राष्ट्रपति मुर्मू के 'अपमान' पर बुरी फंसी ममता सरकार, गृह मंत्रालय ने मांग ली मुख्य सचिव से पूरी रिपोर्ट
प्रकाशित: 08-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के कार्यक्रम के दौरान कथित रूप से प्रोटोकॉल में हुई लापरवाही को लेकर केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपना लिया है. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पूरे मामले पर राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. सूत्रों के मुताबिक गृह मंत्रालय ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव से आज शाम तक इस मामले में पूरी जानकारी देने को कहा है. रिपोर्ट में राष्ट्रपति के दौरे के दौरान किए गए प्रोटोकॉल, कार्यक्रम स्थल, यात्रा मार्ग और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े सभी पहलुओं पर जवाब मांगा गया है.
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े ‘ब्लू बुक’ नियमों के मुताबिक कई स्तरों पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से चार प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिनमें शामिल हैं:
• राष्ट्रपति प्रोटोकॉल का पालन
• कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था
• राष्ट्रपति के काफिले का मार्ग
• सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं
सूत्रों के मुताबिक, कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय राज्य के शीर्ष अधिकारी मौजूद क्यों नहीं थे. आम तौर पर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी अपेक्षित होती है. लेकिन इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने किया.
सूत्रों के मुताबिक, कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय राज्य के शीर्ष अधिकारी मौजूद क्यों नहीं थे. आम तौर पर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी अपेक्षित होती है. लेकिन इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने किया. इसके अलावा यह भी आरोप है कि कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी तक उपलब्ध नहीं था. वहीं जिस मार्ग से राष्ट्रपति का काफिला गुजरा, वहां साफ-सफाई की स्थिति भी खराब बताई जा रही है और रास्ते में कचरा होने की शिकायत सामने आई है.
सूत्रों का कहना है कि इन परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के जिलाधिकारी, सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को जिम्मेदार माना जा रहा है.
राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर ममता बनर्जी का जवाब
इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी में आयोजित कार्यक्रम किसी सरकारी आयोजन का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह इंटरनेशनल संथाल काउंसिल नामक एक निजी संस्था द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल आदिवासी संथाल सम्मेलन’ था, जिसमें राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया था.
मुख्यमंत्री के मुताबिक जिला प्रशासन ने पहले ही राष्ट्रपति सचिवालय को लिखित और मौखिक रूप से बताया था कि कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं. इसके बावजूद कार्यक्रम तय समय पर आयोजित किया गया.
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के लिए जो प्रोटोकॉल सूची राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से तय की गई थी, उसी के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर, दार्जिलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी पुलिस आयुक्त मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की ओर से किसी भी तरह का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ.
राष्ट्रपति ने जताई थी नाराजगी
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने सवाल उठाया था कि आमतौर पर राष्ट्रपति के दौरे के समय मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री स्वागत के लिए मौजूद रहते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ. राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्यक्रम ऐसे स्थान पर रखा गया जहां लोगों के लिए पहुंचना मुश्किल था.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी जताई नाराजगी
इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे ‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’ बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ने जो पीड़ा व्यक्त की है, उससे देश के लोगों को गहरा दुख हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इसकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए.
तृणमूल कांग्रेस का पलटवार
वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के खिलाफ पूरे केंद्रीय तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में इस मुद्दे को लेकर राज्य की सियासत भी तेज हो गई है और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.
अब सभी की नजर उस रिपोर्ट पर टिकी है जो पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव गृह मंत्रालय को सौंपेंगे. माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई तय कर सकती है.
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रपति की सुरक्षा से जुड़े ‘ब्लू बुक’ नियमों के मुताबिक कई स्तरों पर प्रोटोकॉल का उल्लंघन हुआ है. केंद्र सरकार ने राज्य सरकार से चार प्रमुख बिंदुओं पर स्पष्टीकरण मांगा है, जिनमें शामिल हैं:
• राष्ट्रपति प्रोटोकॉल का पालन
• कार्यक्रम स्थल की व्यवस्था
• राष्ट्रपति के काफिले का मार्ग
• सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाएं
सूत्रों के मुताबिक, कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय राज्य के शीर्ष अधिकारी मौजूद क्यों नहीं थे. आम तौर पर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी अपेक्षित होती है. लेकिन इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने किया.
