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सक्रियता से बढ़ेगी प्रासंगिकता

प्रकाशित: 27-05-2026 | लेखक: सदानंद पांडे
सक्रियता से बढ़ेगी प्रासंगिकता
क्वाड यानि चतुष्पक्षीय सुरक्षा संवाद के विदेश मंत्रियों की संपन्न हुई मंगलवार की बैठक में भारत, अमेरिका, जापान और आस्ट्रेलिया ने इस संगठन की और अधिक प्रासंगिक, सार्थक और सक्रिय साबित करते हुए हिन्द प्रशान्त क्षेत्र की सुरक्षा को सुनिश्चित करने का एक स्वर में आ"ान किया।
दरअसल यह बैठक चारों सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की जल्द ही होने वाली शिखर बैठक में भूराजनीतिक दृष्टि से नई दिशा का निर्धारण करने वाले फैसलों की पृष्ठभूमि है। उल्लेखनीय है कि इस वक्त क्वाड की अध्यक्षता भी भारत के पास ही है इसलिए विदेशमंत्री डॉ. एस जयशंकर ने ही इस बैठक की अध्यक्षता की। क्वाड के विदेशमंत्रियों ने दुनिया भर में ईंधन के लिए मचे हाहाहकार के लिए प्रमुख कारण होर्मूज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को रोकने और भारी भरकम टैक्स ठोंकने को भी प्रमुख कारण माना। क्वाड विदेशमंत्रियों ने चीन को भी संदेश देते हुए कहा कि हम क्षेत्र में शांति और स्थिरता को खतरा पहुंचाने वाली, बल प्रयोग या दबाव बनाने वाली हर अस्थिरकारी या एकतरफा कार्रवाई का कड़ा विरोध दोहराते हैं।'' असल में क्वाड अपतटीय संसाधनों के विकास हस्तक्षेप, नववाहन या उड़ान भरने की स्वतंत्रता में बार-बार बाधा डालने तथा सैन्य विमानों, तटरक्षक और समुद्री मिलीशिया पोतों की खतरनाक और दबावपूर्ण कार्रवाईयों को लेकर गंभीर चिन्ता व्यक्त करते हैं। क्वाड विदेशमंत्रियों ने विवादित क्षेत्रों के सैन्यीकरण पर भी एतराज किया।
सच तो यह है कि क्वाड कोई सैन्य संगठन नहीं है जो किसी देश को निशाने पर लेकर उसे तबाह करने की रणनीति पर विचार करे। सच तो यह है कि क्वाड एक सकारात्मक संगठन है जो किसी भी तरह के विस्तारवाद-दादागिरी का जमकर विरोध करता है।
ऐसा नहीं है कि क्वाड कोई ऐसा संगठन है जो किसी, देश को निशाना बनाने के लिए बना है किन्तु यह भी है कि यदि कोई देश दादागिरी करता है तो सदस्य देश आवाज उठाते हैं और हर संभव प्रयास करते हैं कि कोई देश अपनी विस्तारवादी मानसिकता से ग्रस्त होकर भूराजनीतिक परिस्थिति को तनावग्रस्त न करे।
बहरहाल क्वाड देशों की एकजुटता का लाभ भी दिख रहा है। भारतीय प्रशांत क्षेत्र में अराजकता नहीं दिख रही है। यदि क्वाड प्रयास करे तो संभव है कि होर्मूज जलडमरूमध्य से दुनिया के सभी देशों के जहाजों को रास्ता मिल सकता है।
लब्बोलुआब यह है कि क्वाड ने आज जो सक्रियता दिखाने का संकेत दिया है, वह निश्चित रूप से इस संगठन की प्रासंगिकता, वैचारिक एकरूपता और चुनौतियों से निपटने की क्षमता में वृद्धि होगी। साथ ही क्वाड की सदस्यता के लिए जिस तरह से कुछ देश लालायित हैं, उससे भी लगता है कि इस संगठन के माध्यम से क्षेत्रीय विवादों को सुलझाने और समस्याओं के समाधान के लिए अपनी सक्रियता एवं सार्थक प्रयासों के कारण जनाकांक्षाओं की पूर्ति का शक्ति केन्द्र बन सकता है।