रीवा के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल ने पहली बाल पेडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी करके रचा एक नया इतिहास
प्रकाशित: 28-04-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
रीवा के सुपरस्पेशलिटी अस्पताल के कार्डियोलॉजिस्ट विभाग ने विंध्य क्षेत्र में पहली बार हृदय रोग से पीड़ित एक बच्ची का सफल सर्जरी करके एक नया इतिहास कायम किया है. यह पहली बार है जब विंध्य क्षेत्र में इस तरीके का पहला ऑपरेशन हुआ था, यह कारनामा डॉक्टर एस के त्रिपाठी और उनकी टीम ने किया है. इससे पहले टीम एक ही दिन दो किडनी ट्रांसप्लांट करने का कारनामा कर चुकी है.
बच्चों के हृदय की सर्जरी के लिए नागपुर, दिल्ली मुंबई रुख करते थे लोग
गौरतलब है अभी तक बच्चों की हृदय रोग सर्जरी के लिए रीवा, सतना और सीधी, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली, पन्ना, छतरपुर, मऊगंज और मैहर जिले के लोग नागपुर, दिल्ली मुंबई की ओर रुख किया करते थे, लेकिन अब उनको यह सुविधा रीवा जिले में ही मिलने लगेगी, जिससे आसपास के मरीजों को न केवल इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके बहुमूल्य पैसों की भी बचत हो सकेगी.
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनने के बाद लगातार इतिहास रच रहा रीवा
रिपोर्ट के मुताबिक.रीवा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनने के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस तरीके के ऑपरेशन हो रहे हैं, जो इसके पहले केवल महानगर में होते थे. रीवा के प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम ने दिल में छेद की रोगी 6 साल की नायरा बानो का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया है, जो विध्य क्षेत्र की पहली बाल पेडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी है.
इकोकार्डियोग्राफी टेस्ट में दो बड़ी नसों के बीच असामान्य कनेक्शन मिला
उल्लेखनीय है बेटी की बीमारी से काफी परेशान हो चुके माता-पिता ने कई स्थानों पर बेटी का इलाज करवाया, लेकिन उनकी बेटी का सही उपचार नहीं हो मिला. तब उन्होंने रीवा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का रुख किया. मशहूर डॉ. त्रिपाठी और उनकी टीम ने परीक्षण के बाद बच्ची का इकोकार्डियोग्राफी किया, जिसमें दो बड़ी नसों के बीच असामान्य कनेक्शन (PDA) पाया गया.
बच्चों के हृदय संबंधी रोग के इलाज ऐसी जटिल प्रक्रियाएं नहीं की गई थी
डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम के लिए मासूम के दिल की बीमारी का इलाज एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि बच्चों के हृदय संबंधी रोग के इलाज में उपरोक्त जटिल प्रक्रियाएं अब तक नहीं की गईं थी. डॉक्टरों की टीम ने निर्णय किया और डॉ. त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने बिना किसी जटिलता के PDA को सफलतापूर्वक बंद कर दिया, जिसके बाद बाद बच्ची नायरा अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है.
आयुष्मान कार्ड से नायरा बानों को इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया गया
रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में संपन्न हुए नायरा बानों के सफल बाल पेडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी का पूरा इलाज का खर्च आयुष्मान कार्ड की मदद किया गया और बच्चों के हृदय रोग की पहली सर्जरी कर डाक्टरों ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. माना जा सकता है रीवा समेत विध्य क्षेत्र के पड़ोसी जिले के बच्चों को अब उच्च स्तरीय हृदय उपचार के लिए बाहर नहीं जाने पड़ेगा.
बच्चों के हृदय की सर्जरी के लिए नागपुर, दिल्ली मुंबई रुख करते थे लोग
गौरतलब है अभी तक बच्चों की हृदय रोग सर्जरी के लिए रीवा, सतना और सीधी, शहडोल, अनूपपुर, सिंगरौली, पन्ना, छतरपुर, मऊगंज और मैहर जिले के लोग नागपुर, दिल्ली मुंबई की ओर रुख किया करते थे, लेकिन अब उनको यह सुविधा रीवा जिले में ही मिलने लगेगी, जिससे आसपास के मरीजों को न केवल इलाज की सुविधा मिलेगी, बल्कि उनके बहुमूल्य पैसों की भी बचत हो सकेगी.
सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनने के बाद लगातार इतिहास रच रहा रीवा
रिपोर्ट के मुताबिक.रीवा में सुपर स्पेशलिटी अस्पताल बनने के बाद चिकित्सा के क्षेत्र में लगातार बड़ी उपलब्धियां हासिल कर रहा है. इस तरीके के ऑपरेशन हो रहे हैं, जो इसके पहले केवल महानगर में होते थे. रीवा के प्रोफेसर ऑफ कार्डियोलॉजी डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम ने दिल में छेद की रोगी 6 साल की नायरा बानो का सफल ऑपरेशन कर उसे नया जीवन दिया है, जो विध्य क्षेत्र की पहली बाल पेडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी है.
इकोकार्डियोग्राफी टेस्ट में दो बड़ी नसों के बीच असामान्य कनेक्शन मिला
उल्लेखनीय है बेटी की बीमारी से काफी परेशान हो चुके माता-पिता ने कई स्थानों पर बेटी का इलाज करवाया, लेकिन उनकी बेटी का सही उपचार नहीं हो मिला. तब उन्होंने रीवा सुपरस्पेशलिटी अस्पताल का रुख किया. मशहूर डॉ. त्रिपाठी और उनकी टीम ने परीक्षण के बाद बच्ची का इकोकार्डियोग्राफी किया, जिसमें दो बड़ी नसों के बीच असामान्य कनेक्शन (PDA) पाया गया.
बच्चों के हृदय संबंधी रोग के इलाज ऐसी जटिल प्रक्रियाएं नहीं की गई थी
डॉ. एस.के. त्रिपाठी और उनकी टीम के लिए मासूम के दिल की बीमारी का इलाज एक चुनौतीपूर्ण कार्य था, क्योंकि बच्चों के हृदय संबंधी रोग के इलाज में उपरोक्त जटिल प्रक्रियाएं अब तक नहीं की गईं थी. डॉक्टरों की टीम ने निर्णय किया और डॉ. त्रिपाठी के नेतृत्व में टीम ने बिना किसी जटिलता के PDA को सफलतापूर्वक बंद कर दिया, जिसके बाद बाद बच्ची नायरा अब पूरी तरह स्वस्थ है और सामान्य जीवन जी रही है.
आयुष्मान कार्ड से नायरा बानों को इलाज पूरी तरह निःशुल्क किया गया
रीवा सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में संपन्न हुए नायरा बानों के सफल बाल पेडियाट्रिक कार्डियक सर्जरी का पूरा इलाज का खर्च आयुष्मान कार्ड की मदद किया गया और बच्चों के हृदय रोग की पहली सर्जरी कर डाक्टरों ने इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया है. माना जा सकता है रीवा समेत विध्य क्षेत्र के पड़ोसी जिले के बच्चों को अब उच्च स्तरीय हृदय उपचार के लिए बाहर नहीं जाने पड़ेगा.