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आरपीएफ कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई हो

प्रकाशित: 16-07-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 जुलाई 2026 को डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट और रेलवे सुरक्षा बल के कुछ जवानों के बीच हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिसके बाद रेलवे प्रशासन ने तत्काल संज्ञान लेते हुए संबंधित आरपीएफ कर्मियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई प्रारंभ की।
जानकारी के अनुसार हीराकुंड एक्सप्रेस के प्रस्थान के समय एक महिला यात्री का परिवार प्लेटफॉर्म पर छूट गया था। यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ड्यूटी पर तैनात डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट ने ट्रेन को रोकने का निर्देश दिया। इसी दौरान आरपीएफ के जवानों ने स्थिति को चेन पुलिंग अथवा अनधिकृत रूप से ट्रेन रोकने का मामला माना। विवाद बढ़ने पर आरपीएफ कर्मियों ने डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट के साथ कथित रूप से धक्का-मुक्की, कॉलर पकड़ने, जमीन पर गिराने तथा उन्हें घसीटते हुए आरपीएफ थाने तक ले जाने की घटना सामने आई। इस घटना की व्यापक आलोचना हुई तथा रेलवे कर्मचारियों में भी गहरा असंतोष देखने को मिला जिसके कारण रेलवे ने इन कर्मियों पर कार्रवाई करते हुए इनको निलंबित किया है हालांकि परिवार न्याय की मांग कर रहा है और एक सांसद महादेव इस घटना की निंदा की है और सच कार्यवाही की मांग की। यह पूरा घटपाम स्टेशन परिसर में मौजूद लोगों के मोबाइल कैमरों में रिकॉर्ड हो गया और बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। घटना के बाद रेलवे प्रशासन ने प्रारंभिक जांच के आधार पर आरपीएफ के इंचार्ज सुरेंद्र चौधरी, एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र तथा कांस्टेबल बदन सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच के लिए तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय समिति का गठन किया गया। पीड़ित अधिकारी की शिकायत पर जीआरपी ने संबंधित आरपीएफ कर्मियों के विरुद्ध बीएनएस की लागू धाराओं के अंतर्गत प्राथमिकी भी दर्ज कर जांच प्रारंभ कर दी है। इस घटना के विरोध में रेलवे के विभिन्न कर्मचारी संगठनों और कर्मचारियों ने आरपीएफ थाने के बाहर प्रदर्शन किया तथा दोषी कर्मियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग की।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।