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पहले पहल तो कीजिए

प्रकाशित: 22-07-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
पहले पहल तो कीजिए
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) संसदीय दल की बैठक के दौरान सांसदों से कहा कि नीट परीक्षा में पेपर लीक मामले में कठोर कार्रवाई की गई ताकि कोई भी युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ न कर सके। यह बैठक नीट परीक्षा में अनियमितताओं के विरोध में सोमवार को काकरोच जनता पाटी के नेतृत्व में संसद मार्च और शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के त्यागपत्र की मांग के एक दिन बाद संपन्न हुई। यह सच है कि प्रधानमंत्री द्वारा बैठक के दौरान 13 आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई तथा तत्काल परीक्षा करवाकर रिजल्ट भी घोषित करने का उल्लेख किया गया किन्तु साथ ही यह भी कहा कि युवाओं के भविष्य से कोई खिलवाड़ न कर सके, इसके लिए सभी राज्य सरकारें और केन्द्र सरकार को दलगत भावना से ऊपर उठकर, मिलकर काम करना चाहिए। प्रधानमंत्री मोदी ने राजग के संसद सदस्यों को यह बात समझाई कि पेपर लीक का मामला राजनीति का नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित का विषय है। मतलब यह कि प्रधानमंत्री यह बात मानते हैं कि पेपर लीक जैसे जघन्य अपराध को रोकने के लिए मजबूत एवं त्रुटिरहित व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है।
असल में प्रधानमंत्री ने राजग संसदीय दल के सदस्यों से जो कुछ भी कहा वही बात देश के बुद्धिजीवी और सभी दलों के राजनेता एवं सांसद भी चाहते हैं, लेकिन दो सवाल उठते हैं। पहला यह कि प्रधानमंत्री को युवाओं के प्रति पेपर लीक में शामिल अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई का उल्लेख करने में दो महीने क्यों लग गए? और दूसरा यह कि मजबूत एवं त्रुटिरहित व्यवस्था बनाने से सरकार को रोका किसने है? जिस वक्त पेपर लीक हुआ तभी प्रधानमंत्री को इस पूरे मामले पर व्यापक स्पष्टीकरण देना चाहिए था। ऐसा करने पर जितने भी स्वाथी और खुराफाती तत्व हैं, सभी के मस्तिष्क में भय उत्पन्न होता और युवाओं को इस बात का एहसास होता कि उनकी सरकार उनके साथ है। जहां तक मजबूत एवं त्रुटिरहित व्यवस्था की बात है तो यह कार्य सरकार के अलावा न तो आम जनता कर सकती है और न ही विपक्षी पार्टियां। यह कार्य सरकार को पहले ही करना चाहिए था। आखिर नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) का गठन जिन उद्देश्यों के लिए किया गया था क्या उसे प्राप्त करने में वह सफल हुई। इसकी समीक्षा करने का काम तो सरकार का ही है। अपने गठन के बाद से ही तमाम असफलताओं के बावजूद एनटीए की कार्यशैली में कोई बदलाव न कर पाना, सरकार की ही तो असफलता है। शिक्षा के क्षेत्र में बजट कम करके सरकार ने पहले ही यह संदेश दे दिया था कि अब राजस्व संग्रह एवं उसको खर्च करने की स्कीमें विश्वविद्यालय खुद बनाएं किन्तु नेशनल टेस्टिंग एजेंसी की कार्य विधि की भी समीक्षा के प्रति उदासीनता दिखाना, स्पष्ट रूप से इस नेशनल टेस्टिंग एजेंसी को खुली छूट देना है। एनटीए की स्वायत्तता एवं उसकी कार्यशैली में सुधार की प्रक्रिया सुनिश्चित करने का दायित्व एनटीए का ही है। दुर्भाग्य तो यह है कि इस एजेंसी ने दायित्वों के क्षेत्र विस्तार पर तो ध्यान दिया किन्तु कार्यशैली में सुदृढ़ता पर उतना ध्यान नहीं दिया जितना कि देना चाहिए था।
प्रधानमंत्री मोदी ने राजग सांसदों से अपनी जिन भावनाओं को व्यक्त किया उन पर कदाचित किसी सदस्य ने संदेह नहीं किया होगा। देश को उनकी नीयत पर बिल्कुल भरोसा है किन्तु पेपर लीक की घटनाओं को गंभीरता से लेकर यदि एनटीए को सुदृढ़ एवं त्रुटिरहित बनाने का प्रयास पहले ही कर लिया गया होता तो शायद आज ऐसी स्थिति उत्पन्न होती ही नहीं कि परीक्षा देने के बाद परीक्षाथी परीक्षाफल घोषित होने की उम्मीद ही छोड़ दे। आप सरकार चला रहे हैं तो पहले एनटीए के कील कांटे फिट कीजिए और पेपरलीक की दुकान चलाने वालों के धंधे खत्म कीजिए फिर राज्य सरकारें और विपक्षी पार्टियां भी सहयोग करेंगी। लेकिन पहल तो सरकार को ही करनी पड़ेगी। विपक्ष शासित सरकारें भी इस प्रवृत्ति के खिलाफ केन्द्र का साथ देने से इनकार नहीं करेंगी क्योंकि अब इस पेपर लीक की पुनरावृत्ति से सभी आहत हैं।