'मोची' को कहना होगा जूते का कारीगर, 'नाई' होगा पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर!
प्रकाशित: 13-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
उद्योग संबंधी संसदीय स्थायी समिति (333वीं रिपोर्ट) ने सिफारिश की है कि सदियों पुरानी जाति-सूचक नामों को तुरंत हटाकर पेशों को हुनर-आधारित और आधुनिक बनाया जाए. समिति की अध्यक्षता तिरुची शिवा ने की. रिपोर्ट में कहा गया है कि मोची, नाई, कुम्हार, धोबी जैसे नामों से जुड़ी सामाजिक रूढ़ियां युवाओं को इन व्यवसायों से दूर रख रही हैं.
इससे बाजार में प्रतिक्रिया भी कमजोर पड़ रही है. अब इन नामों की जगह कार्य-आधारित पहचान दी जाएगी ताकि जाति नहीं, स्किल पर फोकस हो. बता दें समिति ने MSME मंत्रालय को ये सुझाव दिए हैं.
मोची, नाई और अन्य पेशेवरों के नए नाम क्या होंगे?
* मोची को जूते का कारीगर कहा जाए.
* नाई को व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा प्रदाता या पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर**.
* कुम्हार को मिट्टी के उत्पाद निर्माता.
* धोबी को लॉन्ड्री एवं क्लीनिंग सर्विस प्रोवाइडर.
प्रधानमंत्री जल्द कर सकते हैं इसका ऐलान
जानकारी के अनुसार समिति का कहना है कि राज्यों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर पूरे देश में एक नई संशोधित ट्रेड सूची जारी की जाए. इससे युवा बिना झिझक इन हुनरों को अपनाएंगे और व्यवसाय गतिशील बनेगा. सिफारिश में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसे कार्यक्रमों में भी ये बदलाव तुरंत लागू करने की बात कही गई है.
नैनो उद्यम क्या है और यह छोटे कारोबारियों को कैसे मदद करेगा?
समिति ने तत्काल नैनो उद्यम की नई श्रेणी शुरू करने की वकालत की है. इसमें शुरुआती निवेश सीमा करीब 10 लाख रुपये तय करने का सुझाव है. फिलहाल उद्यम पोर्टल पर 7.61 करोड़ एमएसएमई रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 99.3 प्रतिशत (लगभग 7.56 करोड़) सूक्ष्म श्रेणी में आते हैं. लेकिन बड़े उद्यम भी सूक्ष्म का लाभ उठा लेते हैं, जिससे असली छोटे और घरेलू कारोबारी पीछे रह जाते हैं.
केरल में हिट हुआ ये नया प्रयोग
नैनो श्रेणी बनने से अंतिम पायदान के उद्यमी जैसे घर से जूते सिलने वाला या सैलून चलाने वाला सीधे सरकारी सब्सिडी, लोन और स्कीम्स का फायदा उठा सकेंगे. केरल सरकार पहले ही ऐसा मॉडल चला रही है जो साबित करता है कि यह व्यावहारिक है.
क्यों जरूरी है यह बदलाव और इसका असर क्या होगा?
समिति ने रिपोर्ट में चिंता जताई कि जाति-आधारित नामों से व्यवसायों में रिगिडिटी आ गई है. युवा इन पेशों को 'पुराना' या 'कम सम्मान वाला' समझते हैं. नाम बदलने से बाजार में ब्रांडिंग आसान होगी, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. साथ ही नैनो उद्यम से छोटे कारोबारियों को क्रेडिट, ट्रेनिंग और मार्केटिंग में प्राथमिकता मिलेगी. अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी जैसे वैश्विक चुनौतियों से भी एमएसएमई को बचाने के लिए टैरिफ रेजिलिएंस पैकेज बनाने की सलाह दी गई है.
सरकार अब क्या कदम उठाएगी और आम आदमी को क्या फायदा?
रिपोर्ट के मुताबिक एमएसएमई मंत्रालय को इन सिफारिशों पर जल्दी एक्शन लेना चाहिए. मंत्रालय को नई ट्रेड सूची जारी करने, नैनो उद्यम की श्रेणी लागू करने और पीएम विश्वकर्मा योजना को डायनामिक बनाने पर काम करना चाहिए. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर ये योजना लागू हुई तो लाखों छोटे कारोबारी बिना जाति के बोझ के हुनर से आगे बढ़ सकेंगे. आपका सैलून, जूते की दुकान या घरेलू बिजनेस अब 'सौंदर्य सेवा' या 'फुटवियर आर्टिसन' के रूप में नई पहचान प्राप्त का सकेंगे.
