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केजरीवाल ने खुद को ‘शहंशाह-ए-आलम' और जनता को ‘दास' माना: रेखा गुप्ता

प्रकाशित: 26-03-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
केजरीवाल ने खुद को ‘शहंशाह-ए-आलम' और जनता को ‘दास' माना:  रेखा गुप्ता
वीर अर्जुन संवाददाता
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने बुधवार को विधानसभा में पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास (शीश महल) के निर्माण में बरती गई गंभीर वित्तीय अनियमितताओं का कच्चा चिट्ठा पेश किया। मुख्यमंत्री ने तीखा प्रहार करते हुए कहा कि दिल्ली में ‘शीश महल' बनाने वाले अब पंजाब में ‘शीश महल-2' में जाकर बस गए हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं को ‘शहंशाह-ए-आलम' समझते थे और दिल्ली की जनता को दास। मुख्यमंत्री के आग्रह पर सदन ने सीएजी की इस रिपोर्ट को विस्तृत जांच के लिए लोक लेखा समिति (पीएसी) के पास भेज दिया है।
सीएजी रिपोर्ट पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता भावुक और हमलावर नजर आईं। उन्होंने कहा कि आज सदन ने उस दर्द को पुन महसूस किया है, जो पिछली सरकार ने दिल्ली की जनता को दिया। उन्होंने शेर भी पढ़ा कि ‘वह ज़हर देता तो सबकी निगाह में आ जाता, उसने यूं किया कि दवा देना बंद कर दिया।' मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि यह चर्चा केवल ईंट-पत्थरों, फर्नीचर या इंटीरियर की नहीं है, बल्कि उस ‘सुनियोजित धोखे' को बेनकाब करने की है जिसे केजरीवाल ने वर्षों तक छिपाए रखा। यह रिपोर्ट उस नैतिक पतन का प्रमाण है, जहां ‘आम आदमी' का नारा देने वाले ने खुद को राजा और जनता को अपना सेवक समझ लिया। उनका आचरण ऐसा था कि जनता वही देखेगी जो वह दिखाएंगे और वही सुनेगी जो वह कहेंगे।
मुख्यमंत्री ने केजरीवाल की पुरानी सादगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वर्गीय शीला दीक्षित के घर के 10 एसी पर टिप्पणी करने वाले केजरीवाल ने खुद के लिए 50 एसी और 70 पंखे वाला महल खड़ा किया था। उन्होंने पूछा कि यह कौन-सी सादगी थी जिसमें गाड़ी, बंगला और कुर्सी न लेने की कसमें खाई गई थीं, लेकिन पर्दे के पीछे सब कुछ हासिल किया गया?
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि जब कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली के हजारों लोग अपनी जान गंवा रहे थे, तब मुख्यमंत्री अपने लिए महल बनवा रहे थे। उस महल में खाना ऊपर ले जाने के लिए लाखों की लिफ्ट, महंगे फ्रिज और विदेशी कॉफी मशीन लगवाई जा रही थी। इस ‘शीश महल' के लिए छह-छह निजी कंसल्टेंट रखे गए। कोई फर्नीचर, कोई लैंडस्केप तो कोई इंटीरियर के लिए। जो टेंडर शुरुआती दौर में मात्र 8 करोड़ रुपये का था, वह अंतत 62 करोड़ रुपये तक कैसे पहुंच गया, यह जांच का विषय है।
मुख्यमंत्री ने सदन में आंकड़ों की सूची पेश करते हुए बताया कि विलासिता का यह खेल केवल केजरीवाल तक सीमित नहीं था। उनके सहयोगियों ने भी जनता के पैसे का जमकर दुरुपयोग किया। उन्होंने कहा कि मनीष सिसोदिया ने जनता के पैसों से अपने आवास पर 7.5 करोड़ रुपये खर्च किए।
वहीं, राखी बिड़लान के निवास की मरम्मत के नाम पर 2.33 करोड़ रुपये खर्च किए गए, पूर्व स्पीकर रामनिवास गोयल द्वारा 3.23 करोड़ रुपये खर्च किए गए। पूर्व मंत्री गोपाल राय ने 2.55 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि सत्येंद्र जैन ने 2 करोड़ रुपये, इमरान हुसैन व राजेंद्र पाल गौतम ने अपने आवास को चमकाने के लिए 3-3 करोड़ रुपये खर्च किए। इसके अलावा सौरभ भारद्वाज ने अपने आवास सुधार पर जनता के पैसों से 1 करोड़ रुपये खर्च किए।
नियमों को कुचला गया
मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दिल्ली को नए फ्लाईओवर, सड़कों और बुनियादी ढांचे की जरूरत थी, तब सरकार ‘वर्ल्ड क्लास' इंटीरियर डेकोरेशन करवा रही थी। सादगी केवल एक नारा था, जबकि अंदाज पूरी तरह शाही था। राजनीति बदलने का दावा करने वालों ने केवल अपना घर बदला। उस महल में कभी जनसुनवाई नहीं हुई और आम जनता का प्रवेश वर्जित था। पूर्व मुख्यमंत्री स्वयं को ‘शहंशाह-ए-आलम' समझते थे और दिल्ली की जनता को दास।
मुख्यमंत्री के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री ने नियमों को केवल तोड़ा-मरोड़ा नहीं, बल्कि पूरी तरह कुचल दिया। उन्होंने अंत में विश्वास दिलाया कि वर्तमान सरकार दिल्ली की जनता के पैसे का एक-एक पैसा विकास कार्यों में लगाएगी। उन्होंने इस रिपोर्ट के आधार पर दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की और मामले को लोक लेखा समिति (पीएसी) को सौंपने का प्रस्ताव रखा, जिसे सदन ने सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया।