वर्षों से राष्ट्र की सेवा में समर्पित Virarjun अर्जुनस्य प्रतिज्ञे द्वे, न दैन्यं, न पलायनम् ।

जनऔषधि: सस्ती दवाइयों से स्वस्थ भारत की ओर

प्रकाशित: 09-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
जनऔषधि: सस्ती दवाइयों से स्वस्थ भारत की ओर
डॉ. विपिन कुमार
भारत में स्वास्थ्य सेवाओं को आम जनता के लिए सुलभ और किफायती बनाने की दिशा में पिछले एक दशक में उल्लेखनीय परिवर्तन हुए हैं। इस परिवर्तन के केंद्र में है प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना, जिसने सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयों को जन-जन तक पहुँचाने का अभियान शुरू किया। हर वर्ष 7 मार्च को मनाया जाने वाला जनऔषधि दिवस इस महत्वपूर्ण पहल का प्रतीक बन चुका है।
आठवें जनऔषधि दिवस के अवसर पर यह कहना उचित होगा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के सािढय नेतृत्व में इस योजना ने देश में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक नया म़ुकाम हासिल किया है। भारत में स्वास्थ्य खर्च का एक बड़ा हिस्सा दवाइयों पर होता है। कई बार गंभीर बीमारी से अधिक आर्थिक बोझ महँगी दवाइयाँ बन जाती हैं। इस चुनौती को समझते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने जनऔषधि योजना को मजबूत और व्यापक रूप दिया। इस योजना का मूल उद्देश्य है-सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और भरोसेमंद जेनेरिक दवाइयों को आम नागरिक तक पहुँचाना। इसके लिए देश भर में जनऔषधि केंद्र स्थापित किए गए, जहाँ वही दवाइयाँ 50 से 90 प्रतिशत तक कम कीमत पर उपलब्ध कराई जाती हैं।
आज यह योजना केवल एक सरकारी कार्पाम नहीं, बल्कि स्वास्थ्य क्षेत्र में सामाजिक न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण आंदोलन बन चुकी है।केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में जन औषधि योजना को नई गति और व्यापकता मिली है। उनके कार्यकाल में देश के दूरदराज क्षेत्रों तक जन औषधि केंद्रों का विस्तार हुआ है।सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि यह योजना केवल महानगरों तक सीमित न रहे बल्कि छोटे शहरों, कस्बों और ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचे। परिणामस्वरूप आज देश के अधिकांश जिलों में जन औषधि केंद्र स्थापित हो चुके हैं और लाखों लोग प्रतिदिन इनसे लाभ उठा रहे हैं।
नड्डा ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि स्वास्थ्य सेवा का उद्देश्य केवल उपचार नहीं बल्कि आर्थिक राहत और सामाजिक सुरक्षा भी होना चाहिए। जनऔषधि योजना गरीब और मध्यम वर्ग के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा का एक मजबूत आधार बन रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई मंचों से यह स्पष्ट किया है कि स्वास्थ्य सेवा केवल सुविधा नहीं बल्कि नागरिक का अधिकार होना चाहिए। जन औषधि योजना उसी दृष्टि का परिणाम है। प्रधानमंत्री का मानना है कि जब दवाइयाँ सस्ती होंगी, तब ही देश के गरीब और मध्यम वर्ग को वास्तविक राहत मिलेगी। जनऔषधि केंद्र गरीबों और मध्यम वर्ग के लिए राहत का बड़ा माध्यम बन रहे हैं। सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाइयाँ हर नागरिक तक पहुँचना हमारा लक्ष्य है। प्रधानमंत्री की इसी सोच के कारण आज यह योजना देश के लाखों परिवारों की आर्थिक सुरक्षा का आधार बन रही है।
जनऔषधि योजना का सबसे बड़ा लाभ यह है कि इससे आम नागरिकों का दवा खर्च काफी कम हुआ है। मधुमेह, रक्तचाप, हृदय रोग, पांमण और अन्य सामान्य बीमारियों की दवाइयाँ अब बेहद कम कीमत पर उपलब्ध हैं। उदाहरण के लिए, जो दवाइयाँ सामान्य बाजार में 300-400 रुपये में मिलती हैं, वही जनऔषधि केंद्रों पर कई बार 50-60 रुपये में उपलब्ध हो जाती हैं।इससे विशेष रूप से गरीब, वरिष्ठ नागरिक और दीर्घकालिक रोगों से पीड़ित मरीजों को बहुत बड़ी राहत मिली है। कई परिवारों के लिए यह योजना आर्थिक संकट से बचाने वाली साबित हुई है।
जनऔषधि योजना केवल सस्ती दवाइयाँ उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यह भारत को वैश्विक स्तर पर जेनेरिक दवाइयों का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।भारत पहले से ही विश्व के सबसे बड़े जेनेरिक दवा उत्पादकों में से एक है। इस योजना के माध्यम से घरेलू फार्मा उद्योग को भी नई ऊर्जा मिली है और मेड इन इंडिया दवाइयों को व्यापक प्रोत्साहन मिला है।यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान की भावना को भी सशक्त बनाती है। जनऔषधि योजना की सफलता केवल केंद्रों की संख्या से नहीं बल्कि लोगों की जागरूकता से भी जुड़ी है। इसी कारण हर वर्ष जनऔषधि दिवस के अवसर पर देश भर में जागरूकता कार्पाम आयोजित किए जाते हैं।इन कार्पामों का उद्देश्य लोगों को यह समझाना है कि जेनेरिक दवाइयाँ भी उतनी ही प्रभावी और सुरक्षित होती हैं जितनी ब्रांडेड दवाइयाँ। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यदि चिकित्सक और मरीज दोनों जेनेरिक दवाइयों को प्राथमिकता दें, तो देश में स्वास्थ्य खर्च में भारी कमी आ सकती है।सरकार का लक्ष्य आने वाले वर्षों में जनऔषधि केंद्रों की संख्या को और बढ़ाना है ताकि देश के हर जिले और अधिक से अधिक गाँवों तक सस्ती दवाइयाँ पहुँच सकें।इसके साथ ही डिजिटल तकनीक के माध्यम से दवाइयों की उपलब्धता और वितरण प्रणाली को भी और अधिक मजबूत किया जा रहा है।
आठवें जनऔषधि दिवस के अवसर पर यह स्पष्ट रूप से दिखाई देता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शी सोच और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के नेतृत्व में प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना ने देश में स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक परिवर्तन की शुरुआत की है। यह योजना केवल दवाइयों की कीमत कम करने की पहल नहीं है, बल्कि यह गरीब और मध्यम वर्ग को स्वास्थ्य सुरक्षा प्रदान करने का एक राष्ट्रीय संकल्प है।यदि इसी प्रकार प्रतिबद्धता के साथ इस योजना को आगे बढ़ाया जाता रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब भारत का हर नागरिक सस्ती, गुणवत्तापूर्ण और सुलभ स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकेगा।
(लेखक वरिष्ठ स्तंभकार हैं।)