युद्ध के आसार
प्रकाशित: 04-05-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
मध्य एशिया सुलग रहा है और कभी भी युद्ध की आग भड़क सकती है। एक तरफ जहां अमेरिका ने 9 अरब के डिपेंस सिस्टम एवं मारक बारूदी हथियार और मिसाइल सहित अपने लड़ावू जवानों की तैनाती की है वहीं ईंरान ने आंख दिखाते हुए अमेरिका से रविवार को पूछा कि वह स्पष्ट रूप से बताए कि उसे युद्ध चाहिए या शान्ति। ईंरान यह भी धमकी दे रहा है कि यदि अमेरिका उसके पुलों और ऊर्जा वेंद्रों को तबाह करने की सोच रहा है या योजना बना रहा है तो वह अपने उन सैन्य ठिकानों को बचा नहीं पाएगा जो गल्फ देशों में मौजूद हैं। ईंरान की यह धमकी अमेरिका द्वारा 9 अरब डालर के सैन्य संसाधन आपूर्ति के पैसले के तुरन्त बाद आईं है।
असल में अमेरिका, इजरायल और ईंरान तीनों को अभी भी युद्ध का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है। न तो ईंरान पूरी तरह पस्त हुआ है और न तो उसकी यूरेनियम नष्ट हो पाईं है। इसी तरह ईंरान वषरे से अरमान पाले बैठा था कि वह इजरायल को खत्म करके वहां हमास का झण्डा फहरा देगा तथा खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह मिसाइलों से तबाह कर देगा। अमेरिका ने सोच रखा था कि वह ईंरान के शीर्ष नेतृत्व को मार कर पूरे देश को अंधी गली बना देगा और ईंरानी गृहयुद्ध में एकदूसरे को मारकर इस देश को नर्क बना देंगे। किन्तु यह भी नहीं हो पाया।
अब तीनों देश अपने-अपने अपूर्ण लक्ष्य को लेकर फिर एक बार वुछ बड़ा करने की रणनीति में व्यस्त हैं।
सच तो यह है कि ईंरान ने अमेरिका के खाड़ी देशों में स्थित सैन्य ठिकानों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि उसने खाड़ी देशों के उस भरोसे को भी तोड़ दिया जो उनकी रक्षा के लिए हमेशा अमेरिका की तरफ से मिलता रहता था। पिछले 45 वषरे से खाड़ी के देश इसी उम्मीद और विश्वास के साथ निश्चिंत थे कि अमेरिका उनकी रक्षा ईंरान की मिसाइलों और ड्रोन से जरूर करेगा किन्तु अमेरिका उनकी रक्षा करने में असफल रहा है। इसी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति और पेण्टागन इतने भन्नाए हैं कि उन्होंने नौ अरब डालर के सैन्य संसाधन भेजने के पहले संसदीय समिति से अनुमति भी नहीं ली। ईंरान को अमेरिका से इसीलिए पूछना पड़ा कि वह शान्ति चाहता है या युद्ध।
युद्ध में नुकसान तो सभी को होता है किन्तु विनाश किसी एक का होना तय है। यह युद्ध ईंरान के अस्तित्व के विरुद्ध है जबकि अमेरिका अपनी दादागिरी को कायम रखने के लिए इस युद्ध में वूद गया। अमेरिका की यहूदी कम्यूनिटी अब राष्ट्रपति ट्रंप को चुप बैठने भी नहीं देगी। इसलिए भले ही अमेरिका ईंरान को कोईं जवाब न दे किन्तु लगता यही है कि जल्दी ही युद्ध एक बार फिर भड़क सकता है। इस बार इस युद्ध का क्षेत्र विस्तार होना भी तय है। 28 फरवरी से पहले होर्मूज समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट नहीं थी किन्तु ईंरान ने जिस तरह इस व्यापारिक मार्ग को युद्ध का क्षेत्र बनाया और अमेरिका ने नाकेबन्दी कर दी वह तेहरान के लिए घातक साबित हो सकता है। हैरानी होती है कि ईंरान यह जानकर भी कि उसे रूस या चीन से रणनीतिक सहायता के अलावा वुछ भी मिलने वाला नहीं है।
