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दिल्ली विधानसभा का तीन दिवसीय बजट सत्र आज से

प्रकाशित: 23-03-2026 | लेखक: कृष्ण देव पाठक
दिल्ली विधानसभा का तीन दिवसीय बजट सत्र आज से
कृष्ण देव पाठक
नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा के 23 मार्च से शुरू हो रहे तीन दिवसीय बजट सत्र के हंगामेदार रहने के पूरे आसार हैं हालांकि पिछले 1 वर्ष में आम आदमी पार्टी शासित विपक्ष विधानसभा में अपनी प्रभावी मौजूदगी दर्ज नहीं कर पाया उल्टा वह विधानसभा सचिवालय और सत्ता पक्ष के निशाने पर रहे जिसके चलते उनकी भूमिका रक्षात्मक रही है विपक्ष की नेता आतिश द्वारा पिछले सत्र में की कथित टिप्पणी का मामला अभी भी जारी है इसलिए सदन में स्थिति सामान्य नहीं रहेगी बजट सत्र से पहले विपक्ष की नेता आतिश ने कहा यदि उनके विधायकों का निलंबन रद्द नहीं हुआ तो वह बजट सत्र का बहिष्कार करेंगे क्योंकि भारतीय जनता पार्टी घबराई हुई है और वह डरने की कोशिश कर रही है लेकिन हम डरने वाले नहीं है हालांकि जहां तक विपक्ष का प्रश्न है उसके पास उठाने के लिए तो काफी मुद्दे हैं लेकिन उनका वह उपयोग कितना कर पाएगा यह सत्र के तीन दिन ही बता पाएंगे यदि सदन का बहिष्कार ही कर दिया तब बिना विपक्ष के सदन ने एकदम सामान्य हो जाएगा ।
जहां तक बजट सत्र की बात है तो वह बैठकों के हिसाब से काफी छोटा रखा गया है और सब कुछ तीन दिन के अंदर ही संपन्न करना होगा हालांकि इससे पहले जब 1993 में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली मदनलाल खुराना सरकार थी उसे समय बजट सत्र बहुत लंबा होता था और तमाम मुद्दों पर खुलकर चर्चा होती थी लेकिन उसके बाद वह परंपरा किसी भी पार्टी ने बरकरार नहीं रखी और सत्र छोटा होता चला गया जिसे लेकर जो भी पार्टी विपक्ष में होती है विरोध करती रही है लेकिन जब वह सत्ता पक्ष में होती है तो इस बात को भूल जाती है और कुल मिलाकर यह मुद्दा राजनीति में ही निपट कर रह जाता है ।
विधानसभा सत्र में विपक्ष के लोग पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को आबकारी मामले में निचली अदालत द्वारा क्लीन चिट दिए जाने के मामले को उठा सकते हैं जिसके जवाब में सत्ता पक्ष द्वारा हाई कोर्ट द्वारा उसे फैसले पर रोक लगाने का जवाब दिया जा सकता है सदन में रसोई गैस को लेकर दिल्ली में चल रही कालाबाजारी को भी विपक्ष बड़ा मुद्दा बन सकता है आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि दिल्ली में जो रसोई गैस की कीमत है वह किसी से छिपी नहीं हुई है और सरकार इस मामले में पूरी तरह असफल है दिल्ली में रहने वाले आम आदमी का बजट रसोई गैस की कमी ने बिगाड़ कर रख दिया है जिसके चलते गरीब और मध्यम वर्ग को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है महंगाई की मार स्ट्रीट वेंडर से लेकर छोटे-बड़े सभी दुकानदारों और व्यापार पर पड़ी है जिसके चलते सबने अपने सामानों में वृद्धि की है और उसका खामियां जाए गरीब और मध्यम वर्ग को भुगतना पड़ रहा है। ईरान और अमेरिका युद्ध को लेकर जहां विपक्ष के सदस्य उससे बने हालातो में केंद्र सरकार द्वारा सही आकलन न करने की आरोप लगा सकता है वही सत्ता पक्ष के लोग उत्तम नगर में तरुण हत्याकांड का मामला उठाकर इस विषय को दूसरी तरफ मोड़ सकते हैं और विपक्ष को उलझने की कोशिश करेंगे।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के लिए भी इस बार का बजट सत्र चुनौती पूर्ण है क्योंकि यह उनका दूसरा बजट है और इस बार उनकी सरकार को गठित हुए 1 वर्ष पूरा हो चुका है लेकिन उनके पास भी कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है विपक्ष के लोग यह कह रहे हैं की बिजली पानी फ्री डीसी की बसों में महिलाओं की यात्रा फ्री हमारी योजना ही उन्होंने जारी रखी हैं मोहल्ला क्लीनिक का नाम आरोग्य मंदिर किया गया है दुर्घटना के समय की फरिश्ता योजना का नाम बदल दिया गया है और तमाम वही योजनाएं हैं जिनके नाम बदलकर वह अपनी बता रहे हैं लेकिन जनता को सब पता है।
एक महिला मुख्यमंत्री होने के नाते रेखा गुप्ता के लिए एक बड़ी परेशानी यह भी है की चुनाव के समय प्रत्येक महिला को हर महीने ?2500 देने का वादा सरकार अभी तक पूरा नहीं कर पाई है और जिसको लेकर जवाब देना उन्हें भारी पड़ रहा है क्योंकि भाजपा शासित अन्य राज्यों में इस तरह की योजना लागू है उनमें दिल्ली से लगा हरियाणा भी अपने में एक है इसलिए उन्हें महिलाओं को ध्यान में रखते हुए भी बजट में कुछ ना कुछ प्रावधान करना होगा
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हालांकि बजट सत्र से पहले इस मामले में सभी वर्गों की भावनाएं जानी है लेकिन उसका ािढयान्वन कितना होगा यह बजट ही निर्धारित करेगा हालांकि इस तरह की कसरत पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी करते थे इसके बाद वह कहा करते थे कि उनका बजट जनता का बजट होता है और वह उससे पूछ कर बनाते हैं और रेखा गुप्ता भी वही कर रही हैं यह एक अच्छी बात है लेकिन बजट आने के बाद ही सारी चीज तय होगी।