सीबीएसई पोर्टल 72 घंटे से अधिक समय से स्थिर
प्रकाशित: 27-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली, (भाषा)। आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि ने मंगलवार को कहा कि संस्थान और आईआईटी कानपुर के चार सदस्यीय दल ने सीबीएसई पोर्टल में हाल ही में आई गड़बड़ियों की जांच शुरू कर दी है, जिसमें भुगतान विफलताएं और उत्तर पुस्तिका अपलोड करने से संबंधित आरोप शामिल हैं।
पीटीआई-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, कामकोटि ने कहा कि टीम ने सोमवार शाम को इस मुद्दे की जांच शुरू कर दी और प्राथमिक ध्यान व्यवधान के सटीक कारण का पता लगाने पर है। उन्होंने कहा, लगभग दो दिनों तक समस्या बनी रही। तो इस विफलता का वास्तविक कारण क्या था? क्या यह कोई विकास संबंधी समस्या थी, तकनीकी समस्या थी, या फिर कोई साइबर हमला था? क्योंकि कुछ भी संभव है।
इसलिए हम यही पता लगाना चाहते हैं ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो।उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पोर्टल पिछले 72 घंटों से अधिकै समय से स्थिर बना हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर को निर्देश दिया कि वे सीबीएसई को त्रुटिरहित पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने में सहायता के लिए प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों को नियुक्त करें। कामकोटि ने कहा कि सीबीएसई द्वारा ऑन-क्रीन मार्किंग (ओएमएस) शुरू करने का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, जिससे छात्रों को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं को देखने और यह समझने की सुविधा मिलेगी कि उनके अंक कहां से काटे गए हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि सीबीएसई ने बहुत अच्छा प्रयास किया है, और साथ ही यह भी जोड़ा कि इस प्रणाली से काफी अधिक पारदर्शिता आती है। उन्होंने कहा, लेकिन कहीं न कहीं कोई भुगतान प्रक्रिया या कोई गेटवे विफल हो गया है।
टीम इस मुद्दे की गहराई से जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि एक ऐसा मजबूत मंच क्या हो सकता है जो भविष्य में हमें इस प्रकार की विफलता का सामना न करने दे आईआईटी मद्रास के निदेशक ने कहा कि टीम सबसे पहले वेबसाइट का wपूर्ण परीक्षणै करेगी और प्लेटफॉर्म को संभालने वाले डेवलपर्स को सुझाव और सिफारिशें देगी, साथ ही यह भी जांच करेगी कि शुल्क लेनदेन के दौरान सीबीएसई पोर्टल और भुगतान प्रणाली कैसे परस्पर क्रिया करते हैं।
उन्होंने कहा, वे दोनों सॉफ्टवेयर एक दूसरे से कैसे संवाद करते हैं... आप उन विफलताओं को कैसे कम कर सकते हैं? हम इसी पर चर्चा करेंगे।
टीम की संरचना के बारे में कामकोटि ने कहा कि आईआईटी मद्रास ने दो विशेषज्ञों को नियुक्त किया है - एक वरिष्" अधिकारी जिन्हें सॉफ्टवेयर के बड़े पैमाने पर उपयोग का अनुभव है और एक अन्य वरिष्" परियोजना कर्मचारी जो डेटा एनालिटिक्स लॉग से परिचित हैं।
उन्होंने कहा, इसी तरह, आईआईटी कानपुर से दो संकाय सदस्य हैं।
छात्रों की इस शिकायत के बारे में पूछे जाने पर कि अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं या धुंधली दिखाई देती हैं, कामकोटि ने कहा, हम अभी तक इस मामले के विश्लेषण के उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं।
