोदी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने भारत इनोवेट्स कार्पाम का उद्घाटन किया। इस कार्पाम का उद्देश्य भारत फ्रांस और अन्य देशों के स्टार्टअप्स निवेशकों और वेंचर कैपिटल फंड्स को एक मंच पर लाना है। इससे भारतीय नवाचारों को वैश्विक पहचान मिलेगी और भारतीय युवाओं को विदेशी निवेश तथा नई तकनीकों का लाभ प्राप्त होगा। भारत के स्टार्टअप क्षेत्र को यूरोप के बाजारों से जोड़ने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इस यात्रा के दौरान भारत और फ्रांस के बीच तकनीक नवाचार हेल्थ टेक मेडिकल उपकरण कृत्रिम बुद्धिमत्ता सेमीकंडक्टर और अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी से जुड़े अनेक समझौतों की संभावना है। इन समझौतों से भारत को उन्नत तकनीक प्राप्त होगी और देश के औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी। विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में ऐसी साझेदारियां अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।
यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण विषय भारतीय वायुसेना के लिए 114 रफाल लड़ाकू विमानों की प्रस्तावित खरीद है। भारत चाहता है कि इन विमानों का बड़ा हिस्सा देश में ही निर्मित हो तथा उनमें अधिकतम स्वदेशी तकनीक और पुर्जों का उपयोग किया जाए। प्रस्ताव के अनुसार केवल 24 विमान फ्रांस से आएंगे जबकि शेष 90 विमानों का निर्माण भारत में किया जाएगा। इससे देश में रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और हजारों युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे।
रफाल परियोजना में भारत का जोर केवल विमान खरीदने पर नहीं बल्कि तकनीक हस्तांतरण प्राप्त करने पर भी है। भारत चाहता है कि वह भविष्य में अपनी मिसाइलें और हथियार इन विमानों में स्वतंत्र रूप से जोड़ सके। यदि फ्रांस इस दिशा में सहयोग करता है तो भारतीय रक्षा उद्योग आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ी छलांग लगाएगा। मेक इन इंडिया और आत्मनिर्भर भारत अभियान को इससे उल्लेखनीय बल मिलेगा।
प्रधानमंत्री मोदी स्लोवाकिया की राजधानी ब्रातिस्लावा भी जाएंगे जहां वे प्रधानमंत्री रोबर्ट फिको और राष्ट्रपति पीटर पेलेग्रीनी से मुलाकात करेंगे। स्लोवाकिया के स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री का यह पहला दौरा है। इससे मध्य यूरोप में भारत की उपस्थिति मजबूत होगी और व्यापार शिक्षा विज्ञान उद्योग तथा रक्षा सहयोग के नए मार्ग खुलेंगे। भारतीय कंपनियों को स्लोवाकिया और आसपास के यूरोपीय बाजारों तक पहुंच बनाने में भी सहायता मिलेगी।
यात्रा के दूसरे चरण में प्रधानमंत्री फ्रांस के एवियान शहर में आयोजित जी सात शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। यद्यपि भारत जी सात का सदस्य नहीं है फिर भी उसे विश्व की प्रमुख अर्थव्यवस्था और प्रभावशाली लोकतंत्र होने के कारण विशेष आमंत्रण दिया जाता है। इस सम्मेलन में भारत को अमेरिका ब्रिटेन फ्रांस जर्मनी जापान इटली और कनाडा जैसे विकसित देशों के नेताओं के साथ संवाद का अवसर मिलेगा। इससे वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक मुद्दों पर भारत की भूमिका और अधिक मजबूत होगी।
जी सात सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के साथ द्विपक्षीय बैठक भी प्रस्तावित है। इस मुलाकात में व्यापार रक्षा ऊर्जा प्रौद्योगिकी और वैश्विक सुरक्षा से जुड़े विषयों पर चर्चा हो सकती है। भारत और अमेरिका के संबंधों को नई दिशा देने में यह बैठक महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।
पेरिस में आयोजित होने वाले विवाटेक सम्मेलन में भी प्रधानमंत्री मोदी भाग लेंगे। यह दुनिया के सबसे बड़े तकनीकी और नवाचार सम्मेलनों में से एक माना जाता है। यहां भारत को कृत्रिम बुद्धिमत्ता डिजिटल तकनीक स्टार्टअप और अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक साझेदारों से जुड़ने का अवसर मिलेगा। भारतीय नवाचारों और तकनीकी क्षमताओं को विश्व मंच पर प्रदर्शित करने का यह उत्कृष्ट अवसर होगा।
इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण पहलू होर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा से भी जुड़ा है। यह मार्ग भारत के ऊर्जा आयात और वैश्विक व्यापार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। फ्रांस और ब्रिटेन के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ने से भारत के समुद्री हितों की रक्षा मजबूत होगी और ऊर्जा आपूर्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सहायता मिलेगी।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी की छह दिवसीय फ्रांस और स्लोवाकिया यात्रा भारत को नीस एवियान पेरिस और ब्रातिस्लावा जैसे महत्वपूर्ण यूरोपीय केंद्रों से जोड़ने वाली यात्रा है। इसके माध्यम से भारत फ्रांस स्लोवाकिया अमेरिका तथा जी सात देशों के साथ अपने संबंधों को और अधिक गहरा करेगा। रक्षा उत्पादन तकनीकी विकास निवेश नवाचार व्यापार शिक्षा और वैश्विक कूटनीति के क्षेत्र में इस यात्रा के दूरगामी परिणाम देखने को मिल सकते हैं। विशेष रूप से भारत में रफाल विमानों के निर्माण और तकनीक हस्तांतरण की संभावना देश को आत्मनिर्भर रक्षा शक्ति बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम सिद्ध होगी। यही कारण है कि यह यात्रा विकसित भारत के संकल्प को साकार करने वाली एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल के रूप में देखी जा रही है।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।