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पाक सेना की क्रूरता

प्रकाशित: 15-07-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
पाक सेना की क्रूरता
पाकिस्तान भारतीय जम्मू-कश्मीर को अपना हिस्सा बनाने का अपने लोगों में जुनून पैदा करता है और भारत के निर्देष पर्यटकों, सुरक्षाबलों और नागरिकों को निशाना बनाता है जबकि अपने कब्जे वाले गुलाम कश्मीर यानि पीओके में आए दिन निर्देष नागरिकों की जानें ले रहा है। मंगलवार को सुबह ही पाक सेना ने पीओके के रावलकोट के मटियाल मीरा बस टर्मिनल क्षेत्र में अनायास ही गोली चलाकर सेना ने 6 नागरिकों को मार डाला। प्राय सैन्य तानाशाही नागरिकों को वदी का भय दिखाने के लिए ऐसे क्रूर कारनामें करती रहती हैं। लोकतांत्रिक देशों में सेना सरकार के प्रति उत्तरदायी होती है किन्तु जिन देशों की सरकारें सेना के निर्देशन में काम करती है वहां का स्थानीय प्रशासन सेना की इच्छा एवं उनकी नीतियों के अनुसार चलता है। हैरानी की बात तो यह है कि दुनिया में अकेला पाकिस्तान देश ही ऐसा है जिसने गुलाम जम्मू-कश्मीर के 40 लाख लोगों को भूखों मारने के लिए बाहर से खाद्य सामग्री की आपूर्ति पर प्रतिबंध लगा दिया जबकि बिजली काटकर अपने ही नागरिकों को अंधकार में रहने के लिए मजबूर कर दिया। पाकिस्तान सरकार और सेना गुलाम कश्मीर के नागरिकों को अपना दुश्मन मानने लगी है। डींगे तो ऐसा मारती है कि पीओके का क्षेत्र आजाद है किन्तु सच यह है कि अलगाववादी आंदोलनों और प्रदर्शनों से घबराकर सेना ने इस क्षेत्र की जनता पर जुल्म ढाना शुरू कर दिया है। वैसे तो यह क्रम पिछले एक दशक से चल रहा है किन्तु जब भारतीय जम्मू-कश्मीर में प्रगति और विकास ने गति पकड़ी तथा पीओके में आम सुविधाओं का टोटा दिखने लगा तो पीओके के जो लोग अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा या अन्य देशों में बसे हैं उन्होंने स्थानीय नेताओं की आंखें खोलने का प्रयास किया। उनका प्रयास सफल हुआ और पीओके के हर वर्ग में चेतना का संचार हुआ कि आखिर नवम्बर 1947 में तो उनको जबर्दस्ती गुलाम बनाया गया। वे पाकिस्तान का हिस्सा बनकर आखिर क्यों रहें। धीरे-धीरे पीओके के सभी वर्गें को इस बात का एहसास हुआ कि उनका भविष्य तो भारत के साथ ही सुरक्षित है। पीओके में क्रान्ति की चेतना लाने के लिए विदेशों में जो भी संगठन सक्रिय हैं, उन्होंने पाक सेना के विद्रोह में पूरी ताकत लगा दी है। परिणामस्वरूप पाकिस्तान की सशस्त्र पुलिस के सैकड़ों जवान मारे जा चुके हैं और पाक सेना अब पीओके की आम जनता के प्रतिरोध का सामना करने से कतराने लगी है। जिस तरह मंगलवार को सुबह ही 6 लोगों को पाक सेना ने भून दिया इसी तरह आए दिन पीओके के लोगों को निशाना बना देती हैं किन्तु जैसे ही पीओके के लोग उग्र प्रदर्शन करते हैं और सुरक्षाबलों एवं पुलिस को निशाना बनाते हैं तो पाकिस्तान उनका राशन-पानी, पेट्रोल, बिजली इत्यादि सब कुछ बंद कर देती है। पिछले तीन महीनों से पीओके की जनता खून के आंसू से अपनी तकदीर लिखने का प्रयास कर रही है। प्रवासी पीओके के संगठनों ने सोमवार को ही व्हाइट हाउस के सामने प्रदर्शन किया और पाकिस्तान सेना के अमानवीय व्यवहार के खिलाफ नारे लगाए। अच्छा संकेत यह भी है कि अब भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता पाक सेना और सरकार द्वारा पीओके में किए जा रहे उनके अमानवीय कृत्य की निन्दा करते हैं, जबकि संयुक्त राष्ट्र में भारतीय स्थाई प्रतिनिधि वैश्विक स्तर पर इस क्रूरता के लिए पाक सेना व सरकार की निन्दा करते हैं और पाकिस्तान के वास्तविक चरित्र एवं चेहरे की पोलपट्टी खोलते हैं। भारतीय स्थाई प्रतिनिधि ने अभी हाल ही में पाकिस्तान के स्थाई प्रतिनिधि पर तंज करते हुए पूछा था कि भारतीय अधिनियम की शर्तें के अनुसार भारत के हिस्से वाले जम्मू-कश्मीर पर नाटकीय आंसू बहाने वालों को अवैध रूप से कब्जाए पीओके के नागरिकों के आंसू क्यों नहीं दिखते। लब्बोलुआब यह है कि पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने का जो हथकंडा अपनाया था, लग रहा है उसी का परिणाम अब उसे अपने कब्जाए पीओके में मिलना शुरू हो गया है।
भारत के जम्मू-कश्मीर में गड़बड़ फैलाकर जनमत संग्रह की मांग करने वाली पाक सरकार और सेना क्या अब पीओके में जनमत संग्रह कराने पर सहमत होगी?
भारत के जम्मू-कश्मीर में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा देकर और अलगाववादियों को संगठित व वित्तपोषित करके जो इसे हथियाने का सपना देख रहे थे, उन्हीं के सामने पीओके में नारे लग रहे हैं कि वे भारत के साथ रहना चाहते हैं, वे पाकिस्तान के साथ नहीं रहना चाहते।