तुलाज ने रचा इतिहास, संस्थान से बना विश्वविद्यालय
प्रकाशित: 05-08-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
देहरादून,(वीअ)। तुलाज इंस्टीट्यूट अब आधिकारिक रूप से तुलाज यूनिवर्सिटी बन गया है। यह परिवर्तन उत्तराखंड प्राइवेट यूनिवर्सिटीज (संशोधन) अधिनियम, 2026 के तहत स्वीकृत हुआ है। यह उपलब्धि न केवल संस्थान के लिए, बल्कि उत्तराखंड में उच्च शिक्षा के क्षेत्र के लिए भी एक ऐतिहासिक पड़ाव है। पिछले 20 वर्षों में तुलाज ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध और उद्योग से जुड़ी व्यावहारिक शिक्षा पर विशेष ध्यान देते हुए निरंतर प्रगति की है। संस्थान का उद्देश्य हमेशा से विद्यार्थियों को ऐसी स्नातक एवं स्नातकोत्तर शिक्षा प्रदान करना रहा है, जो उन्हें केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि सफल करियर के लिए भी तैयार करे। विश्वविद्यालय बनने के बाद अब यहाँ इंजीनियरिंग, कृषि, कंप्यूटर एप्लीकेशंस, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, पत्रकारिता एवं जनसंचार, फार्मेसी तथा विधि जैसे विषयों में स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्पाम संचालित किए जा रहे हैं। विश्वविद्यालय का दर्जा मिलने के साथ आने वाले वर्षों में इन क्षेत्रों को और सशक्त बनाने के लिए नए पाठ्पाम भी प्रारम्भ किए जाएंगे। दून घाटी की प्राकृतिक हरियाली के बीच फैला 22 एकड़ का परिसर विद्यार्थियों के समग्र विकास के लिए अनुकूल वातावरण प्रदान करता है। तुलाज यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं अध्यक्ष सुनील कुमार जैन ने इस उपलब्धि पर अपने विचार साझा करते हुए कहा, ष्जब हमने वर्ष 2006 में तुलाज इंस्टीट्यूट की शुरुआत की थी, तब हमारा उद्देश्य केवल इतना था कि विद्यार्थियों को ऐसी ईमानदार और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिले, जो उन्हें केवल परीक्षाओं के लिए नहीं, बल्कि जीवन के लिए तैयार करे। आज विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना इस बात का प्रमाण है कि वह सपना अब और व्यापक रूप ले चुका है। हमारी नैक ए मान्यता और एनबीए से मान्यता प्राप्त कार्पाम इस बात का प्रमाण हैं कि हमने गुणवत्ता से कभी समझौता नहीं किया। एआईसीटीई द्वारा समर्थित आइडिया लैब, आईहब-आईआईटी रोपड़ के सहयोग से स्थापित साइबर फिजिकल सिस्टम लैब, यूकॉस्ट द्वारा समर्थित टेक्नोलॉजी रिसोर्स सेंटर और तुलाज टेक्नोलॉजी बिजनेस इन्क्यूबेटर जैसी पहलें इसी सोच का परिणाम हैं कि एक अच्छा शिक्षण संस्थान केवल भविष्य के बारे में पढ़ाए नहीं, बल्कि भविष्य का निर्माण भी करे।