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इस्लामिक कट्टरता, हिंसा और विक्टिम कार्ड

प्रकाशित: 14-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
इस्लामिक कट्टरता, हिंसा और विक्टिम कार्ड
डॉ. प्रवेश कुमार
पिछले दिनों दिल्ली के उतम नगर में स़िर्फ गुब्बारे की कुछ बूंदे एक मुस्लिम महिला के कपड़ों पर गिर जाने पर मुस्लिम गुट के द्वारा सामूहिक हमले ने एक घर के चिराग को बुझा दिया। हम देखे पिछले आठ दस वर्षों में कितने ही हिंदू त्योहारों पर मुस्लिम वर्ग के द्वारा हमले किए गए। होली हो या दिवाली या फिर रामनवमी का जुलूस या फिर गणेश उत्सव या हो दुर्गा अष्टमी मुस्लिम वर्ग के द्वारा हिन्दू तीज त्योहारों पर हमले आम होते है। ऐसा क्या अभी कुछ वर्षों में हुआ है, तो ऐसा नहीं है आजादी के पूर्व भी ऐसी कई घटनाएं हमें मिलती हैं। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ संस्थापक पूज्य सरसंघचालक केशव बलिराम हेडगेवार जी द्वारा महाराष्ट्र के रामटेक मंदिर शोभा यात्रा में हिन्दू मुस्लिम संघर्ष का वर्णन किया गया है। केवल मस्जिद परिसर के पास सूअर आ जाने पर मुस्लिम समाज द्वारा हिन्दुओ पर संगठित हमला ख़ुद अंग्रेजी पुलसिया डायरी बताती है। हम देखे की जेहादी लोगो के द्वारा इस्लामिक दायरे को इतना सीमित कर दिया जाता है, कि कुछ बूँद पानी और थोड़ा सा रंग भी इस्लाम को खतरे में डाल देता है। क्या वास्तव में इस्लाम ऐसा है तो इस पर इस्लामिक बौद्धिक जमात को विचार करने की आवश्यकता ज़रूर है।
पूज्य बाबा साहब अम्बेडकर जी ने इस्लामिक दायरे को लेकर कहा है। वे कहते है कि इस्लाम एक समुदाय में विश्वास करता है इस समुदाय से बाहर के लोग उनसे भिन्न है का]िफर है। यही कारण रहा कि विश्व भर में इस्लाम जेहाद के नाम पर अपने सामुदायिक पहचानों के आधार पर विश्व के तमाम मुल्कों को संगठित करना चाहता है। एक किताब एक भगवान और एक पूजा विधि के मानने वालो की संख्या सभी राष्ट्रों में हो जाए।
दारुल इस्लाम की स्थापना हो बस इसी लक्ष्य की प्राप्ति का हेतु इस्लामिक गुट जिहादी संघर्ष के मार्ग पर क़ाफी सािढय हुआ है। हजारों की संख्या में मुल्ला-मौलवी अपनी तकरीरों में इस्लामिक नियम-कायदों का वर्णन करते हैं, हम सभी इन्हें देख और सुन सकते हैं। इसलिए उत्तम नगर में तरुण खटिक की सामूहिक हत्या करने वाले लोग। इन्ही इस्लामिक प्रचारकों की भ्रामक और हिंसक तकरीरों से प्रभावित है। मदरसा शिक्षा और मौलवियों के ज्ञान ने इस्लाम में कट्टरता तो क़ाफी हद तक बढ़ाया है। इसी का परिणाम है कि हिन्दू और मुस्लिम वर्ग के बीच संघर्ष। क्या हम जानते नहीं की भारत में सर सयैद अहमद ख़ान के द्वारा मुस्लिम हिन्दू दो भिन्न पहचानो के सिद्धांत ने मुस्लिम लीग और फिर जिन्ना और पाकिस्तान का जन्म दिया।