सूत्रों के मुताबिक, कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं. इनमें सबसे बड़ा सवाल यह है कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के समय राज्य के शीर्ष अधिकारी मौजूद क्यों नहीं थे. आम तौर पर राष्ट्रपति के दौरे के दौरान मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और डीजीपी की मौजूदगी अपेक्षित होती है. लेकिन इस कार्यक्रम में राष्ट्रपति का स्वागत और विदाई केवल सिलीगुड़ी के मेयर ने किया. इसके अलावा यह भी आरोप है कि कार्यक्रम स्थल पर राष्ट्रपति के लिए बनाए गए वॉशरूम में पानी तक उपलब्ध नहीं था. वहीं जिस मार्ग से राष्ट्रपति का काफिला गुजरा, वहां साफ-सफाई की स्थिति भी खराब बताई जा रही है और रास्ते में कचरा होने की शिकायत सामने आई है.
सूत्रों का कहना है कि इन परिस्थितियों के लिए दार्जिलिंग के जिलाधिकारी, सिलीगुड़ी पुलिस कमिश्नरेट के पुलिस आयुक्त और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट को जिम्मेदार माना जा रहा है.
राष्ट्रपति के कार्यक्रम पर ममता बनर्जी का जवाब
इस विवाद के बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और बीजेपी पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि सिलीगुड़ी में आयोजित कार्यक्रम किसी सरकारी आयोजन का हिस्सा नहीं था, बल्कि यह इंटरनेशनल संथाल काउंसिल नामक एक निजी संस्था द्वारा आयोजित ‘इंटरनेशनल आदिवासी संथाल सम्मेलन’ था, जिसमें राष्ट्रपति को आमंत्रित किया गया था.
मुख्यमंत्री के मुताबिक जिला प्रशासन ने पहले ही राष्ट्रपति सचिवालय को लिखित और मौखिक रूप से बताया था कि कार्यक्रम स्थल पर पर्याप्त व्यवस्थाएं नहीं हैं. इसके बावजूद कार्यक्रम तय समय पर आयोजित किया गया.
ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति के स्वागत और विदाई के लिए जो प्रोटोकॉल सूची राष्ट्रपति सचिवालय की ओर से तय की गई थी, उसी के अनुसार सिलीगुड़ी नगर निगम के मेयर, दार्जिलिंग के डीएम और सिलीगुड़ी पुलिस आयुक्त मौजूद थे. उन्होंने दावा किया कि राज्य सरकार की ओर से किसी भी तरह का प्रोटोकॉल उल्लंघन नहीं हुआ.
राष्ट्रपति ने जताई थी नाराजगी
इससे पहले राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी कार्यक्रम के दौरान व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई थी. उन्होंने सवाल उठाया था कि आमतौर पर राष्ट्रपति के दौरे के समय मुख्यमंत्री और अन्य मंत्री स्वागत के लिए मौजूद रहते हैं, लेकिन इस कार्यक्रम में ऐसा नहीं हुआ. राष्ट्रपति ने कार्यक्रम स्थल को लेकर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि कार्यक्रम ऐसे स्थान पर रखा गया जहां लोगों के लिए पहुंचना मुश्किल था.
प्रधानमंत्री मोदी ने भी जताई नाराजगी
इस मामले पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी कड़ी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने इसे ‘शर्मनाक और अभूतपूर्व’ बताया. प्रधानमंत्री ने कहा कि राष्ट्रपति ने जो पीड़ा व्यक्त की है, उससे देश के लोगों को गहरा दुख हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति का पद राजनीति से ऊपर है और इसकी गरिमा का सम्मान किया जाना चाहिए.
तृणमूल कांग्रेस का पलटवार
वहीं सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के महासचिव अभिषेक बनर्जी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल के खिलाफ पूरे केंद्रीय तंत्र का इस्तेमाल किया जा रहा है.
पश्चिम बंगाल में अगले कुछ महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. ऐसे में इस मुद्दे को लेकर राज्य की सियासत भी तेज हो गई है और सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और विपक्षी बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है.
अब सभी की नजर उस रिपोर्ट पर टिकी है जो पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव गृह मंत्रालय को सौंपेंगे. माना जा रहा है कि रिपोर्ट के आधार पर केंद्र सरकार आगे की कार्रवाई तय कर सकती है.