हर्ष फायरिंग में मौत : दोषसिद्धि के खिलाफ भाजपा विधायक की अर्जी पर दिल्ली पुलिस से जवाब मांगा
प्रकाशित: 22-07-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
नई दिल्ली , (विसं)। बिहार से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायक राजू कुमार सिंह ने 2018 में हर्ष फायरिंग में एक महिला की मौत से जुड़े मामले में अपनी दोषसिद्धि और चार साल की जेल की सजा के खिलाफ मंगलवार को दिल्ली उच्च न्यायालय का रुख किया।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने सिंह की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले में दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने के उनके अनुरोध पर जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायमूर्ति जैन ने मौखिक रूप से कहा कि बिहार के साहेबगंज से विधायक सिंह को एक wगंभीरै अपराध का दोषी "हराया गया है और मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए तय की।
अदालत ने कहा, w(भारतीय दंड संहिता की) धारा-304 (गैर-इरादतन हत्या) एक गंभीर अपराध से जुड़ी धारा है। ऐसे में दोषसिद्धि पर रोक क्यों लगाई जाए? हम कल या परसों इस पर सुनवाई करेंगे। हम इस पर जवाब मांगते हैं।w अदालत ने मृत महिला के कानूनी प्रतिनिधियों को भी कार्यवाही में शामिल करने का निर्देश दिया।
निचली अदालत ने चार जुलाई को सिंह को हर्ष फायरिंग में एक महिला की मौत से जुड़े मामले में चार साल की जेल और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अदालत ने wबंदूक संस्कृतै की आलोचना करते हुए कहा था, wकानून के शासन वाले राज्य में हमें न तो सिंघम की जरूरत है और न ही पुष्पा की।w
सिंह को 31 दिसंबर 2018 की रात को फतेहपुर बेरी के एक फार्महाउस में नये साल के जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग में अर्चना गुप्ता नामक महिला की मौत के मामले में दोषी "हराया गया था।
अदालत ने 34 पन्नों के अपने आदेश में कोई नरमी बरतने से इनकार करते हुए कहा था कि सिंह साफ तौर पर सत्ता के नशे में चूर थे और गोली चलाकर अपना रुतबा दिखाना चाहते थे।
अदालत ने कहा था कि ऐसी हरकतें अवैध हथियारों के चलन को बढ़ावा देती हैं और इन्हीं की वजह से राजनीति में बाहुबलियों का दखल बढ़ा है।
न्यायमूर्ति मनोज जैन ने सिंह की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए मामले में दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाने के उनके अनुरोध पर जवाब दाखिल करने को कहा।
न्यायमूर्ति जैन ने मौखिक रूप से कहा कि बिहार के साहेबगंज से विधायक सिंह को एक wगंभीरै अपराध का दोषी "हराया गया है और मामले की सुनवाई बृहस्पतिवार के लिए तय की।
अदालत ने कहा, w(भारतीय दंड संहिता की) धारा-304 (गैर-इरादतन हत्या) एक गंभीर अपराध से जुड़ी धारा है। ऐसे में दोषसिद्धि पर रोक क्यों लगाई जाए? हम कल या परसों इस पर सुनवाई करेंगे। हम इस पर जवाब मांगते हैं।w अदालत ने मृत महिला के कानूनी प्रतिनिधियों को भी कार्यवाही में शामिल करने का निर्देश दिया।
निचली अदालत ने चार जुलाई को सिंह को हर्ष फायरिंग में एक महिला की मौत से जुड़े मामले में चार साल की जेल और 25 लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी।
अदालत ने wबंदूक संस्कृतै की आलोचना करते हुए कहा था, wकानून के शासन वाले राज्य में हमें न तो सिंघम की जरूरत है और न ही पुष्पा की।w
सिंह को 31 दिसंबर 2018 की रात को फतेहपुर बेरी के एक फार्महाउस में नये साल के जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग में अर्चना गुप्ता नामक महिला की मौत के मामले में दोषी "हराया गया था।
अदालत ने 34 पन्नों के अपने आदेश में कोई नरमी बरतने से इनकार करते हुए कहा था कि सिंह साफ तौर पर सत्ता के नशे में चूर थे और गोली चलाकर अपना रुतबा दिखाना चाहते थे।
अदालत ने कहा था कि ऐसी हरकतें अवैध हथियारों के चलन को बढ़ावा देती हैं और इन्हीं की वजह से राजनीति में बाहुबलियों का दखल बढ़ा है।