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स्वभाषा और स्वबोध' विषय पर संगोष्ठी एवं भारतीय शिक्षण मंडल का 57वाँ स्थापना दिवस समारोह संपन्न

प्रकाशित: 27-05-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
शहडोल (वीअ)। पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में स्वबोध - भारतीय शिक्षा के आधारविषय पर संगोष्ठी एवं भारतीय शिक्षण मंडल का 57वाँ स्थापना दिवस समारोह गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। कार्पाम में शिक्षा के भारतीयकरण, मूल्य आधारित शिक्षा तथा राष्ट्र निर्माण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
कार्पाम का शुभारंभ भारतीय शिक्षण मंडल के ध्येय वाक्य एवं ध्येय श्लोक के साथ हुआ। ध्येय वाक्य का वाचन कृष्णन चतुर्वेदी एवं ध्येय श्लोक का उच्चारण डॉ. गीता सराफ द्वारा किया गया। इसके उपरांत माँ सरस्वती की प्रतिमा पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर कार्पाम का विधिवत शुभारंभ किया गया। सभी अतिथियों का शाल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मान किया गया। कार्पाम में डॉ. महेंद्र किशोर भटनागर, जिला संयोजक एवं विश्वविद्यालय उप प्रमुख, भारतीय शिक्षण मंडल ने मंडल का परिचय एवं आयोजन का उद्देश्य प्रस्तुत करते हुए इसके कार्यों, उद्देश्यों एवं गतिविधियों पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि एवं वक्ता नागेंद्र वशिष्ठ क्षेत्रीय बौद्धिक प्रमुख मध्य भारत प्रांत ने अपने व्याख्यान में शिक्षा में भारतीयता के महत्व को रेखांकित करते हुए भारतीय मनीषियों एवं ऋषियों के ज्ञान और योगदान का उल्लेख किया। उन्होंने ग्राम केंद्रित शिक्षा, सामाजिक समरसता, पर्यावरण शिक्षा तथा अनुसंधान पर विशेष बल देते हुए कहा कि उच्च शिक्षा में संस्कार, नैतिकता एवं सामाजिक उत्तरदायित्व का समावेश अत्यंत आवश्यक है। कार्पाम की अध्यक्षता करते हुए कुलगुरु प्रो राम शंकर ने भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिकता एवं समृद्धि पर प्रकाश डाला। उन्होंने बीज मंत्रों, स्वभूत ज्ञान तथा क्वांटम एंटैंगलमेंट जैसे विषयों को भारतीय प्राचीन ज्ञान एवं ध्यान परंपरा से जोड़ते हुए अपनी बात रखी। कार्पाम के अंत में कुलसचिव डॉ आशीष तिवारी द्वारा सभी अतिथियों को धन्यवाद ज्ञापित करते हुए शिक्षण मंडल के द्वारा किए गए प्रयासों की सराहना की । डॉ चेतना सिंह विभागाध्यक्ष राजनीति विज्ञान ने सभी अतिथियों का आभार प्रदर्शन किया । कार्पाम का सफल संचालन कृष्णम चतुर्वेदी ने किया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के प्राध्यापकगण, भारतीय शिक्षण मंडल के कार्यकर्ता एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी मौजूद रहे।