भारत में मुस्लिम समाज के भीतर बढ़ती कट्टरता वास्तव में अधिक खतरे की और इशारा करती है। हम स़िर्फ पिछले दस वर्षों के आकड़े उठाए तो ज्ञात होता है कि जेहादी लोगो के द्वारा हिंदू उत्सवों एवं शोभा यात्राओं पर किस प्रकार से संगठित हमला किया गया। हम देखें की महाशिव रात्रि भगवान शिव के आराधना के दिन 13 हिंसा घटनाये हो जाती है। अभी इसी फ़रवरी 2026 शिवरात्रि की घटना उत्तराखंड उधम सिंह नगर के जसपुर कोतवाली का है। कुछ शिव भक्त अपनी कावड़ लेकर अब्दुल बारी चौक से निकले तो उस गली की छतो से कुछ लोगो ने जूस के खाली पैक्ट और कूड़ा पवित्र कावड़ पर फेंके। वही अमरोहा में हरिद्वार से आ रहे कवाड़ियों पर मुस्लिम युवकों ने पत्थरों से हमला किया। इसी प्रकार वर्ष 2018 में बाराबंकी के लोधेश्वर महादेव मंदिर की शिव बारात यात्रा में उड़ने वाले गुलाल कुछ मुस्लिम समाज के बन्धुओ पर गिर गया। इससे नाराज होकर मुस्लिम लोगो ने हिन्दू यात्रियों पर लढ़ियो और डंडों से हमला कर दिया जिससे दस से अधिक लोगो को चोंटे आयी। इसी प्रकार से भगवान श्री कृष्ण जन्माष्टमी में वर्ष 2025 सितंबर 14 की केरल के कोझिकोड की घटना है जहाँ पर जन्माष्टमी शोभा यात्रा पर हमला किया गया इस यात्रा में दो बच्चे राधा और कृष्ण के रूप में थे और भगवान के गीत गा रहे थे। वही तेलंगाना भाग्यनगर की घटना है जहाँ जन्माष्टमी के दिन संतोष नगर मे हो रहे भक्ति कार्पाम पर मुस्लिम वर्ग ने हमला कर दिया जिसमे स्थानीय भूलक्ष्मी जी के मंदिर की मूर्ति भी छतिग्रस्त हुई। वर्ष 24 अगस्त, 2019 बरेली, उत्तर प्रदेश मकरी नवादा गांव में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर निकली शोभायात्रा के दौरान मुस्लिम भीड़ ने हमला बोल दिया जिसमें महिलाएँ और पांच लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
केवल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी में ही 10 से अधिक हमलों की घटनाएं हैं। इसी प्रकार से वर्ष 2015 से लेकर 2025 तक हनुमान जन्मोत्सव के दिन निकाले जा रहे जुलूस पर हुए हमलों की कुल 11 घटनाए हैं। वर्ष 12 अप्रैल 2025 गुना जिले के कर्नलगंज इलाके में हनुमान जन्मोत्सव के अवसर पर शोभायात्रा निकाल रहे हिंदू समुदाय पर मदीना मस्जिद के पास मुस्लिम भीड़ ने हमला कर दिया। इस दौरान पथराव, फायरिंग, लाठी-डंडों से हमला किया गया, जिसमें कई हिंदू श्रद्धालु घायल हो गए। इसी प्रकार वर्ष 16 अप्रैल 2022 जहांगीरपुरी में हनुमान जयंती के मौके पर निकाली जा रही शोभायात्रा पर मुस्लिम युवकों ने भारी पथराव किया। इस हिंसा में 8 पुलिसकर्मी समेत 9 लोग घायल हुए थे। आंध्र प्रदेश वर्ष 2022, 24 अप्रैल नेल्लोर जिले में कोर्ट रोड से गुजर से 15,000 से अधिक हिंदुओं द्वारा निकाले जा रहे हनुमान जयंती शोभायात्रा पर मुस्लिम भीड़ ने पत्थर और काँच की बोतलों से हमला कर दिया। मस्जिद में खड़े युवकों की ओर से मूर्ति पर बीयर की बोतलें फेंकी गई और नारेबाजी करते हुए भद्दे इशारे किए गए। हिन्दू त्योहारों को चिन्हित करो फिर हिन्दू समाज खड़ा होए तो मुस्लिम है इसलिए दबाया जा रहा है ऐसा विक्टिम कार्ड खेले।
