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लापता होते बचपन की भयावह तस्वीर और समाज प्रशासन की जिम्मेदारी

प्रकाशित: 09-03-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
भारत में बच्चों के लापता होने की बढ़ती घटनाएं आज पूरे समाज के सामने एक गंभीर और चिंताजनक चुनौती के रूप में खड़ी हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट के अनुसार 1 जनवरी 2025 से 31 जनवरी 2026 के बीच देश में कुल 33577 बच्चे लापता हुए। यह आंकड़ा केवल एक संख्या नहीं है बल्कि हजारों परिवारों के दर्द चिंता और अनिश्चितता की कहानी है। इन बच्चों में से 7777 बच्चों का अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। यह स्थिति बताती है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए हमारी व्यवस्था और सामाजिक जागरूकता दोनों को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है। इस रिपोर्ट में सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति पश्चिम बंगाल की है जहां 19145 बच्चे लापता हुए। इनमें से 15465 बच्चों को ढूंढ लिया गया लेकिन 3680 बच्चे अभी भी लापता हैं। दूसरे स्थान पर मध्य प्रदेश है जहां 4256 बच्चे गायब हुए और 1059 बच्चों का अब तक कोई पता नहीं चल पाया। हरियाणा के आंकड़े भी चिंता बढ़ाने वाले हैं जहां 2209 बच्चे लापता हुए और 353 बच्चों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला। इन आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि बच्चों की सुरक्षा का मुद्दा केवल किसी एक राज्य का नहीं बल्कि पूरे देश की सामूहिक चिंता का विषय बन चुका है। कुछ राज्यों में स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर दिखाई देती है। नागालैंड अरुणाचल प्रदेश मणिपुर त्रिपुरा गुजरात लक्षद्वीप और दादरा एवं नगर हवेली जैसे क्षेत्रों में बच्चों के लापता होने का कोई मामला दर्ज नहीं हुआ। यह तथ्य इस बात की ओर संकेत करता है कि जहां समाज सतर्क है और प्रशासन सािढय है वहां ऐसी घटनाओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। हालांकि कई राज्यों में बरामद बच्चों की संख्या अधिक होने का कारण यह भी है कि वहां दूसरे राज्यों के बच्चे भी पाए गए।
लापता बच्चों के पीछे कई कारण हो सकते हैं। कई बच्चे पारिवारिक विवाद या गुस्से में घर छोड़ देते हैं। कुछ बच्चे गलत संगत में पड़ जाते हैं। वहीं कई मामलों में मानव तस्करी और बच्चों को अगवा करने वाले गिरोह भी सािढय रहते हैं। यही कारण है कि ऐसे मामलों को केवल एक सामान्य घटना समझकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कई बार बच्चों को मजदूरी अपराध या अन्य अवैध गतिविधियों में धकेल दिया जाता है जिससे उनका पूरा भविष्य अंधकार में चला जाता है। समाचारों में सामने आए कुछ उदाहरण इस दर्दनाक सच्चाई को और गहरा कर देते हैं। हरियाणा के अंबाला की 14 वर्षीय लड़की 8 जनवरी को अपनी सहेली के घर जाने की बात कहकर घर से निकली थी लेकिन वह वापस नहीं लौटी। बस स्टैंड की सीसीटीवी फुटेज में उसे जाते हुए देखा गया लेकिन उसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिला। इसी तरह अंबाला कैंट की एक लड़की परिवार से नाराज होकर घर से निकली और अभी तक वापस नहीं लौटी। परिवार अपनी बेटी के लौटने का इंतजार कर रहा है और पिता शहर में पर्चे बांटकर लोगों से जानकारी देने की अपील कर रहे हैं। ऐसे मामलों में परिवार की पीड़ा को शब्दों में व्यक्त करना मुश्किल होता है। हाल ही में मध्य प्रदेश के झाबुआ में भी एक बेहद दर्दनाक घटना सामने आई जहां साढ़े तीन साल की एक मासूम बच्ची बाजार से अचानक लापता हो गई। सीसीटीवी फुटेज में वह एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति और एक महिला के साथ दिखाई दी। पुलिस मामले की जांच कर रही है लेकिन यह घटना बताती है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए कितनी सतर्कता आवश्यक है। आजकल सोशल मीडिया और इंटरनेट पर ऐसे कई वीडियो सामने आ रहे हैं जिनमें बच्चों को अगवा करने वाले गिरोहों की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिलती है। हालांकि हर वीडियो सही नहीं होता लेकिन कई मामलों में यह सच भी साबित हुआ है कि बच्चों को चोरी करने वाले गिरोह सािढय हैं। ऐसे गिरोह बच्चों को निशाना बनाकर उन्हें अगवा कर लेते हैं और फिर उन्हें दूसरे राज्यों में ले जाकर बेचने या अवैध कामों में इस्तेमाल करने की कोशिश करते हैं। यह केवल कानून का नहीं बल्कि मानवता का भी बड़ा अपराध है। इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए पुलिस और प्रशासन को और अधिक सख्ती से काम करना होगा। लापता बच्चों के मामलों में तुरंत कार्रवाई होना जरूरी है। हर जिले में विशेष टीम बनाई जानी चाहिए जो ऐसे मामलों की जांच करे। सीसीटीवी कैमरों का नेटवर्क मजबूत किया जाए और बस स्टैंड रेलवे स्टेशन बाजार और भीड़भाड़ वाले स्थानों पर विशेष निगरानी रखी जाए। इसके साथ ही पुलिस को बच्चों को चुराने वाले गिरोहों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाना चाहिए। जब तक पुलिस ऐसे गिरोहों को पकड़कर जेल में नहीं डालेगी तब तक यह सिलसिला पूरी तरह खत्म नहीं होगा। अपराधियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए ताकि समाज में एक मजबूत संदेश जाए कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी हालत में बख्शा नहीं जाएगा।
इसके साथ ही पुलिस को दूसरे राज्यों के साथ समन्वय बनाकर भी काम करना चाहिए क्योंकि कई मामलों में बच्चों को एक राज्य से दूसरे राज्य में ले जाया जाता है। सिर्फ प्रशासन ही नहीं बल्कि समाज की भी बड़ी जिम्मेदारी है। माता पिता को अपने बच्चों पर ध्यान देना चाहिए और उन्हें अजनबियों से सावधान रहने की शिक्षा देनी चाहिए। स्कूलों में भी बच्चों को सुरक्षा के बारे में जागरूक किया जाना चाहिए। यदि किसी को कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत पुलिस को सूचना देना चाहिए। समाज की जागरूकता कई अपराधों को होने से पहले ही रोक सकती है। बच्चे किसी भी देश का भविष्य होते हैं।
-कांतिलाल मांडोत,
सूरत, गुजरात।