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महिला पर तेजाबी हमला एक त्रासदी

प्रकाशित: 02-09-2026 | लेखक: संपादकीय टीम
हापुड़ जिले के सिंभावली थाना क्षेत्र के माधवपुर गांव में दो बहनों पर तेजाब फेंककर किए गए हमले की घटना ने एक बार फिर समाज और शासन-प्रशासन के सामने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। किसी महिला या युवती पर तेजाब फेंकना केवल शारीरिक हमला नहीं है, बल्कि उसके पूरे जीवन, आत्मसम्मान, मानसिक स्थिति और सामाजिक अस्तित्व पर हमला है। तेजाब का हमला पीड़िता के शरीर को जितना नुकसान पहुंचाता है, उससे कहीं अधिक गहरा असर उसके मन और भविष्य पर पड़ता है। चेहरे और शरीर पर पड़े घाव कई बार जिंदगी भर के लिए निशान बन जाते हैं और पीड़िता को हर दिन उस भयावह घटना की याद दिलाते रहते हैं।
महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की प्रकृति लगातार गंभीर होती जा रही है। छेड़छाड़, पीछा करना, धमकी देना, घरेलू हिंसा और यौन अपराध जैसी घटनाएं अपने आप में गंभीर हैं, लेकिन तेजाब हमला इन अपराधों की सबसे भयावह परिणतियों में से एक है। किसी व्यक्ति द्वारा असहमति, बदले, प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने, पारिवारिक विवाद या किसी अन्य कारण से किसी महिला के चेहरे और शरीर को तेजाब से जला देना मानवता के विरुद्ध घृणित कृत्य है। यह केवल क्षणिक गुस्से का परिणाम नहीं माना जा सकता। यह ऐसा अपराध है जिसके परिणाम पीड़िता को दशकों तक भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए कानून में कठोरता के साथ-साथ उसके प्रभावी ािढयान्वयन की आवश्यकता है। तेजाब हमले के मामलों में जांच तेजी से पूरी हो, आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए जाएं और मुकदमों का शीघ्र निपटारा हो। दोष सिद्ध होने पर कानून में निर्धारित कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा केंद्र और राज्य सरकारों से तेजाब की खुदरा पी पर रोक लगाने की संभावनाओं के संबंध में जवाब मांगा जाना इस पूरे विषय की गंभीरता को दर्शाता है। यह समय केवल न्यायालय के आदेशों और दिशा-निर्देशों को दोहराने का नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करने का है कि उनका जमीन पर शत-प्रतिशत पालन हो। सरकारों को यह देखना होगा कि तेजाब बेचने वाली प्रत्येक दुकान का पंजीकरण हो, बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए, खरीदार की पहचान और उपयोग का उद्देश्य दर्ज किया जाए तथा नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदार के खिलाफ तत्काल कठोर कार्रवाई हो। तेजाब को सामान्य बाजार में उसी तरह उपलब्ध नहीं होना चाहिए जैसे कोई सामान्य घरेलू वस्तु उपलब्ध होती है। जिन औद्योगिक अथवा व्यावसायिक कार्यों में तेजाब की आवश्यकता है, वहां नियंत्रित और सत्यापन योग्य व्यवस्था बनाई जा सकती है, लेकिन व्यक्तिगत उपयोग के नाम पर किसी भी व्यक्ति को बिना जांच-पड़ताल तेजाब उपलब्ध कराना समाज के लिए गंभीर खतरा है। स्थानीय प्रशासन, नगर निकाय, ग्राम पंचायत और पुलिस को अपने-अपने क्षेत्र में ऐसी दुकानों की नियमित जांच करनी चाहिए। अवैध बिक्री की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई होनी चाहिए और केवल घटना के बाद पुलिस कार्रवाई करने के बजाय अपराध की संभावना को पहले ही रोकने की व्यवस्था विकसित करनी होगी। महिलाओं के खिलाफ होने वाले अपराधों की प्रकृति लगातार गंभीर होती जा रही है। छेड़छाड़, पीछा करना, धमकी देना, घरेलू हिंसा और यौन अपराध जैसी घटनाएं अपने आप में गंभीर हैं, लेकिन तेजाब हमला इन अपराधों की सबसे भयावह परिणतियों में से एक है।
किसी व्यक्ति द्वारा असहमति, बदले, प्रेम प्रस्ताव ठुकराए जाने, पारिवारिक विवाद या किसी अन्य कारण से किसी महिला के चेहरे और शरीर को तेजाब से जला देना मानवता के विरुद्ध घृणित कृत्य है। यह केवल क्षणिक गुस्से का परिणाम नहीं माना जा सकता। यह ऐसा अपराध है जिसके परिणाम पीड़िता को दशकों तक भुगतने पड़ सकते हैं। इसलिए कानून में कठोरता के साथ-साथ उसके प्रभावी ािढयान्वयन की आवश्यकता है। तेजाब हमले के मामलों में जांच तेजी से पूरी हो, आरोपियों के खिलाफ मजबूत साक्ष्य जुटाए जाएं और मुकदमों का शीघ्र निपटारा हो। दोष सिद्ध होने पर कानून में निर्धारित कठोरतम दंड दिया जाना चाहिए। समाज में यह संदेश जाना आवश्यक है कि किसी महिला पर तेजाब फेंकना ऐसा अपराध है जिसमें अपराधी किसी भी परिस्थिति में बच नहीं सकता। हालांकि मृत्युदंड जैसे दंड का प्रश्न विधि और संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार न्यायालय के अधिकार क्षेत्र में आता है, लेकिन जनता की यह भावना समझी जा सकती है कि ऐसे जघन्य अपराधों में कठोरतम कानूनी दंड होना चाहिए। इस पूरे मामले का दूसरा पक्ष शायद उतना ही महत्वपूर्ण है, जिस पर समाज में अपेक्षाकृत कम चर्चा होती है। तेजाब हमले की पीड़िता केवल हमले के समय ही पीड़ित नहीं होती, बल्कि उसके बाद शुरू होने वाली जिंदगी भी संघर्षों से भरी होती है।
-वीरेंद्र कुमार जाटव,
नई दिल्ली।