अब देखो ना माँ सरस्वती पूजा पर भी मुस्लिम वर्ग द्वारा कम उपद्रव नहीं किया गया है। भास्कर न्यूज़ ने 26 जनवरी2026 वैशाली (बिहार ) के बिदुपुर थाना क्षेत्र के नवादा गाँव में सरस्वती प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान रास्ते के विवाद को लेकर मुस्लिम कट्टरपंथियों ने जुलूस पर हमला कर जमकर पत्थरबाजी की। इस न्यूज़ को छापा की किस प्रकार से विसर्जन जुलूस के दौरान मुस्लिम कट्टरपंथियों ने रास्ते को लेकर आपत्ति जताई और फिर यात्रियो पर अपनी छतों से पत्थर फेंकना शुरू कर दिया, जिससे जुलूस में शामिल कई हिंदू लोग घायल हो गए और इलाके में अफरा-तफरी मच गई। इस तरह से वसंत पंचमी उत्सव में 18 से अधिक घटनाएं हमें पिछले वर्षों में मिलती हैं।
इसी प्रकार से दीपावली में 27 घटनाए तो दुर्गा पूजा 36 से अधिक घटनाए है। दिल्ली स्थित जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय में 22 अक्टूबर, 2024 में इस्लामी कट्टरपंथियों ने दीवाली मना रहे हिन्दू छात्रों पर हमला बोल दिया। मुस्लिम भीड़ (मेवात स्टूडेंट यूनियन) ने अल्लाह-हू-अकबर और नारा-ए-तकबीर के नारे लगाए।
विश्वविद्यालय में हर साल की तरह जामिया में गेट नम्बर 7 पर गुलिस्ताँ-ए-ग़ालिब के पास दीपोत्सव कार्पाम का आयोजन किया था। कट्टरपंथियों ने पैरों से दीये तोड़ डाले और रंगोलियों को बर्बाद कर दिया। इसी प्रकार से 4 अक्टूबर, 2025 बुलढाना (महाराष्ट्र) बावनबीर गांव में देवी प्रतिमा विसर्जन जुलूस के दौरान पथराव की घटना सामने आई। जुलूस में शामिल श्रद्धालुओं पर अचानक पत्थरबाजी हुई, जिससे 20 से 25 लोग घायल हो गए और मूर्तियाँ खंडित हो गईं। इसी प्रकार से होली महोत्सव 42 से ज़्यादा की घटनाएँ है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के बछरावां थाना क्षेत्र के बछरावां कस्बे में 4 मार्च 2026 को सब्जी मंडी मोहल्ले से रंग खेलते हुए निकल रहे हिंदू पक्ष के लोगों पर कट्टरपंथी मुस्लिम उपद्रवियों ने छतों से ईंट-पत्थरों और चाकुओं से हमला कर दिया। अचानक हुए इस हमले में दुर्गेश (27) सहित 11 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी प्रकार से वर्ष 2025, 14 मार्च को बीरभूम के अनाईपुर गाँव में होली के मौके पर को होली मना रहे हिंदुओं पर इस्लामी भीड़ ने हमला कर दिया। मुस्लिम भीड़ ने हिंदुओं को ‘जय श्री राम' का नारा लगाने पर निशाना बनाया और वीडियो में सुना गया कि तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई ये नारा लगाने की?
अब आप सोचे मुस्लिम कट्टरवादियों को राम नाम से भी तकल़ीफ है तो क्या हिन्दू जय श्री राम भी न कहे। इसी प्रकार से गणेश चतुर्थी 43, राम मंदिर शोभा यात्रा 10, राम नवमी 30 घटनाए हुई है। इन सबके बावजूद मुस्लिम विक्टिम कार्ड खेल अपने को शांति और अहिंसा का प्रतीक बताने से नहीं चुकता। इसलिए जो लोग उत्तम नगर दिल्ली में तरुण खटिक की हत्या में पुरानी रंजिश को देख रहे है मुझे लगता है यह लेख उनका मार्गदर्शन अवश्य करेगा।
(लेखक सहायक प्रोफेसर, तुलनात्मक राजनीति और राजनीतिक सिद्धांत का केन्द्र, स्कूल ऑफ इंटरनेशनल स्टडीज, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय नई दिल्ली।)