ई-20 पेट्रोल से वाहनों के नुकसान का मुद्दा पंजाब विधानसभा में गूंजा
प्रकाशित: 05-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
पवन आश्री
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया। अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है। उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, "केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद। विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।"
चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज पंजाब विधानसभा में ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का मुद्दा उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने संसद में यह मानने के बावजूद कि ई-20 से वाहनों की माइलेज घटती है, इसे जबरदस्ती थोपा है। उन्होंने कहा कि इस कदम से वाहन मालिकों पर वित्तीय बोझ पड़ रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि इसे लागू करने में इतनी जल्दबाजी क्यों की गई है और आरोप लगाया कि इसका मकसद अमेरिका के साथ हुए व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करना है, जिसके तहत भारत अगले पाँच सालों में 20 अरब डॉलर का इथेनॉल आयात करेगा। इस बात पर जोर देते हुए कि उपभोक्ताओं को चुनाव के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता, पंजाब विधानसभा ने केंद्र सरकार से फ्यूल स्टेशनों पर शुद्ध पेट्रोल और ई-20 दोनों उपलब्ध कराने और आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए ई-20 की कीमत घटाने की मांग करता हुआ एक प्रस्ताव पारित किया। अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "पंजाब विधानसभा सत्र के दौरान, मैंने उपभोक्ताओं पर ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल थोपे जाने और इससे लोगों के वाहनों को हो रहे नुकसान का गंभीर मुद्दा उठाया। यह तेल केंद्र सरकार द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक अध्ययन के थोपा गया है। एक सर्वेक्षण के अनुसार, इससे 67 फीसदी वाहनों की माइलेज घटी है, जबकि 45 फीसदी वाहनों के इंजन खराब हुए हैं, जिससे आम लोगों पर सीधा वित्तीय बोझ पड़ा है। उन्होंने पोस्ट के अंत में लिखा, "केंद्र सरकार ने स्वयं संसद में माना है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों की माइलेज घटाता है। यह सब अमेरिका के साथ हुए एक बड़े व्यापार समझौते के हितों की पूर्ति करने और कॉरपोरेट कंपनियों को लाभ पहुँचाने के लिए किया जा रहा है। हमारी मांग है कि फ्यूल स्टेशनों पर उपभोक्ताओं को शुद्ध पेट्रोल और ई-20 के बीच चयन करने का अधिकार दिया जाए और ई-20 की कीमत तुरंत घटाई जाए। पंजाब विधानसभा ने आम लोगों के हितों की रक्षा के लिए इस मुद्दे पर प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज दिया है। इंकलाब जिंदाबाद। विधानसभा में इस मुद्दे पर बहस को समेटते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, "यह देश के हर नागरिक के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
ई-20 इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल बिना किसी उचित शोध, वैज्ञानिक अध्ययन या सलाह-मशवरे के वाहन मालिकों पर थोपा गया है। केंद्र सरकार ने यह साबित करने के लिए कोई अध्ययन नहीं किया और न ही किसी इंजीनियरिंग कॉलेज या आई.आई.टी. से प्रमाण-पत्र लिया है कि ई-20 पेट्रोल वाहनों के इंजनों के लिए सुरक्षित है।"