कामकोटि ने ओएमएस प्रणाली के पीछे के व्यापक विचार का बचाव करते हुए कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों को मूल्यांकन प्रक्रिया की बेहतर जानकारी मिलती है।
उन्होंने कहा, आज सीबीएसई ने अपील करने का अवसर दिया है। अब कम से कम मुझे पता है कि मेरी उत्तर पुस्तिका का क्या हुआ है।
पीटीआई-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में, कामकोटि ने कहा कि टीम ने सोमवार शाम को इस मुद्दे की जांच शुरू कर दी और प्राथमिक ध्यान व्यवधान के सटीक कारण का पता लगाने पर है। उन्होंने कहा, लगभग दो दिनों तक समस्या बनी रही। तो इस विफलता का वास्तविक कारण क्या था? क्या यह कोई विकास संबंधी समस्या थी, तकनीकी समस्या थी, या फिर कोई साइबर हमला था? क्योंकि कुछ भी संभव है।
इसलिए हम यही पता लगाना चाहते हैं ताकि भविष्य में ऐसी समस्या दोबारा न हो।उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) का पोर्टल पिछले 72 घंटों से अधिकै समय से स्थिर बना हुआ है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने रविवार को आईआईटी मद्रास और आईआईटी कानपुर को निर्देश दिया कि वे सीबीएसई को त्रुटिरहित पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया सुनिश्चित करने में सहायता के लिए प्रोफेसरों और तकनीकी विशेषज्ञों को नियुक्त करें। कामकोटि ने कहा कि सीबीएसई द्वारा ऑन-क्रीन मार्किंग (ओएमएस) शुरू करने का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना है, जिससे छात्रों को मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं को देखने और यह समझने की सुविधा मिलेगी कि उनके अंक कहां से काटे गए हैं। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि सीबीएसई ने बहुत अच्छा प्रयास किया है, और साथ ही यह भी जोड़ा कि इस प्रणाली से काफी अधिक पारदर्शिता आती है। उन्होंने कहा, लेकिन कहीं न कहीं कोई भुगतान प्रक्रिया या कोई गेटवे विफल हो गया है।
टीम इस मुद्दे की गहराई से जांच करेगी और यह पता लगाएगी कि एक ऐसा मजबूत मंच क्या हो सकता है जो भविष्य में हमें इस प्रकार की विफलता का सामना न करने दे आईआईटी मद्रास के निदेशक ने कहा कि टीम सबसे पहले वेबसाइट का wपूर्ण परीक्षणै करेगी और प्लेटफॉर्म को संभालने वाले डेवलपर्स को सुझाव और सिफारिशें देगी, साथ ही यह भी जांच करेगी कि शुल्क लेनदेन के दौरान सीबीएसई पोर्टल और भुगतान प्रणाली कैसे परस्पर क्रिया करते हैं।
उन्होंने कहा, वे दोनों सॉफ्टवेयर एक दूसरे से कैसे संवाद करते हैं... आप उन विफलताओं को कैसे कम कर सकते हैं? हम इसी पर चर्चा करेंगे।
टीम की संरचना के बारे में कामकोटि ने कहा कि आईआईटी मद्रास ने दो विशेषज्ञों को नियुक्त किया है - एक वरिष्" अधिकारी जिन्हें सॉफ्टवेयर के बड़े पैमाने पर उपयोग का अनुभव है और एक अन्य वरिष्" परियोजना कर्मचारी जो डेटा एनालिटिक्स लॉग से परिचित हैं।
उन्होंने कहा, इसी तरह, आईआईटी कानपुर से दो संकाय सदस्य हैं।
छात्रों की इस शिकायत के बारे में पूछे जाने पर कि अपलोड की गई उत्तर पुस्तिकाएं उनकी लिखावट से मेल नहीं खातीं या धुंधली दिखाई देती हैं, कामकोटि ने कहा, हम अभी तक इस मामले के विश्लेषण के उस चरण तक नहीं पहुंचे हैं।
कामकोटि ने ओएमएस प्रणाली के पीछे के व्यापक विचार का बचाव करते हुए कहा कि इससे छात्रों और अभिभावकों को मूल्यांकन प्रक्रिया की बेहतर जानकारी मिलती है।
उन्होंने कहा, आज सीबीएसई ने अपील करने का अवसर दिया है। अब कम से कम मुझे पता है कि मेरी उत्तर पुस्तिका का क्या हुआ है।