चीन कभी भी टैक्टिकल सहायता देकर अमेरिका से दुश्मनी नहीं ले सकता जबकि रूस निन्दा से आगे बढ़ ही नहीं रहा है। इसके बावजूद इस्लामिक रिपब्लिकन गार्डस काप्र्स यदि आत्मदहन पर आमादा है तो उस देश पर युद्ध का संकट इतने जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। ईंरान में सरकार को वहां की इस्लामिक रिपब्लिकन सेना देती है। इसलिए भी वूटनीति से ज्यादा ईंरान में युद्ध की भाषा ज्यादा बोली और समझी जा रही है।
लापरवाही की आग
पूवी दिल्ली के विवेक विहार के एक भवन में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गईं तथा कईं घायल हैं। आग लगने का कारण एयर कण्डीशन या शार्ट सर्विट को बताया जा रहा है। इतना बड़ा हादसा एक छोटी सी लापरवाही का कारण है तो इसका मतलब यह हुआ कि आज भी हम अपनी जान को लेकर कितने गैर जिम्मेदार हैं।
असल में घर बनवाते समय या अतिरिक्त मीटर लगाते वक्त लोग नियमों एवं मानदण्डों का पालन नहीं करते। यही कारण है कि शार्ट सर्विट की संभावना बनी रहती है। यह कोईं नईं बात नहीं है कि बिजली कमी भी इस तरह की लापरवाही के प्रति सतर्व होकर कार्रवाईं करने से बचते हैं।
बिजली कर्मियों का पूरा ध्यान बिल वसूली पर ही रहता है। उनके पास या तो फील्ड में जाकर निरीक्षण करने वाले कर्मियों का अभाव है अथवा वे ग्राहकों से समझौते करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं।
लब्बोलुआब यह है कि अभी तो जांच चल ही रही है किन्तु इतना तो तय है कि नौ लोगों को जिन्दा जलाने वाली यह आग लोगों की लापरवाही का परिणाम है। ऐसी घटनाएं आए दिन होती हैं। कारण गिनाए जाते हैं, आव्रोश व्यक्त किए जाते हैं और फिर अगली घटना होने तक सब वुछ भुला दिया जाता है। कितनी हैरानी की बात है कि स्टेट अथॉरिटी भी इस तरह की लापरवाही पर नियंत्रण लगाने से बचती हैं कारण कि उपभोक्ता की नाराजगी से राजनीतिक पार्टियां बचना चाहती हैं और प्राइवेट बिजली कम्पनियों की प्राथमिकता आगजनी को रोकने की नहीं है बल्कि उनका पूरा ध्यान बिल वसूली के साथ-साथ बिजली चोरी को रोकना भी है।
इसीलिए लोगों को जागरुक होने की जरूरत है। वे किसी एजेंसी या प्राधिकरण पर निर्भर होने की बजाय खुद ही सतर्व रहें ताकि इस तरह भीषण आग लगने की संभावना ही न रहे।
असल में अमेरिका, इजरायल और ईंरान तीनों को अभी भी युद्ध का लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है। न तो ईंरान पूरी तरह पस्त हुआ है और न तो उसकी यूरेनियम नष्ट हो पाईं है। इसी तरह ईंरान वषरे से अरमान पाले बैठा था कि वह इजरायल को खत्म करके वहां हमास का झण्डा फहरा देगा तथा खाड़ी में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को पूरी तरह मिसाइलों से तबाह कर देगा। अमेरिका ने सोच रखा था कि वह ईंरान के शीर्ष नेतृत्व को मार कर पूरे देश को अंधी गली बना देगा और ईंरानी गृहयुद्ध में एकदूसरे को मारकर इस देश को नर्क बना देंगे। किन्तु यह भी नहीं हो पाया।
अब तीनों देश अपने-अपने अपूर्ण लक्ष्य को लेकर फिर एक बार वुछ बड़ा करने की रणनीति में व्यस्त हैं।
सच तो यह है कि ईंरान ने अमेरिका के खाड़ी देशों में स्थित सैन्य ठिकानों को ही निशाना नहीं बनाया, बल्कि उसने खाड़ी देशों के उस भरोसे को भी तोड़ दिया जो उनकी रक्षा के लिए हमेशा अमेरिका की तरफ से मिलता रहता था। पिछले 45 वषरे से खाड़ी के देश इसी उम्मीद और विश्वास के साथ निश्चिंत थे कि अमेरिका उनकी रक्षा ईंरान की मिसाइलों और ड्रोन से जरूर करेगा किन्तु अमेरिका उनकी रक्षा करने में असफल रहा है। इसी वजह से अमेरिकी राष्ट्रपति और पेण्टागन इतने भन्नाए हैं कि उन्होंने नौ अरब डालर के सैन्य संसाधन भेजने के पहले संसदीय समिति से अनुमति भी नहीं ली। ईंरान को अमेरिका से इसीलिए पूछना पड़ा कि वह शान्ति चाहता है या युद्ध।
