धर्मेंद्र प्रधान के बाद प्रह्लाद जोशी, शिक्षा सुधार की बड़ी चुनौती
प्रकाशित: 27-07-2026 | लेखक: आदित्य नरेंद्र
शनिवार को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के कुछ घंटों बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। जोशी पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे हैं। अब शिक्षा मंत्रालय भी उनके जिम्मे है।
धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दिया। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) और अन्य छात्र संगठनों के हफ्तों चले आंदोलन के बाद यह फैसला हुआ। जंतर-मंतर पर केंद्रित प्रदर्शन का मुख्य कारण नीट-यूजी सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक और अनियमितताएं थीं। प्रदर्शनकारियों ने जवाबदेही, मंत्री का इस्तीफा, प्रभावित परिवारों को मुआवजा और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की थी। बातचीत के बाद सीजेपी ने आंदोलन वापस ले लिया।
प्रह्लाद जोशी को अब एक संकटग्रस्त मंत्रालय मिला है। बार-बार हो रहे पेपर लीक ने लाखों अभ्यर्थियों का विश्वास तोड़ा है। सालों की मेहनत और पैसे खर्च करने वाले छात्र मेडिकल व इंजीनियरिंग जैसी परीक्षाओं में अनिश्चितता का शिकार हो रहे हैं। समस्या सिर्फ एक-दो परीक्षाओं तक सीमित नहीं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) की व्यवस्था, प्रश्न पत्र सुरक्षा और निगरानी तंत्र की कमजोरियां साफ दिख रही हैं।
शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार और भी कठिन है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 का क्रियान्वयन कई क्षेत्रों में अधूरा है। पाठ्यक्रम सुधार, शिक्षक प्रशिक्षण, बहु-विषयक शिक्षा और योग्यता आधारित मूल्यांकन अभी भी धीमी गति से चल रहे हैं। ग्रामीण-शहरी अंतर, डिजिटल सुविधाओं की कमी, प्रशिक्षित शिक्षकों का अभाव और कोचिंग की महंगाई आज भी बड़ी बाधाएं हैं।
प्रह्लाद जोशी कर्नाटक के धारवाड़ से पांच बार सांसद रह चुके हैं। संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय में उन्होंने अनुभव हासिल किया है। अब कई मंत्रालयों के साथ शिक्षा संभालना उनके लिए बड़ी परीक्षा है। तुरंत प्राथमिकताएं साफ हैं। एनटीए को मजबूत करना, परीक्षाओं को सुरक्षित और तकनीक आधारित बनाना, जनता का विश्वास बहाल करना और एनईपी के सुधारों को जमीन पर उतारना जरूरी है।
सिर्फ मंत्री बदलने से काम नहीं चलेगा। पिछले मामलों की पारदर्शी जांच, सख्त जवाबदेही और ठोस सुधार के बिना विश्वास नहीं लौटेगा। सरकार ने नीट को कंप्यूटर आधारित बनाने का संकेत दिया है, लेकिन व्यापक बदलाव के लिए मजबूत इच्छाशक्ति चाहिए।
प्रह्लाद जोशी के सामने अब असली परीक्षा है। परीक्षा प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करना और शिक्षा व्यवस्था में वास्तविक सुधार लाना। छात्रों और अभिभावकों की उम्मीदें ऊंची हैं। अब देखना यह है कि नई जिम्मेदारी कितना बदलाव ला पाती है।
-आदित्य नरेन्द्र