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चंद्रोदय मंदिर में श्रद्धा भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मना श्रीकृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव

प्रकाशित: 05-09-2026 | लेखक: वीर अर्जुन टीम
मथुरा ब्यूरो। वृंदावन चंद्रोदय मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण का अवतरण दिवस श्रीकृष्ण जन्माष्टमी आध्यात्मिक हर्षोल्लास, भक्ति और वैदिक परंपराओं के साथ भव्य रूप से मनाया गया। इस अवसर पर मंदिर परिसर को रंग-बिरंगे पुष्पों एवं आकर्षक विद्युत सज्जा से सुसज्जित किया गया। उत्सव में लड्डू गोपाल अभिषेक, छप्पन भोग, विशेष श्रृंगार, झूलन उत्सव, भजन संध्या और हरिनाम संकीर्तन प्रमुख आकर्षण का केन्द्र रहे।
वैदिक मंत्रोच्चारण के मध्य भगवान श्रीश्री राधा वृन्दावन चंद्र का पंचगव्य ;दूध, दही, घी, शहद एवं मिश्रीद्ध के साथ 108 प्रकार के फलों के रस, औषधियों और पुष्पों से भव्य महाभिषेक किया गया। इस अवसर पर भगवान को श्याम रंग के रेशमी एवं चांदी की कढ़ाई युक्त वस्त्र धारण कराए गए। वहीं निताई-गौरांग को भी विशेष अलंकरण एवं पुष्पमालाओं से सुशोभित किया गया। वयं भगवान इस शाश्वत सत्य को रेखांकित करते हुए मंदिर अध्यक्ष श्री चंचलापति दास जी ने श्रीमद्भागवत के प्रसिद्ध श्लोक चांशकलाः पुंस कृष्णस्तु भगवान् स्वयम्।
इन्द्रारि-व्याकुलं लोकं मृडयन्ति युगे का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रीकृष्ण सभी अवतारों के मूल स्रोत एवं स्वयं पूर्ण पुरुषोत्तम भगवान हैं। जब-जब संसार अधर्म और आसुरी शक्तियों के कारण व्याकुल होता है, तब भगवान भक्तों की रक्षा, धर्म की स्थापना तथा समस्त जीवों के कल्याण के लिए युग-युग में अवतरित होते हैं। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण भक्तों पर अपनी विशेष कृपा करते हुए अर्चा-विग्रह के रूप में भी हमारे मध्य विराजमान हैं, जिससे भक्त प्रत्यक्ष रूप से उनकी सेवा, पूजा और आराधना कर सकें। उन्होंने कहा कि जन्माष्टमी केवल भगवान के अवतरण का उत्सव नहीं, बल्कि भगवान के प्रति अपने प्रेम, श्रद्धा और भक्ति को जागृत करने का पावन अवसर है।