रिलायंस इंटेलिजेंस देश में एआई को बनाएगी किफायती: आकाश अंबानी
प्रकाशित: 20-06-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। रिलायंस जियो प्लेटफॉर्म्स के प्रबंध निदेशक आकाश अंबानी ने शुक्रवार को कहा कि जिस तरह जियो ने हर भारतीय के लिए इंटरनेट को काफी सस्ता और सुलभ बनाया, उसी तरह रिलायंस दशक के अंत तक कृत्रिम मेधा (एआई) की लागत में उल्लेखनीय कमी लाकर इसे प्रत्येक भारतीय के लिए सुलभ बनाएगी।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बै"क को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी भारत की जरूरतों के अनुरूप एआई विकसित कर रही है, भारत में ही इसका निर्माण कर रही है और ऐसा एआई तैयार कर रही है जो भविष्य में पूरी दुनिया के उपयोग में आ सके। उन्होंने बताया कि भारत में एआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंप्यूटिंग क्षमता की कमी और उसकी ऊंची लागत है, जिसे दूर करने के लिए रिलायंस इंटेलिजेंस गुजरात के जामनगर में भारत की स्वदेशी एआई अवसंरचना विकसित कर रही है। आकाश अंबानी ने कहा, जिस तरह जियो ने हर भारतीय के लिए डेटा को अत्यंत सस्ता और सुलभ बनाया, उसी तरह रिलायंस इंटेलिजेंस इस दशक के अंत तक एआई की अर्थव्यवस्था में बदलाव लाते हुए इसे हर भारतीय के लिए बेहद किफायती बनाएगी। अंबानी ने कहा कि जियो इसके लिए स्वदेशी निचली कक्षा वाले उपग्रहों का समूह विकसित करने की संभावना पर विचार कर रही है। फिलहाल उपग्रह संचार (सैटकॉम) क्षेत्र में एलन मस्क की स्टारलिंक और फ्रांसीसी सेवा प्रदाता यूटेलसैट जैसी विदेशी कंपनियों का वर्चस्व है। अब रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स भी इसमें पकड़ बनाना चाहती है। आकाश अंबानी ने कहा, जियो ने जमीन पर संचार सेवाओं के जरिए भारत को जोड़ा है, अब हमें आसमान से देश को जोड़ना होगा। अभी भी दूरदराज के कई गांव, द्वीप क्षेत्र और सीमावर्ती चौकियां हैं, जहां जियो नेटवर्क नहीं पहुंच पाता। उनके लिए उपग्रह संपर्क पूरे देश से जुड़ने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि जियो एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत कंपनी अपनी दीर्घकालिक स्वदेशी क्षमता विकसित करने के साथ वैश्विक उपग्रह नेटवर्क प्रदाताओं के साथ साझेदारी कर उनकी क्षमता पट्टे पर लेकर सेवाओं की उपलब्धता तेज करेगी। उन्होंने कहा, यह दृष्टिकोण हमें देश की कनेक्टिविटी जरूरतों को तेजी से पूरा करने में सक्षम बनाएगा और वैश्विक स्तर के भारतीय उपग्रह ब्रॉडबैंड मंच की नींव रखेगा। अंबानी ने कहा कि जियो भारत में अपने जमीनी स्टेशन अवसंरचना का भी निर्माण कर रही है, जो साझेदार उपग्रह नेटवर्क और भविष्य के स्वदेशी उपग्रहों दोनों को समर्थन देगा। इससे अंतरिक्ष से जमीन तक एक पूर्ण उपग्रह ब्रॉडबैंड परिवेश विकसित होगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल से अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और देश वैश्विक उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं के मानचित्र पर मजबूत स्थिति हासिल करेगा।
रिलायंस इंडस्ट्रीज की 49वीं वार्षिक आम बै"क को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि कंपनी भारत की जरूरतों के अनुरूप एआई विकसित कर रही है, भारत में ही इसका निर्माण कर रही है और ऐसा एआई तैयार कर रही है जो भविष्य में पूरी दुनिया के उपयोग में आ सके। उन्होंने बताया कि भारत में एआई के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंप्यूटिंग क्षमता की कमी और उसकी ऊंची लागत है, जिसे दूर करने के लिए रिलायंस इंटेलिजेंस गुजरात के जामनगर में भारत की स्वदेशी एआई अवसंरचना विकसित कर रही है। आकाश अंबानी ने कहा, जिस तरह जियो ने हर भारतीय के लिए डेटा को अत्यंत सस्ता और सुलभ बनाया, उसी तरह रिलायंस इंटेलिजेंस इस दशक के अंत तक एआई की अर्थव्यवस्था में बदलाव लाते हुए इसे हर भारतीय के लिए बेहद किफायती बनाएगी। अंबानी ने कहा कि जियो इसके लिए स्वदेशी निचली कक्षा वाले उपग्रहों का समूह विकसित करने की संभावना पर विचार कर रही है। फिलहाल उपग्रह संचार (सैटकॉम) क्षेत्र में एलन मस्क की स्टारलिंक और फ्रांसीसी सेवा प्रदाता यूटेलसैट जैसी विदेशी कंपनियों का वर्चस्व है। अब रिलायंस की जियो प्लेटफॉर्म्स भी इसमें पकड़ बनाना चाहती है। आकाश अंबानी ने कहा, जियो ने जमीन पर संचार सेवाओं के जरिए भारत को जोड़ा है, अब हमें आसमान से देश को जोड़ना होगा। अभी भी दूरदराज के कई गांव, द्वीप क्षेत्र और सीमावर्ती चौकियां हैं, जहां जियो नेटवर्क नहीं पहुंच पाता। उनके लिए उपग्रह संपर्क पूरे देश से जुड़ने का माध्यम बनेगी। उन्होंने बताया कि जियो एक दोहरी रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत कंपनी अपनी दीर्घकालिक स्वदेशी क्षमता विकसित करने के साथ वैश्विक उपग्रह नेटवर्क प्रदाताओं के साथ साझेदारी कर उनकी क्षमता पट्टे पर लेकर सेवाओं की उपलब्धता तेज करेगी। उन्होंने कहा, यह दृष्टिकोण हमें देश की कनेक्टिविटी जरूरतों को तेजी से पूरा करने में सक्षम बनाएगा और वैश्विक स्तर के भारतीय उपग्रह ब्रॉडबैंड मंच की नींव रखेगा। अंबानी ने कहा कि जियो भारत में अपने जमीनी स्टेशन अवसंरचना का भी निर्माण कर रही है, जो साझेदार उपग्रह नेटवर्क और भविष्य के स्वदेशी उपग्रहों दोनों को समर्थन देगा। इससे अंतरिक्ष से जमीन तक एक पूर्ण उपग्रह ब्रॉडबैंड परिवेश विकसित होगा।
उन्होंने कहा कि इस पहल से अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा और देश वैश्विक उपग्रह ब्रॉडबैंड सेवाओं के मानचित्र पर मजबूत स्थिति हासिल करेगा।