इससे बाजार में प्रतिक्रिया भी कमजोर पड़ रही है. अब इन नामों की जगह कार्य-आधारित पहचान दी जाएगी ताकि जाति नहीं, स्किल पर फोकस हो. बता दें समिति ने MSME मंत्रालय को ये सुझाव दिए हैं.
मोची, नाई और अन्य पेशेवरों के नए नाम क्या होंगे?
* मोची को जूते का कारीगर कहा जाए.
* नाई को व्यक्तिगत सौंदर्य सेवा प्रदाता या पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर**.
* कुम्हार को मिट्टी के उत्पाद निर्माता.
* धोबी को लॉन्ड्री एवं क्लीनिंग सर्विस प्रोवाइडर.
प्रधानमंत्री जल्द कर सकते हैं इसका ऐलान
जानकारी के अनुसार समिति का कहना है कि राज्यों और विशेषज्ञों से सलाह लेकर पूरे देश में एक नई संशोधित ट्रेड सूची जारी की जाए. इससे युवा बिना झिझक इन हुनरों को अपनाएंगे और व्यवसाय गतिशील बनेगा. सिफारिश में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसे कार्यक्रमों में भी ये बदलाव तुरंत लागू करने की बात कही गई है.
नैनो उद्यम क्या है और यह छोटे कारोबारियों को कैसे मदद करेगा?
समिति ने तत्काल नैनो उद्यम की नई श्रेणी शुरू करने की वकालत की है. इसमें शुरुआती निवेश सीमा करीब 10 लाख रुपये तय करने का सुझाव है. फिलहाल उद्यम पोर्टल पर 7.61 करोड़ एमएसएमई रजिस्टर्ड हैं, जिनमें से 99.3 प्रतिशत (लगभग 7.56 करोड़) सूक्ष्म श्रेणी में आते हैं. लेकिन बड़े उद्यम भी सूक्ष्म का लाभ उठा लेते हैं, जिससे असली छोटे और घरेलू कारोबारी पीछे रह जाते हैं.
केरल में हिट हुआ ये नया प्रयोग
नैनो श्रेणी बनने से अंतिम पायदान के उद्यमी जैसे घर से जूते सिलने वाला या सैलून चलाने वाला सीधे सरकारी सब्सिडी, लोन और स्कीम्स का फायदा उठा सकेंगे. केरल सरकार पहले ही ऐसा मॉडल चला रही है जो साबित करता है कि यह व्यावहारिक है.
क्यों जरूरी है यह बदलाव और इसका असर क्या होगा?
समिति ने रिपोर्ट में चिंता जताई कि जाति-आधारित नामों से व्यवसायों में रिगिडिटी आ गई है. युवा इन पेशों को 'पुराना' या 'कम सम्मान वाला' समझते हैं. नाम बदलने से बाजार में ब्रांडिंग आसान होगी, निवेश बढ़ेगा और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे. साथ ही नैनो उद्यम से छोटे कारोबारियों को क्रेडिट, ट्रेनिंग और मार्केटिंग में प्राथमिकता मिलेगी. अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी जैसे वैश्विक चुनौतियों से भी एमएसएमई को बचाने के लिए टैरिफ रेजिलिएंस पैकेज बनाने की सलाह दी गई है.
सरकार अब क्या कदम उठाएगी और आम आदमी को क्या फायदा?
रिपोर्ट के मुताबिक एमएसएमई मंत्रालय को इन सिफारिशों पर जल्दी एक्शन लेना चाहिए. मंत्रालय को नई ट्रेड सूची जारी करने, नैनो उद्यम की श्रेणी लागू करने और पीएम विश्वकर्मा योजना को डायनामिक बनाने पर काम करना चाहिए. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अगर ये योजना लागू हुई तो लाखों छोटे कारोबारी बिना जाति के बोझ के हुनर से आगे बढ़ सकेंगे. आपका सैलून, जूते की दुकान या घरेलू बिजनेस अब 'सौंदर्य सेवा' या 'फुटवियर आर्टिसन' के रूप में नई पहचान प्राप्त का सकेंगे.