युद्ध में नुकसान तो सभी को होता है किन्तु विनाश किसी एक का होना तय है। यह युद्ध ईंरान के अस्तित्व के विरुद्ध है जबकि अमेरिका अपनी दादागिरी को कायम रखने के लिए इस युद्ध में वूद गया। अमेरिका की यहूदी कम्यूनिटी अब राष्ट्रपति ट्रंप को चुप बैठने भी नहीं देगी। इसलिए भले ही अमेरिका ईंरान को कोईं जवाब न दे किन्तु लगता यही है कि जल्दी ही युद्ध एक बार फिर भड़क सकता है। इस बार इस युद्ध का क्षेत्र विस्तार होना भी तय है। 28 फरवरी से पहले होर्मूज समुद्री मार्ग पर किसी तरह की रुकावट नहीं थी किन्तु ईंरान ने जिस तरह इस व्यापारिक मार्ग को युद्ध का क्षेत्र बनाया और अमेरिका ने नाकेबन्दी कर दी वह तेहरान के लिए घातक साबित हो सकता है। हैरानी होती है कि ईंरान यह जानकर भी कि उसे रूस या चीन से रणनीतिक सहायता के अलावा वुछ भी मिलने वाला नहीं है।
चीन कभी भी टैक्टिकल सहायता देकर अमेरिका से दुश्मनी नहीं ले सकता जबकि रूस निन्दा से आगे बढ़ ही नहीं रहा है। इसके बावजूद इस्लामिक रिपब्लिकन गार्डस काप्र्स यदि आत्मदहन पर आमादा है तो उस देश पर युद्ध का संकट इतने जल्दी खत्म होने वाला नहीं है। ईंरान में सरकार को वहां की इस्लामिक रिपब्लिकन सेना देती है। इसलिए भी वूटनीति से ज्यादा ईंरान में युद्ध की भाषा ज्यादा बोली और समझी जा रही है।
लापरवाही की आग
पूवी दिल्ली के विवेक विहार के एक भवन में आग लगने से नौ लोगों की मौत हो गईं तथा कईं घायल हैं। आग लगने का कारण एयर कण्डीशन या शार्ट सर्विट को बताया जा रहा है। इतना बड़ा हादसा एक छोटी सी लापरवाही का कारण है तो इसका मतलब यह हुआ कि आज भी हम अपनी जान को लेकर कितने गैर जिम्मेदार हैं।
असल में घर बनवाते समय या अतिरिक्त मीटर लगाते वक्त लोग नियमों एवं मानदण्डों का पालन नहीं करते। यही कारण है कि शार्ट सर्विट की संभावना बनी रहती है। यह कोईं नईं बात नहीं है कि बिजली कमी भी इस तरह की लापरवाही के प्रति सतर्व होकर कार्रवाईं करने से बचते हैं।
बिजली कर्मियों का पूरा ध्यान बिल वसूली पर ही रहता है। उनके पास या तो फील्ड में जाकर निरीक्षण करने वाले कर्मियों का अभाव है अथवा वे ग्राहकों से समझौते करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर लेते हैं।
लब्बोलुआब यह है कि अभी तो जांच चल ही रही है किन्तु इतना तो तय है कि नौ लोगों को जिन्दा जलाने वाली यह आग लोगों की लापरवाही का परिणाम है। ऐसी घटनाएं आए दिन होती हैं। कारण गिनाए जाते हैं, आव्रोश व्यक्त किए जाते हैं और फिर अगली घटना होने तक सब वुछ भुला दिया जाता है। कितनी हैरानी की बात है कि स्टेट अथॉरिटी भी इस तरह की लापरवाही पर नियंत्रण लगाने से बचती हैं कारण कि उपभोक्ता की नाराजगी से राजनीतिक पार्टियां बचना चाहती हैं और प्राइवेट बिजली कम्पनियों की प्राथमिकता आगजनी को रोकने की नहीं है बल्कि उनका पूरा ध्यान बिल वसूली के साथ-साथ बिजली चोरी को रोकना भी है।
इसीलिए लोगों को जागरुक होने की जरूरत है। वे किसी एजेंसी या प्राधिकरण पर निर्भर होने की बजाय खुद ही सतर्व रहें ताकि इस तरह भीषण आग लगने की संभावना ही न रहे।